Saturday, April 10, 2021

अमेरिका के ‘अदृश्य हथियार’ XQ-58A Valkyrie ने पहली बार दागी ड्रोन मिसाइल, चीन-रूस की खैर नहीं

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अमेरिकी वायुसेना का अदृश्य हथियार कहे जाने वाले XQ-58A Valkyrie ने पहली बार अपने इंटरनल वेपन बे से ड्रोन मिसाइल को फायर किया है। दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी स्टील्थ तकनीकी वाले ड्रोन ने अपने अंदर बने हथियारों के गोदाम से घातक ड्रोन मिसाइल को दागा है। बताया जा रहा है कि यह एक्सक्यू-58ए वाल्किरी की छठवीं टेस्ट फ्लाइट थी। यूएस एयरफोर्स ने इस घटना की तस्वीरें भी जारी की हैं। वाल्किरी ने जिस ड्रोन को दागा है वह ALTIUS-600 है, जो साइज में छोटा होने के बावजूद 440 किलोमीटर की दूरी तक के क्षेत्र में 4 घंटे तक खुफिया जानकारी इकट्ठा कर सकता है। पिछले साल जून में जनरल एटॉमिक्स ने अपने MQ-1C Gray Eagle से ALTIUS-600 ड्रोन को फायर किया था। सोमवार को इस ऐतिहासिक टेस्ट के बारे में द एयरफोर्स रिसर्च लेबरेटोरी (AFRL) ने खुद सूचना दी है। हालांकि, इस टेस्ट को 26 मार्च को एरिजोना के यूएस आर्मी प्रोविंग ग्राउंड टेस्ट रेंज में पूरा किया गया था। इस टेस्ट को अमेरिकी वायुसेना ने क्राटोस और एरिया-I के साथ मिलकर पूरा किया है। इसमें क्राटोस ने वाल्किरी ड्रोन का निर्माता है, जबकि एरिया-I ने ALTIUS 600 की सर्विस उपलब्ध करवाई। हालांकि, इस महीने 1 अप्रैल को Anduril Industries ने एरिया-I को खरीदने की घोषणा की है, जो इस कंपनी के नाम में बिना फेरबदल किए सेवाएं उपलब्ध करवाएगा।

दुश्मनों के रडार को चकमा देने में माहिर है वाल्किरी ड्रोन

इस टेस्ट के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद प्रोग्राम मैनेजर एलिसन तुरी ने कहा कि क्रैटोस ड्रोन ने अपने परिचालन का विस्तार करना जारी रखेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह पिछली उड़ानों की तुलना में अधिक और तेज उड़ान थी। क्रेटोस अनमैन्ड सिस्टम्स के प्रेसिडेंट स्टीव फडले ने कहा कि इस टेस्ट के जरिए ड्रोन के अंदर बने आंतरिक हथियारों के गोदाम से रिलीज सिस्टम या फंक्शन के अलावा एयरोडायनामिक परफॉर्मेंस को भी टेस्ट किया गया है। इससे पता चला है कि एक्सक्यू-58ए वाल्किरी ड्रोन मिशन के दौरान न केवल प्रभावी ढंग से काम करेगा बल्कि इसका ऑपरेटिंग कॉस्ट भी बहुत कम आएगा। इस टेस्ट में शामिल हुआ एक्सक्यू-58ए वाल्किरी ड्रोन अपने सीरीज की तीसरी यूनिट है। इसका सीरियल नंबर 15-8003 था, जबकि इसके पहले प्रोडक्शन का सीरियल नंबर 15-8001 था, जिसने मार्च 2019 में अपनी पहली उड़ान भरी थी। 15-8001 को AFRL के लो-कॉस्ट अट्रैक्टिव एयरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी (LCAAT) प्रोग्राम के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया गया है। पिछले साल दिसंबर 2020 में अमेरिकी एयरफोर्स ने घोषणा की कि वह ड्रोन टेक्नोलॉजी को लेकर क्रेटोस, बोइंग और जनरल एटॉमिक्स के साथ काम कर रहा है।

शक्तिशाली और स्टील्थ है क्रेटोस का यह ड्रोन

जिन तीनों फर्म को अमेरिकी वायुसेना ने ड्रोन बनाने का ठेका दिया है, उन्हें इस क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। क्रेटोस ने पहले ही XQ-58 Valkyrie ड्रोन को इस प्रोग्राम के शुरूआती चरण के लिए बनाया था। यह स्टील्थ ड्रोन देखने में अमेरिका के एफ-35 और एफ-22 की तरह है। माना जा रहा है कि भविष्य के युद्धों में अमेरिका इसका प्रयोग भी कर सकता है। यह एक लो कॉस्ट ड्रोन है, जिससे अमेरिकी वायुसेना की फंड की समस्या का भी समाधान हो सकता है। यह ड्रोन अपने इंटरनल बे में मिसाइलों को लेकर उड़ान भर सकता है। स्टील्थ तकनीकी से लैस होने के कारण दुश्मनों के रडार इस ड्रोन को पकड़ नहीं सकते हैं। आकार में भी छोटा होने के कारण इस ड्रोन का रडार क्रास सिग्नेचर काफी कम है। दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से बचने के लिए इस ड्रोन में कई तरह के जैमर लगाए गए हैं। अमेरिकी वायुसेना इस ड्रोन की उपयोगिता को देखकर इसके सैकड़ों यूनिट्स को खरीदने पर भी विचार कर रही है।

यूएस एयरफोर्स ने तीन फर्म को सौंपा प्रोटोटाइप बनाने का ठेका

यूएस एयरफोर्स लाइफ मैनेजमेंट सेंटर (AFLMC) 2021 की गर्मियों में एक और परीक्षण के लिए प्रोटोटाइप बनाने के लिए तीन फर्मों को ठेका सौंपा है। सोमवार को अमेरिकी वायु सेना ने घोषणा की कि उसने मई 2021 तक मिशनाइज्ड प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए तीन प्राइवेट फर्मों के साथ साझेदारी की है। इसके तहत अमेरिकी डिफेंस कंपनी बोइंग को 25.7 मिलियन डॉलर, जनरल एटॉमिक्स को 14.3 मिलियन डॉलर और क्रैटोस अनमैन्ड एरियल सिस्टम को 37.8 मिलियन डॉलर की राशि दी गई है। इन तीनों कंपनियों के ड्रोन में ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी होने के कारण इंसानों के ऑपरेट करने की जरूरत नहीं होगी। ये ड्रोन अमेरिका के स्काईबर्ग वेनगार्ड प्रोग्राम का हिस्सा होंगे। इस प्रोग्राम के तहत ये ड्रोन युद्धकाल में इंसानी पायलटों को हवा में मजबूती प्रदान करेंगे। इनकी सहायता से अमेरिका अपने दुश्मनों पर भारी पड़ेगा। ये हवा में दुश्मन के किसी भी खतरे से निपटने में सक्षम होंगे। इससे अमेरिकी पायलटों के कीमती जान की भी रक्षा होगी।

क्रेटोस के इस ड्रोन का इनसे है कड़ा मुकाबला

बोइंग ने भी ऑस्ट्रेलियाई सेना के लिए इस साल के शुरू में अपने पहले मॉडल को रोल आउट किया था। स्टील्थ तकनीकी से लैस इस ड्रोन का नाम बोइंग एयरपावर ट्रिमिंग सिस्टम या बोइंग लायल विंगमैन प्रोजक्ट रखा गया है। ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस यह ड्रोन खुद के दम पर किसी भी मिशन को अंजाम दे सकता है। जनरल एटॉमिक्स ने भी हाल ही में अपने प्रयोगात्मक एवेंजर यूएवी की घोषणा की थी। इस ड्रोन को एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की जगह बनाया गया है। बता दें कि एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की ताकत को दुनिया ने अफगानिस्तान, सीरिया, ईराक और लीबिया के युद्ध में देखा है। जहां इसने अपने दुश्मनों की कमर तोड़कर रख दी थी। भारत भी इस ड्रोन को खरीदने की तैयारी में है। एक नए सॉफ्टवेयर अपग्रेड के साथ जीई का एवेंजर यूएवी एयर-टू-एयर कॉम्बैट ड्रिल्स में अपनी ताकत दिखा चुका है।



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