Tuesday, December 1, 2020

पाकिस्‍तानी तानाशाह परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाने वाले जज की कोरोना से मौत

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इस्‍लामाबाद
पाकिस्‍तान के पूर्व सैन्‍य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ को राजद्रोह के आरोप में फांसी की सजा सुनाने वाले पेशावर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस वकार सेठ की कोरोना वायरस से मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस्‍लामाबाद के एक निजी अस्‍पताल में जस्टिस सेठ ने अंतिम सांस ली। जस्टिस सेठ 59 साल के थे। उनके परिवार में पत्‍नी और एक बेटी है।

जस्टिस सेठ पाकिस्‍तान के खैबर पख्‍तुनख्‍वा प्रांत के दिखान जिले के रहने वाले थे। जस्टिस सेठ 22 अक्‍टूबर को कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद उन्‍हें पेशावर के अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्‍हें कुलसुम इंटरनैशनल हॉस्पिटल इस्‍लामाबाद में भर्ती कराया गया। यहां पर भी डॉक्‍टर उनकी जान नहीं बचा पाए और जस्टिस सेठ की मौत हो गई।

जून 2018 में सेठ पेशावर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे। दिसंबर 2019 में जस्टिस सेठ ने परवेज मुशर्रफ को 3 नवंबर 2007 को आपातकाल लगाने के लिए मौत की सजा सुनाई थी। पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेठ द्वारा लिखे गए 167 पन्ने के फैसले में कहा गया था कि यदि फांसी दिए जाने से पहले मुशर्रफ की मौत हो जाती है तो उनके शव को इस्लामाबाद के सेंट्रल स्क्वायर पर खींचकर लाया जाए और तीन दिन तक लटकाया जाए।

‘मुशर्रफ की लाश को इस्लामाबाद के डी चौक तक खींचकर लाया जाए’
फैसले के अनुसार, ‘हम कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश देते हैं कि भगोड़े/दोषी को गिरफ्तार करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जाए और सुनिश्चित करें कि कानून के हिसाब से सजा दी जाए। अगर वह मृत मिलते हैं तो उनकी लाश को इस्लामाबाद के डी चौक तक खींचकर लाया जाए तथा तीन दिन तक लटकाया जाए।’ विस्तृत फैसले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी कानूनी टीम से परामर्श किया और उनके शीर्ष सहायकों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठक के फैसले की घोषणा की गई।

कानून मंत्री फरोग नसीम ने कहा कि फैसला दिखाता है कि जज सेठ मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं क्योंकि उन्होंने कहा कि अगर पहले मुशर्रफ की मौत हो जाती है तो उनके शव को फांसी पर लटकाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी सजा पाकिस्तान के किसी भी कानून के खिलाफ है। नसीम ने कहा , ‘संघीय सरकार ने उच्चतम न्यायिक परिषद में जाने का फैसला किया है क्योंकि सरकार का मानना है कि ऐसे व्यक्ति किसी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नहीं हो सकते। अगर ऐसे न्यायाधीश फैसला देते हैं तो ऐसे न्यायाधीश मानसिक रूप से अस्वस्थ और अक्षम हैं।’



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