Friday, May 14, 2021

उड़ गई थी अमिताभ बच्‍चन की रातों की नींद, दोस्‍त कहते- कोई और होता तो सूइसाइड कर लेता

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बॉलिवुड के ‘महानायक’ अमिताभ बच्‍चन (Amitabh Bachchan) हर किसी के लिए एक मिसाल हैं। करियर के शुरुआत में ही बैक टू बैक फ्लॉप फिल्‍में, फिर एंग्री यंग मैन की सुपरहिट छवि। बीते करीब 50 साल से अमिताभ बच्‍चन लगातार फिल्‍में कर रहे हैं। इस बीच ऐसा भी वक्‍त आया, जब लगने लगा कि अब जलवा खत्‍म हो गया है। लेकिन ‘बिग बी’ ने हर बार वापसी की। कभी ‘अग्‍न‍िपथ’ के विजय दीनानाथ चौहान बनकर तो कभी ‘मोहब्‍बतें’ में नारायण शंकर बनकर। लेकिन इन सब के बीच एक वक्‍त ऐसा भी था, जब अमिताभ की रातों की नींद उड़ (Amitabh Bachchan Sleepless Nights) गई थी। कुछ समझ नहीं आ रहा था। कई दोस्‍तों ने तो यहां तक कह दिया कि यदि वो अमिताभ की जगह होते तो सूइसाइड (Suicidal Thoughts) कर लेते।

…जैसे थम गई थीं देश की सांसें

यह हिस्‍सा है 1982 का है। जी हां, वही वक्‍त जब एक तरह से अमिताभ बच्‍चन का पुनर्जन्‍म हुआ था। 26 जुलाई को फिल्‍म ‘कूली’ (Coolie) के सेट पर हादसा हुआ। पुनीत इस्‍सर (Puneet Issar) के साथ ऐक्‍शन सीन की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्‍चन के पेट में चोट लगी। सेट पर पलक झपकते ही माहौल बदल गया। अमिताभ बच्‍चन को आनन-फानन में अस्‍पताल ले जाया गया, जहां उनकी कई सर्जरियां हुईं।

दो महीने बाद घर लौटे थे अमिताभ

‘कूली’ के सेट पर हुए इस हादसे ने देशभर में हर किसी को चिंता में डाल दिया। क्‍या नेता, क्‍या अभ‍िनेता और क्‍या आम आदमी। हर किसी के हाथ अमिताभ बच्‍चन के लिए दुआओं में उठने लगे। जगह-जगह अमिताभ बच्‍चन के फैन्‍स ने हवन से लेकर पूजा-पाठ तक का आयोजन किया। हर किसी को चिंता थी अमिताभ बच्‍चन के सलामती की। दुआओं ने असर दिखाया। दो महीने के लंबे ईलाज के बाद अमिताभ बच्‍चन घर लौट आए। लेकिन यह किस्‍सा यही खत्‍म नहीं होता है।

रातों को अचानक खुलती नींद, पसीने से भीग जाता शरीर

अमिताभ बच्‍चन तब 40 साल के थे। इस हादसे ने अमिताभ बच्‍चन की जिंदगी बदल दी थी। वह ईलाज के बाद पोस्‍ट-एक्‍स‍िडेंट स्‍ट्रेस यानी हादसे के बाद वाले तनाव का श‍िकार हो गए। रातों की नींद उड़ गई। अमिताभ ने खुद एक इंटरव्‍यू में बताया कि वह कई महीनों तक चैन से सो नहीं पाए। अचानक रात को नींद खुल जाती। पूरा शरीर पसीने से भीग जाता। वह बैचेन हो उठते थे और जया बच्‍चन को आवाज लगाने लगते थे।

बैचेनी, हताशा, चिंता और निराशा का वह वक्‍त

‘स्‍टारडस्‍ट मैगजीन’ को दिए एक पुराने इंटरव्‍यू में अमिताभ बच्‍चन ने यहां तक कहा कि उस वक्‍त आत्‍महत्‍या जैसे खयाल भी आने लगे थे। बैचेनी, चिंता, हताशा और इन सब से नहीं उबर पाने की निराशा। एकसाथ इतने तरह के भाव से एकसाथ जूझ रहे थे अमिताभ बच्‍चन। इंटरव्‍यू में अमिताभ कहते हैं, ‘मेरी रातें बैचेन करने वाली थीं। मैं अचानक जग जाता था। जया को आवाज देता और कहता- मैं क्‍या करूं?’

‘कोई और तुम्‍हारी जगह होता तो सूइसाइड कर लेता’

अमिताभ इंटरव्‍यू में आगे जो कहते हैं, वह और अध‍िक बैचेन करने वाला है। वह बताते हैं, ‘मेरे कुछ दोस्‍त मुझसे कहते थे कि यदि कोई और मेरी जगह होता तो शायद बहुत पहले ही सूइसाइड कर लेता। सच कहूं तो कई बार मेरे मन में भी ऐसे खयाल आए… मुझे नहीं लगता कि इस बारे में और अध‍िक बात करना सही होगा।’

‘जब भी सोचता हूं, मन बैचेन हो जाता है’

अमिताभ आगे कहते हैं, ‘मैंने आपको बताया न कि ऐसे बहुत सारे अशांत विचार हैं। मैं इस वक्‍त वास्तव में अपने आप में अचंभित हूं कि मुझे इसके बारे में बात करने की ताकत मिली है, लेकिन यह एक आदत की तरह है। आप समझ सकते हैं। जब आप इसके बारे में सोचना शुरू करते हैं, तो आप बैचेन हो जाते हैं। इसके बारे में बात करना शुरू करते हैं। हर बार जब मैं इसके बारे में बात करता हूं या इसके बारे में सोचता हूं, तो मेरे दिमाग में कुछ नई बात आती है। शायद यह सब जो भी अशांत मन में है एक दिन सामने आ जाएगा। शायद तब जब मैं किसी मनोरोग परीक्षण (साइकियाट्रि‍क टेस्‍ट) या ऐसे ही किसी माध्यम से गुजरूंगा।’

‘शहंशाह’ को वापस मिला उसका मुकाम

अमिताभ बच्‍चन की फिल्‍म ‘कूली’ 1983 में रिलीज हुई थी। उसी साल ‘नास्‍त‍िक’, ‘अंधा कानून’ और ‘पुकार’ जैसी फिल्‍में भी रिलीज हुईं। 1984 में अमिताभ ने कुछ फिल्‍मों में कैमियो रोल किया। जबकि 1984 में ‘शराबी’, 1985 में ‘मर्द’ ने उनके प्रति दीवानगी बढ़ा दी। 1984-1987 तक अमिताभ बच्‍चन ने राजनीति की दुनिया में कदम रखने की भी कोश‍िश की। फिर 1988 में आई ‘शहंशाह’ ने अमिताभ बच्‍चन को एक बार फिर बॉक्‍स ऑफिस का सबसे बड़ा सितारा बना दिया।



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