Friday, March 5, 2021

जब अमेरिका पर हमला करने वाले थे परमाणु बमों से लैस रूस के 108 लड़ाकू विमान, जानें पूरी कहानी

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26 सितंबर 1983, सोवियत संघ के परमाणु चेतावनी केंद्र पर लगे कंप्यूटर सिस्टम में अचानक अलर्ट आया कि अमेरिका ने कुछ मिसाइलें उनके देश की तरफ फायर की हैं। उस समय ड्यूटी पर सैन्य अफसर स्तानिस्लाव पेत्रोव तैनात थे। जैसे उन्होंने यह मैसेज देखा मानों उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनको आदेश था कि अगर ऐसा कोई अलर्ट आता है तो इसकी सूचना सबसे पहले कमांड चीफ को देनी है। लेकिन पेत्रोव का लिए गए एक फैसले ने पूरी दुनिया को परमाणु युद्ध की विभीषिका से बचा लिया। उन्होंने इस सूचना को गलत मानते हुए सैन्य मुख्यालय में ड्यूटी अफसर को फोन कर सिस्टम में तकनीकी खराबी की शिकायत की। वास्तव में था भी ऐसा ही। अमेरिका ने उस दिन कोई भी मिसाइल लॉन्च नहीं किया था। अब इस घटना के 27 साल बाद एक दस्तावेज में खुलासा हुआ है कि उसी साल रूस ने अपने 108 लड़ाकू विमानों को परमाणु बमों से लैस कर अमेरिका के ऊपर हमले की तैयारी कर रखी थी।

रूस ने 108 फाइटर जेट में लगा रखे थे परमाणु बम

अमेरिकी विदेश विभाग के नए जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि 1983 में अमेरिका के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन नाटो सोवियत संघ के खिलाफ वास्तविक युद्ध का अभ्यास कर रहा था। ‘एबल आर्चर’ नाम के इस युद्धाभ्यास में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत उस समय के कई ताकतवर देश शामिल थे। लिहाजा, सोवियत संघ को भी जवाबी हमले के लिए तैयार रहना था। इतने अलग-अलग फ्रंटो से दुश्मनों के हमले को रोकने के लिए आज के रूस ने उस समय अपने 108 लड़ाकू विमानों को परमाणु बमों से लैस कर जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार कर रखा था। पूर्वी यूरोप में तैनात ये जहाज रूस के दुश्मन देशों के ऊपर पलक झपकते परमाणु बमों से हमला करने के लिए तैयार थे।

लंबी लड़ाई के बाद सार्वजनिक हुआ सीक्रेट दस्तावेज

अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव ने बताया कि इन दस्तावेजों को हासिल करने के लिए उसे कई सालों तक लड़ाई लड़नी पड़ी थी। इसमें लेफ्टिनेंट जनरल लियोनार्ड एच पेरोटोट्स की 1989 की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट भी शामिल है, जो ‘एबल आर्चर’ युद्धाभ्यास के दौरान यूरोप में यूएस एयर फोर्सेज के खुफिया प्रमुख थे। यह दस्तावेज इतना सीक्रेट था कि अमेरिका की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने लंबे समय से दावा किया था कि लेफ्टिनेंट जनरल पेरोटोट्स का मेमो खो गया था। लेकिन, विदेश विभाग के इतिहासकारों ने इस मेमो को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के रिकॉर्ड रूम से इसे खोज निकाला। थक हारकर इस फाइल को नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव को सौंपना पड़ा।

रूस के हमले के खिलाफ अमेरिका भी था तैयार

लेफ्टिनेंट जनरल पेरोटोट्स के मेमो से पता चलता है कि रूस की इन तैयारियों के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो ने भी कमर कस ली थी। दोनों ही पक्ष एक दूसरे के खिलाफ परमाणु हमला करने की पूरी तैयारी में थे। अमेरिकी नेतृत्व और सोवियत संघ के जहाज 24सों घंटे एक दूसरे के ऊपर हमला करने के लिए तैयार खड़े थे। अमेरिका ने उस समय रूस को चिढ़ाने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी थी। अमेरिकी बॉम्बर उन दिनों हमले का अभ्यास कर रहे थे। उनकी पनडुब्बियां परमाणु हथियारों को लिए सोवियत संघ के जलक्षेत्र के आसपास गश्त लगाती थीं। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था।

मॉस्को पर परमाणु मिसाइल दागने वाला था अमेरिका

अमेरिका ने यूरोप सहित रूस के सभी नौसैनिक अड्डों पर एक साथ हमला करने के लिए पर्सिहिंग- 2 बैलिस्टिक मिसाइल को तैनात कर रखा था। यह मिसाइल 1770 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित अपने टॉरगेट को भेदने में सक्षम थी। 80 किलोटन के परमाणु वॉरहेड को लेकर जाने में सक्षम इस मिसाइल की स्पीड 8 मैक से ज्यादा थी। इस कारण रूस के पास उस समय ऐसा कोई डिफेंस सिस्टम नहीं था जो इसे रोक सके। बड़ी बात यह थी कि रूस अपनी राजधानी मॉस्को पर इस मिसाइल के हमले को लेकर डरा हुआ था।



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