Tuesday, March 2, 2021

GIS टेक्नॉलजी क्या है? कोरोना वैक्सीन वितरण में क्या है इसकी भूमिका? जानें सबकुछ

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हाइलाइट्स:

  • GIS टेक्नॉलजी गूगल मैप्स की तरह काम करती है
  • यह टेक्नॉलजी पिछले 50 सालों से काम कर रही है
  • इसमें डेटा ऐनालिसस के साथ मैप्स तैयार होते हैं

नई दिल्ली
भारत के साथ-साथ विश्व के अधिकतर देश कोरोना महामारी का सामना कर रहे हैं। दुनियाभर में लोगों ने कोरोना से जंग लड़ी। कोरोना से लड़ने के लिए सरकार बहुत सारे कदम उठा रही है और कई ऑनलाइन टूल्स का भी इस्तेमाल कर रही है। ऐसी ही एक टेक्नॉलजी है GIS मैपिंग टेक्नॉलजी। तो जानते है GIS टेक्नॉलजी है क्या और covid-19 वैक्सीन वितरण में किस तरह मददगार होगी?

GIS टेक्नॉलजी क्या है ?
GIS यानी (ज्योग्राफिकल इनफार्मेशन सिस्टम) टेक्नॉलजी मैपिंग की एक टेक्नीक है जिसमें मैप्स तैयार किये जाते है और डेटा का ऐनालिसिस होता हैं जिससे डिसीजन मेकिंग में हेल्प मिलती है। GIS सिस्टम सभी प्रकार के डेटा को एक जगह एकत्रित करने में मदद करता है और इस डेटा को किसी भी डिसिशन मेकिंग में उपयोग करने के योग्य बनाता है।

यह टेक्नॉलजी गूगल मैप्स की तरह काम करती है। याद दिला दें कि जीआईएस मैपिंग सॉफ्टवेयर कोई नया नाम नहीं है, यह टेक्नॉलजी बीते 50 सालों से काम कर रही है। कोरोना महामारी के दौरान केसेस की अपडेट एवं हॉटस्पॉट ज़ोन की जानकारी जिन डैशबोर्डस पर देखी जा रही थी उनका आधार भी GIS टेक्नॉलजी ही थी।

GIS टेक्नॉलजी लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती है ?
इस टेक्नॉलजी के बारे में इसरी इंडिया के प्रेजिडेंट श्री अगेन्द्र कुमार ने बताया कि ‘GIS टेक्नॉलजीवैक्सीन वितरण में भारत ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस बीच इस महामारी को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन प्रोग्राम की शुरुआत कर दी गई है। इस प्रोग्राम के सफलता के लिए एक सक्षम एवं प्रभावशाली योजना की जरुरत होगी। सटीक एवं रियल-टाइम ट्रैकिंग की वजह से GIS पूरी वैक्सीन वितरण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।’

उन्होंने आगे बताया कि वैक्सीन वितरण प्रोग्राम के दौरान GIS अन्य प्रक्रियाओं में भी मददगार होगा जैसे प्रोग्राम की शुरुआत में किसी भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर वैक्सीन कोल्ड स्टोरेज स्थानों की पहचान एवं निर्धारण करना, रियल-टाइम संक्रमण दर के आधार पर विशेष स्थान या जनसंख्या को प्राथमिकता देने में स्वास्थ विभाग एवं सरकारों की मदद करना, प्रोग्राम के संचालन में सही विश्लेषण कर निर्णयकर्ताओ की मदद करना शामिल है। साथ ही कहा कि वैक्सीन वितरण में आवश्यक साधनो एवं संसाधनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग एवं प्रबंध करना, प्रोग्राम के दौरान सत्य एवं समय पर सूचनाओं का जनता के साथ, एवं प्रबंधन के साथ साझा करना जिससे जनता के सवालों का सही समय पर जवाब देकर उनकी मदद की जा सके।

श्री अग्रेंद्र कुमार ने GIS का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे जीआईएस तकनीक भारत जैसे देश के लिए वैक्सीन वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है | उन्होंने आगे कहा ‘टीकाकरण प्रोग्राम की सफलता में सही स्थान और समय सबसे महत्वपूर्ण होंगे। भारत जैसे देश में इतनी बड़ी आबादी तक वैक्सीन को नितंत्रित स्थिति में पहुंचाने के लिए सरकार और स्वास्थ विभाग को स्थिति नियंत्रण की आवश्यकता होगी और इस हेतु सरकार और स्वास्थ विभाग सप्लाई चेन, लोजिस्टिक्स और वितरण को संभालने के लिए Esri इंडिया की टेक्नॉलजीकी मदद ले सकते हैं। Esri की GIS टेक्नोलॉजी, मैपिंग और लोकेशन इंटेलिजेंस के डेमोग्राफिक विवरण को समझने और सही समय अंतराल में वैक्सीन प्रोग्राम के संचालन, निष्पादन और निगरानी की सुविधा प्रदान करने में मदद करेगी।’



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