Sunday, February 28, 2021

चीन से तनाव, अमेरिका ने साउथ चाइना सी में तैनात किया अपना सबसे घातक हथियार

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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की विदाई के बाद भी चीन को लेकर नीति में कोई फर्क नहीं पड़ा है। नए राष्ट्रपति बने जो बाइडन ने भी सत्ता संभालने के तुरंत बाद चीन को उसके विस्तारवादी नीतियों को लेकर जमकर खरीखोटी सुनाई है। चीन के साथ विवाद का केंद्र बने दक्षिणी चीन सागर में भी अमेरिकी फौज की आक्रामक गतिविधियां पहले की तरह ही जारी है। हाल में ही दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी शक्ति के प्रतीक दो एयरक्राफ्ट कैरियरों ने युद्धाभ्यास किया था। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने अपनी सबसे बड़ी परमाणु पनडुब्बी यूएसएस ओहियो को चीन के नजदीक तैनात किया है। इस पनडुब्बी पर लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें तैनात हैं, जो दुनिया के किसी भी कोने में हमला कर सकती हैं। परमाणु शक्ति से चलने के कारण यूएसएस ओहियो लंबे समय तक पानी के नीचे छिपा हुआ रह सकता है। ऐसे में इस महाशक्तिशाली पनडुब्बी के साउथ चाइना सी में आने से चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं।

चीन को सीधी चुनौती दे रहा अमेरिका

विशेषज्ञों ने कहा है कि यह अमेरिका की अबतक का सबसे घातक हथियार है जिसे साउथ चाइना सी में तैनात किया गया है। राष्ट्रपति जो बाइडन इन घातक हथियारों को चीन के खिलाफ तैनात कर ताइवान, भारत और जापान जैसे अपने सहयोगियों को दोस्त देशों के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धताओं को प्रदर्शित कर रहे हैं। चीन को छोड़कर दुनिया के सभी देश न केवल साउथ चाइना सी बल्कि पूरे इंडो पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र नौ परिवहन के हिमायती हैं। वहीं, चीन साउथ चाइना सी के 80 फीसदी हिस्से पर अपना दावा कर रहा है। दो सप्ताह पहले अमेरिका ने ताइवान की खाड़ी में एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर को तैनात किया था। यह चीन को सीधा संदेश था कि वह अपने दोस्त देश ताइवान को हर हाल में समर्थन देना जारी रखेगा। यही कारण है कि चारों तरफ से घिरा चीन अब बातचीत का राग अलापने पर मजबूर हुआ है। हालांकि, ड्रैगन की पूरी कोशिश सेना के दम पर अपनी मनमानियों को पड़ोसी देशों के ऊपर थोपने की ही रहती है।

कितनी खतरनाक है यूएसएस ओहियो पनडुब्बी

परमाणु शक्ति से चलने वाली गाइडेड मिसाइल सबमरीन यूएसएस ओहियो आकार और प्रहार दोनों के मामले में दुनिया के शीर्ष हथियारों में से एक है। लंदन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ सिद्धार्थ कौशल के अनुसार, अमेरिका की ओहियो क्लास की पनडुब्बी दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक घुसपैठ कर सैनिकों और मिसाइलों से हमला कर सकती है। अमेरिका के ओहियो क्लास की पनडुब्बियों में यूएसएस ओहियो के अलावा यूएसएस मिशिगन, यूएसएस फ्लोरिडा और यूएसएस जॉर्जिया शामिल हैं। ये सभी पनडुब्बियां घातक एंटी शिप मिसाइलों से लैस हैं और इनमें दुश्मन की पनडुब्बियों से बचाव करने की भी सबसे आधुनिक तकनीकी लगी हुई है। इस पनडुब्बी में पहले परमाणु मिसाइलों को भी लगाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें हटाकर दूसरी इंटरकॉन्टिनेंटर बैलिस्टिक मिसाइलों को लगाया गया है। ओहियो को ताकत देने के लिए एक परमाणु रिएक्टर को लगाया गया है, जो इसके दो टर्बाइनों के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।

लंबे समय तक समुद्र में छिपी रह सकती है यूएसएस ओहियो

यूएसएस ओहियो को अगर पनडुब्बी में तैनात नौसैनिकों के लिए खाने की वस्तुएं न लेनी हो तो वह कई महीनों तक पानी के नीचे गायब रह सकता है। इसमें खुद के ऑक्सीजन जेनरेटर्स लगे होते हैं, जो पनडुब्बी में तैनात नौसैनिकों के लिए ऑक्सीजन पैदा करते हैं। इसके अलावा परमाणु रिएक्टर लगे होने के कारण इनके पास ऊर्जा का अखंड भंडार होता है। जबकि परंपरागत पनडुब्बियों में डीजल इलेक्ट्रिक इंजन होता है। उन्हें इसके लिए डीजल लेने और मरम्मत के काम के लिए बार बार ऊपर सतह पर आना होता है। पानी के नीचे अगर कोई पनडुब्बी छिपी हुई तो उसका पता लगाना बहुत ही कठिन काम होता है। लेकिन, अगर वह पनडुब्बी किसी काम से एक बार भी सतह पर दिखाई दे दे तो उसको डिटेक्ट करना और पीछा करना दुश्मन के लिए आसान हो जाता है।

154 टॉमहॉक मिसाइलों से लैस है यूएसएस ओहियो

154-

आकार में बड़ी होने के कारण यूएसएस ओहियो में 154 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात होती हैं। यह क्षमता अमेरिका के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर में तैनात मिसाइलों की दोगुनी है। हर एक टॉमहॉक मिसाइल अपने साथ 1000 किलोग्राम तक के हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड को लेकर जाने में सक्षम है। अमेरिकी सेना में 1983 से तैनात यह मिसाइल सीरिया, लीबिया, ईराक और अफगानिस्तान में अपनी ताकत दिखा चुकी है। टॉमहॉक ब्लॉक-2 मिसाइल तो 2500 किमी तक मार कर सकती है। यह मिसाइल बिना बूस्टर के 5.5 मीटर और बूस्टर के साथ 6.5 मीटर तक लंबी होती है। फिलहाल यह मिसाइल अमेरिका और ब्रिटेन की रायल नेवी में तैनात है। ताइवान ने भी अमेरिका से इस मिसाइल की खरीद के लिए समझौता किया है।

मिसाइलों का महासागर हैं ओहियो क्लास की पनडुब्बियां

हर ओहियो क्लास की पनडुब्बी में 154 टॉमहॉक के अलावा एंटी शिप मिसाइलें भी तैनात होती हैं। अमेरिकी नौसेना में पूर्व कैप्टन और वर्तमान में रक्षा विशेषज्ञ कार्ल शूस्टर ने कहा कि ओहियो क्लास की पनडुब्बी बहुत ही कम समय में अपने सभी मिसाइलों को फायरस कर सकती है। यह मिसाइलें किसी बड़े भूभाग को पलक झपकते बर्बाद करने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें समुद्र में अमेरिकी नौसेना को बढ़त प्रदान करती हैं, क्योंकि कोई भी देश एक साथ 154 मिसाइलों की अनदेखी नहीं कर सकता है। ओहियो क्लास की पनडुब्बियों की मारक क्षमता को दुनिया ने 2011 में देखा था, जब यूएसएस फ्लोरिडा ने ऑपरेशन ओडिसी डॉन के दौरान लीबिया में लक्ष्य के खिलाफ लगभग 100 टॉमहॉक मिसाइलों को लॉन्च किया था। यह अमेरिका के इतिहास में पहला मौका था जब किसी परमाणु शक्ति संचालित पनडुब्बी के जरिए किसी टॉरगेट पर निशाना साधा गया था।



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