Friday, April 23, 2021

अब अंतरिक्ष में 24 घंटे दुश्मनों की सैटेलाइट्स पर अमेरिका की नजर, बनाया महाशक्तिशाली स्पेस टेलिस्कोप

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रूस और चीन से अंतरिक्ष में बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिकी स्पेस फोर्स लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है। अब इस स्पेस फोर्स के हाथ ऐसी मशीन लगी है, जिसकी सहायता से हजारों किलोमीटर दूर दुश्मनों के सैटेलाइट्स की गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकता है। जी हां, अमेरिका ने एक ग्राउंड बेस्ड ताकतवर स्पेस टेलिस्कोप को विकसित किया है, जो मुख्य तौर पर रात में सक्रिय रहेगी। इस टेलिस्कोप की सहायता से 35000 किलोमीटर की दूरी तक नजर रखी जा सकेगी। दरअसल, अंतरिक्ष में दुश्मनों की सैटेलाइट कई बार अमेरिकी सैटेलाइट्स से टकरा चुकी हैं। इसके अलावा एक बड़ा खतरा यह है कि दुश्मनों की खुफिया सैटेलाइट्स अमेरिका की सैटेलाइट्स से जुड़कर उसका डेटा भी चुरा सकती हैं। पिछले साल एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया था कि एक रूसी सैटेलाइट्स ने अंतरिक्ष में अमेरिकी सैटेलाइट्स से जुड़कर कई महत्वपूर्ण डेटा को चुरा लिया था, हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। जिसके बाद अमेरिका अपने सैटेलाइट्स की सुरक्षा के लिए ग्राउंड बेस्ड टेलिस्कोप की निगरानी प्रणाली को एक्टिवेट करने जा रहा है। इतना ही नहीं, यह टेलिस्कोप अमेरिकी सैटेलाइट्स की ओर आ रहे दुश्मनों के एंटी सैटेलाइट्स हथियारों को चेतावनी भी दे सकता है।

35000 किलोमीटर तक नजर रख सकता है यह टेलिस्कोप

यूएस स्पेस स्पेस फोर्स को यह टेलिस्कोप और इससे संबंधित तकनीकी न्यूमेरिका नाम की एक कंपनी दे रही है। यह अमेरिका के कोलोराडो की एक स्टार्टअप कंपनी है, जो पहले से ही विभिन्न ग्राउंड बेस्ड टेलिस्कोपों का संचालन करती है। स्पेस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्टार्टअप ने टेलिस्कोप को बनाने के लिए अमेरिकी वायुसेना के साथ तीन मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इस कंपनी ने साल 2019 में अमेरिकी वायुसेना के पिच डे इवेंट के दौरान एक छोटे बिजनेस इनोवेशन रिसर्च अवार्ड के रूप में 750,000 डॉलर जीते थे। इस इवेंट में कंपनी ने अमेरिकी एयरफोर्स के लिए एक टेलिस्कोप बनाने और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर की थी। न्यूमेरिका में विशेष परियोजनाओं के डॉयरेक्टर टॉड ब्रॉस्ट ने पुष्टि करते हुए बताया कि छह नए डे टाइम टेलिस्कोपों में से एक को कोलोराडो में लगाया गया है, जबकि बाकियों को ऑस्ट्रेलिया और स्पेन में सेट किया गया है। दरअसल, दिन के समय सूरज की रोशनी अंतरिक्ष की वस्तुओं को दूरबीन की सहायता दे दिखाई देने में बाधक बनती है। दिन में अंतरिक्ष में ताकझांक करने के लिए परंपरागत रूप से अधिक बड़े और महंगी दूरबीनों की जरूरत पड़ती है। न्यूमेरिका सैटेलाइट्स की दिन-प्रतिदिन व्यावसायिक ट्रैकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए दूरबीन विकसित करने में अग्रणी रही है। यह कंपनी न केवल रात बल्कि दिन में भी अंतरिक्ष में चीजों को रीयल टाइम ट्रैक करती है।

अंतरिक्ष में रूस की बढ़ती ताकत से परेशान है अमेरिका

अमेरिका अंतरिक्ष में रूस की बढ़ती हुई ताकत से परेशान है। यही कारण है कि यूएर एयरफोर्स ने इस स्टार्टअप कंपनी के साथ करार किया है। कंपनी का कहना है कि इसके टेलिस्कोप पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों का निरीक्षण करने के लिए हाई-स्पीड शॉर्टवेव इन्फ्रारेड कैमरा, कस्टमाइज्ड ऑप्टिक्स और उन्नत एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं। कंपनी का दावा है, ये टेलिस्कोप न केवल तेजी से स्वायत्त बन रहे हैं, बल्कि संचालित करने के लिए भी सस्ते हैं। कंपनी के डॉयरेक्टर ब्रॉस्ट ने कहा कि सरकार की ओर से सबसे बड़ी रुचि लंबे समय तक के लिए स्टेट ऑफ ऑर्ट टेक्नोलॉजी को बनाए रखने की है। ताकि आप जान सकें कि अंतरिक्ष में आपके खिलाफ कोई साजिश तो नहीं हो रही है। हर समय अंतरिक्ष में नजर बनाए रखने की क्षमता अमेरिकी सेना के लिए बहुत बड़ी ताकत बन सकता है। यह तब और भी जरूरी हो जाता है जब पिछले ही साल रूस ने दो ऑन-ऑर्बिट एंटी-सैटेलाइट हथियारों का टेस्ट किया था। रूसी सैटेलाइट्स से संबंधित असामान्य गतिविधि के अन्य उदाहरण भी हैं, जिसमें तथाकथित इंटरसेप्टर सैटेलाइट्स भी शामिल हैं। ये सैटेलाइट्स किसी भी दूसरी सेटेलाइट्स को हाईजेक या फिर हैक कर सकते हैं। पिछले साल अमेरिकी सेना ने एक रूसी इंटरसेप्टर सैटेलाइट्स को लेकर चिंता जताई थी जो अमेरिका के केएच-11 जासूसी सैटेलाइट्स से जुड़ता हुआ दिखाई दिया था।

अंतरिक्ष में सैटलाइट से नए सैटेलाइट को पैदा कर रहा रूस

अमेरिकी सेना के हाल ही में बनाए गए स्‍पेस कमान के एक शीर्ष जनरल जॉन ‘जय’ रेमंड ने टाइम मैगजीन से कहा कि अमेरिकी खुफिया विशेषज्ञ रूस के जोड़े उपग्रह कॉसमॉस 2542 और 2543 पर कई महीने से नजर बनाए हुए हैं। वह तब से नजर बनाए हुए हैं जब यह केवल एक उपग्रह था और इसे सोयूज रॉकेट की मदद से 26 नवंबर 2019 को अंतरिक्ष में छोड़ा गया था। जनरल जय ने कहा कि सैटलाइट लॉन्‍च होने के 11 दिन बाद दो भागों में बंट गया और एक नए सैटलाइट को जन्‍म दिया। सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी सेना तभी से इस सैटलाइट से खुश नहीं थी। इस साल मध्‍य जनवरी में दोनों ही रूसी सैटलाइट अमेरिका सेना के अरबों डॉलर के सबसे ताकतवर जासूसी उपग्रह KH-11 के पास आ गए। अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि रूसी सैटलाइट अमेरिकी को धमका रहा था या उसकी निगरानी कर रहा था। इन दोनों रूसी उपग्रहों को देखकर अमेरिका सकते में आ गया। इसके बाद अमेरिका ने रूस से राजनयिक माध्‍यम से आपत्ति जताई और फिर जाकर रूसी उपग्रह अमेरिकी उपग्रह से दूर चले गए तथा पृथ्‍वी के चक्‍कर लगाने लगे।

अमेरिका के पास सबसे ज्यादा खोजी सैटेलाइट

अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा खोजी सैटेलाइट्स हैं जो दुनियाभर के देशों की जासूसी के साथ खुफिया सूचनाएं इकठ्ठा करते हैं। अगर इन्हें चीन या रूस में से किसी भी एक देश ने नष्ट कर दिया तो अमेरिका को युद्ध में अंधों की तरह लड़ाई करनी होगी, क्योंकि उसके पास खुफिया सूचनाएं आने में परेशानी होगी।

भारत के पास भी अंतरिक्ष में मार करने की क्षमता

भारत ने भी मार्च 2019 में एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। भारतीय मिसाइल ने प्रक्षेपण के तीन मिनट के भीतर ही धरती के लोअर अर्थ ऑर्बिट में मौजूद एक निष्क्रिय सैटेलाइट को नष्ट कर दिया था। दरअसल, एंटी सैटेलाइट वेपन एक हथियार होता है जो किसी भी देश के सामरिक सैन्य उद्देश्यों के लिए उपग्रहों को निष्क्रिय करने या नष्ट करने के लिए बनाया जाता है। आजतक किसी भी युद्ध में इस तरह के हथियारों का उपयोग नहीं किया गया है। लेकिन, कई देश अंतरिक्ष में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन और अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को निर्बाध गति से जारी रखने के लिए इस तरह की मिसाइल सिस्टम को जरुरी मानते हैं। अभी तक दुनिया के चार देशों अमेरिका, रूस, चीन और भारत के पास ही यह क्षमता मौजूद है।



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