Sunday, June 13, 2021

ताजिकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति के स्‍वागत में इमरान खान ने दौड़ाए फाइटर जेट, भारत के एकमात्र सैन्‍य अड्डे पर नजर!

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इस्‍लामाबाद
भारत को चौतरफा घेरने में जुटे पाकिस्‍तान ने अब मध्‍य एशियाई देश ताजिकिस्‍तान पर डोरे डालना शुरू कर दिया है। पाकिस्‍तान की आधिकारिक यात्रा पर आए ताजिकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति इमोमाली रहमान को खुश करने के लिए इमरान खान ने उनके स्‍वागत में अपने जेएफ-17 लड़ाकू विमान भेज दिए। यह वही ताजिकिस्‍तान है जहां पर भारत का एकमात्र विदेशी सैन्‍य अड्डा स्थित है।

पाकिस्‍तानी JF-17 लड़ाकू विमानों ने ताजिकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति के विमान को पाकिस्‍तानी हवाई क्षेत्र में घुसने पर उसे रस्‍म के मुताबिक अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया। पाकिस्‍तान इस तरह का स्‍वागत केवल उन्‍हीं देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों का करता है जिनके साथ पाकिस्‍तान के या तो करीबी संबंध हैं या फिर वह बनाना चाहता है। ताजिकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति की दो दिवसीय यात्रा के दौरान पाकिस्तान ने उनके साथ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसके तहत वह इस मध्य एशियाई देश को स्वदेश में निर्मित हथियार बेचेगा।

पाकिस्‍तान से हथियार खरीदेगा ताजिकिस्‍तान
इससे पहले, इस्लामाबाद पहुंचे रहमान की प्रधानमंत्री आवास पर अगवानी की गई, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के बाद कहा, ‘हमारे रक्षा संबंधों में सुधार के लिये यह बेहद महत्वपूर्ण है।’ खान ने कहा कि उन्होंने ‘पाकिस्तान द्वारा निर्मित हथियारों की ताजिकिस्तान की जरूरतों को पूरा करने पर चर्चा की और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किये।’ पाक पीएम ने कहा कि पाकिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच बेहतर द्विपक्षीय रिश्तों के लिये अफगानिस्तान में शांति होना आवश्यक है।

ताजिकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति का यह दौरा और हथियारों का समझौता भारत के लिए बेहद अहम है। दरअसल, ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ 1,400 किलोमीटर लंबी सीमा है और भारत के लिए यह काफी भू-रणनीतिक महत्व रखता है। भारत आतंकवाद विरोधी सहयोग के तहत इसे सैन्य सहायता मुहैया कराता रहा है। भारत ने दुशांबे के पास अयानी एयरबेस को भी विकसित किया है। यह एयरबेस चीन और पाकिस्‍तान पर नजर रखने के लिए बेहद अहम है।

वा‍जपेई की पहल पर भारत-ताजिकिस्‍तान में हुई दोस्‍ती
भारत के ताजिकिस्‍तान के साथ दोस्‍ती उस समय तेज हुई जब वर्ष 2001 में अमेरिका पर आतंकी हमला हुआ। इसके जवाब में अमेरिका ने अफगानिस्‍तान में अपनी सेना उतार दी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री थे और उन्‍होंने ताजिकिस्‍तान के साथ दोस्‍ती को मजबूत करने का फैसला किया। इसके बाद वाजपेयी सरकार में ही वर्तमान राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ताजिकिस्‍तान में भारतीय सेना की उपस्थिति की शुरुआत कराई।

यह वही समय था जब अमेरिका और उसके सहयोगी भी एक हवाई ठिकाने की तलाश में थे जो पाकिस्‍तान से हटकर अफगानिस्‍तान जाता हो। उस समय भारत ताजिकिस्‍तान के फरखोर में अफगानिस्‍तान की सीमा के पास एक अस्‍पताल चला रहा था। इसी अस्‍पताल में अफगानिस्‍तान के ताजिक नेता अहमद शाह मसूद का इलाज किया गया था। वह तालिबानी हमले में बुरी तरह से घायल हो गए थे। भारतीय सेना के डॉक्‍टर उन्‍हें बचा नहीं सके।

भारत ने आयनी एयरबेस को बनाने का फैसला किया
उसी समय भारत अयानी को अपने एक सैन्‍य अड्डे के रूप में बदलना चाहता था। इसके बाद कारगिल युद्ध हुआ और फिर भारत ने आयनी एयरबेस को बनाने का फैसला किया। कारगिल युद्ध में यह निकलकर सामने आया कि हमें खुफिया निगरानी बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए रॉ के एविएशन रिसर्च सेंटर को मजबूत करना होगा। इसी वजह से भारत ने वर्ष 2018 में इस अड्डे को फिर से विकसित करने की इच्‍छा जताई थी लेकिन अभी आगे क्‍या हुआ इस बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं है। हालांकि 150 की संख्‍या में भारतीय सैन्‍य अधिकारी वहां अभी भी मौजूद हैं।

आयनी एयर बेस पर भारत, ताजिकिस्तान के बीच सैन्‍य संबंध पिछले 13 साल से चल रहा है। भारत ने 2002 से 2010 तक इस एयर बेस के रेनोवैशन और इसे आधुनिक बनाने के लिए करीब 7 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। भारत ने यहां सिर्फ रक्षा उपकरण ही नहीं भेजे, बल्कि रनवे को 3,200 मीटर तक बढ़ाया। पाकिस्‍तान ताजिकिस्‍तान या अफगानिस्‍तान में भारतीय सेना की तैनाती से टेंशन में आ जाता है। उसे डर है कि भारत पाकिस्‍तान पर हमले के लिए दूसरा मोर्चा खोल सकता है। माना जा रहा है कि इसी वजह से अब वह ताजिकिस्‍तान पर डोरे डाल रहा है।



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