Sunday, February 28, 2021

अपाचे को मिली दो आंखें, चुन-चुनकर दुश्मनों को ठिकाने लगाएगा ‘उड़ता टैंक’

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अमेरिकी सेना दुनिया के सबसे घातक अटैक हेलिकॉप्टर AH-64E अपाचे को दो नए हथियारों से लैस करने की तैयारी में है। अपाचे की आंख कहे जाने वाले ये दोनों हथियार न केवल इस उड़ते टैंक को रणनीतिक बढ़त दिलाएंगे, बल्कि जंग के मैदान में अपने सैनिकों की जान भी बचा सकेंगे। दरअसर, अपाचे हेलिकॉप्टर को हथियारों से लैस दो घातक ड्रोन्स के साथ जंग के मैदान में भेजने की योजना बनाई जा रही है। इसे लेकर हाल में ही एक ट्रायल भी किया गया था, जिसमें अपाचे हेलिकॉप्टर के पायलट ने अपने कंट्रोल के जरिए इन ड्रोन्स में लगी मिसाइलों को फायर किया था। इस हमले में दुश्मनों के कई टैंक तबाह हो गए, जबकि उनका हेलिकॉप्टर सुरक्षित रूप से बेस पर लौट आया।

दो यूएवी की मदद से और घातक बनेगा अपाचे

अमेरिकी सेना ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में AH-64E अपाचे को दो यूएवी के साथ यूटा में टेस्ट किया गया था। जहां इस तिकड़ी ने हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों को सफलतापूर्वक फायर कर अपने लक्ष्य को बर्बाद कर दिया था।। इस ट्रायल में अपाचे के साथ टेक्स्ट्रॉन शैडो RQ-7BV2 ब्लॉक-3 टैक्टिकल यूएवी और एक जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम MQ-1C ग्रे ईगल एक्सटेंडेड रेंज यूएवी उड़ाया गया था। ये दोनों अमेरिका के सबसे घातक यूएवी में गिने जाते हैं।

15000 फीट दूर दुश्मन का होगा खात्मा

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इस दौरान अपाचे के पायलट ने RQ-7BV2 यूएवी के सेंसर के जरिए जमीन पर मौजूद दुश्मन पर अपना लक्ष्य साधा और MQ-1C में लगी AGM-114 हेलफायर मिसाइल दागी। जिसके बाद इस मिसाइल ने 15,000 फीट की दूरी पर स्थित अपने लक्ष्य को सटीकता से बर्बाद कर दिया। तीन विमानों की इस यूनिट ने कुछ दिनों बाद दोबारा ग्लाइडेड बम के सहारे इस कारनामे को दोहराया। इसके बाद से अमेरिकी सेना इन तीनों को अब वास्तविक जंग के मैदान में टेस्ट करने की योजना पर काम करस रही है।

टोही मिशन में भी अमेरिकी सेना की बढ़ेगी ताकत

अमेरिकी सेना अपाचे हेलिकॉप्टर के साथ MQ-1C ड्रोन को काफी समय पहले से उड़ा रही है। जहां इस ड्रोन का कंट्रोल अपाचे हेलिकॉप्टर के पायलट के हाथ में होता है। लेकिन, ऐसा पहली बार हुआ है कि जब अपाचे के साथ दो ड्रोन का सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया है। 2017 में अमेरिकी सेना ने Bell OH-58D Kiowa Warrior हेलिकॉप्टर को सर्विस से हटा दिया था। उसके बाद से ही टोही और हमले के मिशनों में अपाचे और एमक्यू-1सी ग्रे इगल ड्रोन का उपयोग किया जा रहा था।

सभी हथियारों को एक नेटवर्क से जोड़ रहा अमेरिका

अमेरिकी सेना आने वाले दिनों में सैनिकों, टैंकों, तोप, यूएवी, सैटेलाइट्स, फिक्स विंग एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों को एक-दूसरे से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। जिसका लक्ष्य यह है कि अगर उड़ान के दौरान उस नेटवर्क में शामिल किसी को भी लक्ष्य दिखाई देता है और उसके पास कोई मिसाइल नहीं है तो दूसरा जहाज टारगेट को बर्बाद करने के लिए मिसाइल फायर कर सकता है। ऐसे में दुश्मन का बचना मुश्किल हो जाएगा।

युद्धक्षेत्र में गए बिना दुश्मन को खत्म करेगी अमेरिकी सेना

अमेरिकी सेना चाहती है कि उसका यूएवी दुश्मन के मिसाइलों के जद में जाकर लक्ष्य का पता लगाए, जबकि फिक्स विंग एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर जिसमें सैनिक मौजूद हों वो बाहर से निगरानी करे। ऐसे में जब यूएवी को कोई टॉरगेट दिखाई देगा तो वह खुद की मिसाइल को फायर कर सकता है। अगर, उसके पास मिसाइल नहीं है तो वह दूर तैनात अटैक हेलिकॉप्टर या जहाजों के पास लक्ष्य के बारे में जानकारी भेज देगा। जिससे लंबी दूरी के हथियारों के जरिए हमला कर दुश्मन को खत्म किया जा सकेगा। इस तकनीकी से इंसानी जानमाल को बचाया जा सकेगा।



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