Sunday, August 1, 2021

दुनियाभर में हैकिंग का हाहाकार मचा रहा Pegasus स्पाईवेयर, आप कभी-भी आ सकते हैं निशाने पर, जानें विस्तार से

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हाइलाइट्स

  • पेगासस स्पाईवेयर का खतरा
  • सिर्फ एंड्रॉइड यूजर्स ही नहीं iPhone यूजर्स भी चपेट में
  • लोगों के फोन को हैक करता है स्पाईवेयर

संयम जैन, नई दिल्ली। एक बार फिर से पेगासस स्पाईवेयर चर्चा में है। आखिरी बार हमने भारत में इसके बारे में 2019 में सुना था जब पत्रकारों और कई नेता सहित कुछ WhatsApp यूजर्स को WhatsApp से मेल प्राप्त हुआ कि पेगासस ने उनके फोन को हैक किया है। हालांकि, कई लोग मानते हैं कि पेगासस स्पाईवेयर कभ-भी न्यूज से बाहर हुआ नहीं। यह दुनियाभर में अलग-अलग सरकारों द्वारा इतनी बार इस्तेमाल किया जाता है कि लगभग हर कुछ महीनों में इस बात की खबरें आ ही जाती है कि इसका उपयोग कर फोन कैसे हैक किया गया था। कई लोग इसके बारे में नहीं जानते होंगे। तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर पेगासस स्पाईवेयर क्या है।

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क्या है पेगासस स्पाईवेयर:

पेगासस इजरायली फर्म एनएसओ द्वारा विकसित एक स्पाइवेयर है। कुछ लोगों की जासूसी करने के लिए सरकारें कथित तौर पर दुनिया भर में इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल करती हैं। पेगासस का इस्तेमाल स्मार्टफोन को हैक करने और WhatsApp चैट की डिटेल्स को स्कूप करने के लिए किया जा सकता है।

क्या है यह स्पाइवेयर पेगासस:

स्पाइवेयर पेगासस को इजराइल के NSO ग्रुप द्वारा बेचा जाता है। इसका इस्तेमाल लगभग 300 भारतीयों पर निगरानी करने के लिए किया जा चुका है। सबसे पहले यह स्पाईवेयर 2016 में सामने आया था। कहा जाता है की यह वायरस ज्यादातर iOS यूजर्स को अपना निशाना बनता है जिसके चलते iOS ने सॉफ्टवेयर अपडेट देते हुए बोला की उन्होंने सारे लूप होल और सिक्योरिटी से जुड़ी दिक्कतों को ठीक कर दिया है। इसी के साथ बाद में यह भी पता चला की यह एंड्रॉयड फोन को भी अपना निशाना बना सकता है।

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आखिर क्यों है इतनी चिंता:

नॉन-प्रॉफिट फ्रांसीसी मीडिया, फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, जिसमें केंद्र में दो कैबिनेट मंत्री, तीन विपक्षी नेता, एक संवैधानिक प्राधिकरण, सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक और लगभग 40 पत्रकार शामिल हैं। इस लिस्ट में एक्टिविस्टऔर बिजनेसमैन भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा जज के नाम से लिंक्ड एक नंबर भी डाटाबेस पर था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं था कि क्या जज अभी भी WhatsApp और सेवाओं के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे थे।

कैसे फोन हैक करता है पेगासस?

फोन में पेगासस हैकिंग, हैकर्स की दुनिया में इसीलिए इतनी पसंद की जाती है और इससे इतनी ज्यादा रेटिंग दी जाती है क्योंकि फोन के यूजर को कोई अंदाजा ही नहीं होता है कि उनकी डिवाइस से कोई छेड़खानी की गई है। एक बार जब कोई हैकर किसी ऐसे फोन की पहचान कर लेता है जिसे हैक करने की जरूरत होती है तो वे अपने टारगेट यूजर को एक वेबसाइट लिंक भेजते हैं। अगर यूजर उस पर क्लिक करता है तो फोन पर पेगासस वायरस चला जाता है।

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यह WhatsApp जैसे ऐप के जरिए की जाने वाली वॉयस कॉल में एक सुरक्षा बग के जरिए भी इंस्टॉल होता है। वास्तव में, यह कॉल इतनी शक्तिशाली और गुप्त है कि केवल यूजर को एक मिस्ड कॉल देकर फोन पर पेगासस वायरस लॉन्च किया जा सकता है। एक बार, सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाने के बाद यह कॉल लॉग एंट्री को हटा देता है जिससे यूजर्स को मिस्ड कॉल के बारे में पता नहीं चलता है।

ग्लोबल लेवल पर करीब 50,000 फोन नंबरों के लीक हुए डाटाबेस में शामिल हैं जिसमें कई भारतीय पत्रकारों के नाम भी हैं। एक रिपोर्टों में कहा गया है कि फॉरेंसिक टेस्ट ने 37 फोन के टारगेट बनने की बात की पुष्टि की जिनमें से 9 iPhone और एक एंड्रॉइड भारतीय यूजर थे।

लीक हुए डाटाबेस को पेरिस स्थित मीडिया नॉन प्रॉफिट फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा एक्सेस किया गया था और जांच को द गार्जियन, द वाशिंगटन पोस्ट, ले मोंडे, द वायर के साथ सहरे किया गया था जिसे ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया। भारत उन 10 देशों में शामिल था जहां संख्या केंद्रित थी, जिसमें मेक्सिको 15000 नंबरों के साथ लिस्ट में सबसे ऊपर था। संख्या का एक बड़ा हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई देशों से भी था, जिसमें पाकिस्तान, फ्रांस और हंगरी इस लिस्ट में प्रमुख देश थे।

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यह दूसरी बार है जब पेगासस को फोन सर्विलांस से जोड़ा गया है। 2019 में, भारत में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं सहित कुछ WhatsApp यूजर्स को सूचित किया गया था कि उनके फोन से छेड़छाड़ की गई है। वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि मारे गए सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की पत्नी के फोन को पेगासस का इस्तेमाल करके टारगेट किया गया था। जबकि उनके पति का फोन उनकी मृत्यु के कुछ दिनों बाद स्पाइवेयर से संक्रमित हो गया था।

कई अरब के शाही परिवार के लोग, कम से कम 65 बिजनेस अधिकारियों, 85 ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट, 189 पत्रकारों और 600 से अधिक राजनेताओं और कैबिनेट मंत्रियों, राजनयिकों और सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों सहित सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाए जाने का शक है। द वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि लिस्ट में कई राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों के नाम भी दिखाई दिए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि NSO के ग्राहकों में 40 देशों में 60 खुफिया, सैन्य और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां भी शामिल हैं।



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