Sunday, February 28, 2021

कभी ज्यादा आबादी झेल रहा था यह चीन, अब जन्म दर घटने से टेंशन में आया ड्रैगन

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हाइलाइट्स:

  • एक समय था जब चीन में दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी होने से सरकारें चिंतित थीं
  • वहीं अब जन्म दर घटने से चीन परेशान है और इस देश में लोग बच्चे पैदा करने से कतरा रहे
  • बीते साल चीन में नवजात शिशुओं की संख्या में 15 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है

पेइचिंग
एक समय था जब चीन में दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी होने से सरकारें चिंतित थीं, वहीं अब जन्म दर घटने से चीन परेशान है। इस देश में लोग अब बच्चे पैदा करने से कतरा रहे हैं। बीते साल चीन में नवजात शिशुओं की संख्या में 15 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। चीन का हाल पहले यह था कि जिस तरह भारत में हम दो, हमारे दो, बच्चों वाले संदेश दिए जाते थे, वहीं चीन में एक बच्चा पैदा करने संबंधी नियम लागू किए थे। मगर चीन ने 2016 में एक बच्चे वाली नीति छोड़ दी, फिर भी वहां जन्मदर लगातार घट रही है।

इस बारे में चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय का कहना है कि देश में 2020 में एक करोड़ बच्चे पैदा हुए। यह संख्या एक साल पहले के मुकाबले 15 प्रतिशत कम है। इसकी वजह कोरोना महामारी और उससे पैदा होने वाली स्थिति को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग आर्थिक अस्थिरता के माहौल में परिवार बढ़ाने से पहले बहुत सोच विचार कर रहे हैं। डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय का कहना है कि 2019 में चीन में 1.1 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ था। पिछले साल इनकी संख्या काफी कम रही।

वर्ष 2020 में जो बच्चे पैदा हुए उनमें से 52.7 लड़के और 47.3 प्रतिशत लड़कियां हैं। सरकार के साथ साथ अब लोग भी देश की घटती जन्मदर को लेकर चिंतित हैं। चीनी सोशल मीडिया पर एक हैशटैग चल रहा है जिसका मतलब है ‘चीन को कम जन्मदर के जाल से कैसे मुक्त कराएं।’ लगभग 12 करोड़ लोगों ने इससे जुड़ी पोस्ट्स पर रिएक्ट किया है। एक यूजर ने घटती जन्मदर को ‘चीनी राष्ट्र के सामने मौजूद सबसे बड़ा संकट बताया।’

सोच में बदलाव और बढ़ती गिरावट
कुछ लोग घटती जन्मदर की वजह रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च को मानते हैं जबकि अन्य लोगों के मुताबिक लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। हाल के सालों में चीनी जोड़े स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और रहन सहन पर बढ़ते खर्च को देखते हुए बच्चे पैदा करने का फैसला बहुत सोच समझकर ले रहे हैं। चीन ने 1970 के दशक में जनसंख्या को नाटकीय रूप से कम करने के लिए एक बच्चे की नीति लागू की थी। लेकिन देश की तेजी से बूढ़ी होती आबादी को देखते हुए 2016 में इस नीति को छोड़ दिया है। इसके बावजूद जन्मदर में उम्मीद के मुताबिक इजाफा देखने को नहीं मिल रहा है। जन्मदर में आ रही कमी आगे चल कर चीन के श्रम बाजार के लिए समस्याएं पैदा कर सकती है। इससे अर्थव्यवस्था पर भी असर होगा। चीन का राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो इसी महीने जनसंख्या को लेकर 2020 के आंकड़े पेश करेगा।



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