Wednesday, June 16, 2021

क्या पृथ्‍वी पर इंसान सचमुच 150 बरस जी सकता है? जानें विशेषज्ञ की राय

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ब्राइटन (ब्रिटेन)
हम में से ज्यादातर लोग 80 वर्ष के आसपास जीने की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन कुछ लोग उम्मीद से आगे जाकर सौ बरस से अधिक भी जीते हैं। ओकिनावा, जापान और सार्डिनिया, इटली जैसे स्थानों में, ऐसे कई लोग हैं जो अपनी उम्र का सैकड़ा पार कर चुके हैं। इतिहास के सबसे उम्रदराज व्यक्ति के तौर पर फ्रांस की महिला जीन कैलमेंट का नाम लिया जाता है, जो 122 वर्ष की थीं। वह 1875 में पैदा हुई थीं और उस समय औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 43 वर्ष थी।

ऐसे में एक सवाल जो लोग सदियों से पूछते आ रहे हैं कि दरअसल मनुष्य कितने समय तक जीवित रह सकता है? एक ओर जहां औसत जीवन प्रत्याशा (एक व्यक्ति के कितने वर्ष तक जीवित रहने की उम्मीद है) की गणना करना अपेक्षाकृत आसान है, वहीं अधिकतम जीवनकाल (एक मानव संभवतः कितनी लंबी उम्र तक जी सकता है) का अनुमान लगाना बहुत कठिन है। पिछले अध्ययनों ने इस सीमा को 140 वर्ष की आयु के करीब रखा है। लेकिन हाल ही के एक अध्ययन में कहा गया है कि मानव जीवन काल की सीमा 150 वर्ष के करीब है।

जीवनकाल की गणना
जीवन प्रत्याशा और जीवनकाल की गणना के लिए सबसे पुराना और अभी भी सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका गोम्पर्ट्ज़ समीकरण है। इस संबंध में पहला आकलन 19वीं शताब्दी में किया गया था कि बीमारी से मानव मृत्यु दर समय के साथ तेजी से बढ़ती है। निश्चित रूप से, इसका मतलब है कि कैंसर, हृदय रोग और अन्य संक्रमणों से आपकी मृत्यु की संभावना हर आठ से नौ साल में लगभग दोगुनी हो जाती है।

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे सूत्र में बदलाव किया जा सकता है कि कैसे विभिन्न कारक किसी आबादी के जीवन काल को प्रभावित करते हैं। गोम्पर्ट्ज़ गणना का उपयोग स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की गणना के लिए भी किया जाता है – यही कारण है कि ये कंपनियां यह जानने की इच्छुक रहती हैं कि क्या आप धूम्रपान करते हैं, क्या आप विवाहित हैं, या ऐसा ही कुछ और, जिससे वह यह अनुमान लगा सकें कि आप कितने दिन और जीएंगे।

हम कितने समय तक जीवित रहेंगे, यह पता लगाने का एक तरीका यह है कि उम्र के साथ हमारे अंगों की कार्यक्षमता कैसे और कितनी घटती है। अंगों की घटती कार्यक्षमता का मिलान हम अपनी उम्र से करते हैं। उदाहरण के लिए, आंख का कार्य और व्यायाम करते समय हम कितनी ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं, उम्र बढ़ने के साथ गिरावट का एक सामान्य रूख दिखाते हैं, अधिकांश गणनाओं से संकेत मिलता है कि औसत व्यक्ति के अंग लगभग 120 वर्ष का होने तक काम करेंगे। लेकिन ये अध्ययन लोगों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनमें बढ़ती भिन्नता को भी उजागर करते हैं।

उदाहरण के लिए, कुछ लोगों की किडनी की कार्यक्षमता उम्र के साथ तेजी से कम होती जाती है जबकि अन्य में ऐसा नहीं होता। अब सिंगापुर, रूस और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने अधिकतम मानव जीवन काल का अनुमान लगाने के लिए एक अलग दृष्टिकोण अपनाया है। एक कंप्यूटर मॉडल का उपयोग करते हुए, वे अनुमान लगाते हैं कि मानव जीवन की सीमा लगभग 150 वर्ष है।

150 वर्ष तक जीवन जीना

स्वाभाविक रूप से, आपकी मृत्यु की संभावना और बीमारी से आप कितनी तेजी से और पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, के बीच एक संबंध होना चाहिए। यह आपका सामान्य शारीरिक संतुलन बनाए रखने का एक मापदंड है। दरअसल उम्र बढ़ने के साथ इस संतुलन को बनाए रखने की क्षमता कम होती जाती है। आमतौर पर, व्यक्ति जितना कम उम्र होता है, बीमारी से उतनी ही तेजी से ठीक होता है।

लेकिन इस प्रकार के अनुमान यह मानते हैं कि मौजूदा बड़ी उम्र की आबादी को नये प्रयोगों का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। जैसे कि सामान्य बीमारियों के लिए उन्हें कोई नया चिकित्सा उपचार नहीं मिलेगा। हालांकि इस दिशा में प्रगति तो होती है, लेकिन उसका लाभ कुछ लोगों को मिल पाता है, दूसरों को नहीं। उदाहरण के लिए, आज जन्म लेने वाला बच्चा अपनी जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने के लिए लगभग 85 वर्षों की चिकित्सा प्रगति पर भरोसा कर सकता है, जबकि आज जो व्यक्ति 85 वर्ष का है उसे अपनी जीवन प्रत्याशा के लिए वर्तमान चिकित्सा तकनीकों तक ही सीमित रहना होगा।

स्वस्थ जीवन काल को 15-20% तक बढ़ाना कठिन

अध्ययन के अनुसार अधिकतम जीवनकाल के लिए आपको तीन महत्वपूर्ण चीजों की आवश्यकता है। पहला है अच्छा जीन, जो सौ वर्ष से अधिक जीने की अच्छी उम्मीद जगाता है। दूसरा, एक उत्कृष्ट आहार और व्यायाम योजना, जो जीवन प्रत्याशा में 15 साल तक जोड़ सकती है। और अंत में, तीसरा है समय के साथ उपचार और दवाओं के ज्ञान में उत्तरोत्तर वृद्धि जो स्वस्थ जीवन काल को बढ़ा सकती है। वर्तमान में, सामान्य स्तनधारियों के स्वस्थ जीवन काल को 15-20% तक बढ़ाना अत्यंत कठिन है, क्योंकि उम्र बढ़ने के जीव विज्ञान के बारे में हमारी समझ अधूरी है। लेकिन प्रगति की वर्तमान गति को देखते हुए, हम विश्वासपूर्वक जीवन प्रत्याशा में वृद्धि की उम्मीद कर सकते हैं।
लेखक- रिचर्ड फराघेर, ब्राइटन विश्वविद्यालय



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