Monday, June 21, 2021

पृथ्वी के सबसे बड़े स्तनधारी ने तैरकर पार की आधी दुनिया, 20000 किमी की यात्रा कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

- Advertisement -


विंडहोक
अफ्रीकी देश नामीबिया के समुद्री किनारे पर 2013 में दिखी ग्रे व्हेल ने माइग्रेशन का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। पृथ्वी के सबसे बड़े इस स्तनधारी जीव ने अफ्रीका महाद्वीप के इस देश तक पहुंचने के लिए लगभग 20000 किलोमीटर की यात्रा की थी। दरअसल, इस जीव का अफ्रीकी महाद्वीप के एक छोर पर देखा जाना काफी अजीब था। ग्रे व्हेल उत्तरी गोलार्ध के उत्तरी अटलांटिक महासागर में दुर्लभ ही देखी जाती है। इस जीव का इतनी दूर आना ही वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली है।

अटलांटिक के ठंडे पानी में पाई जाती है यह व्हेल
ग्रे व्हेल का वैज्ञानिक नाम एस्क्रिचियस रोबस्टस है। यह उत्तरी अटलांटिक महासागर के ठंडे पानी में पाई जाती है। यह पता चला है कि इस ग्रे व्हेल ने नामीबिया तक पहुंचने के लिए 20000 किलोमीटर की यात्रा की थी। यह दूरी इंसानों को छोड़कर किसी भी स्तनधारी जीव के लिए तय करना लगभग असंभव है। जिसके बाद इस जीव के प्रवास को लेकर कई वैज्ञानिकों ने शोध भी किया।

उत्तरी प्रशांत में पैदा होने का दावा
ब्रिटेन के डरहम विश्वविद्यालय में रस होलजेल और उनके सहयोगियों ने व्हेल की त्वचा से टिशू सैंपल से इसकी उत्पत्ति का पता लगाने के लिए डीएनए का विश्लेषण किया। दूसरे ग्रे व्हेल के साथ इसकी तुलना करने पर उन्होंने पाया कि यह एक नर ग्रे ह्वेल है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि संभवत यह पूर्वी एशिया के तट पर पाए जाने वाले लुप्तप्राय पश्चिमी उत्तरी प्रशांत आबादी में पैदा हुआ था।

20000 किमी तैरकर बनाया विश्व रिकॉर्ड
वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका मतलब है कि इसने दक्षिणी अटलांटिक तक पहुंचने के लिए कम से कम 20,000 किलोमीटर की यात्रा की। बता दें कि पृथ्वी की परिधि 40,000 किलोमीटर से थोड़ी अधिक है। इसका मतलब इस जीव ने नामीबिया तक पहुंचने के लिए आधी दुनिया के बराबर दूरी का चक्कर लगाया है।

इससे पहले ग्रे वुल्फ ने काम था यह रिकॉर्ड
रस होलजेल ने कहा कि यह वास्तव में पानी में प्रवास का विश्व रिकॉर्ड है। अगर आप मानते हैं कि इस व्हेल ने उत्तर-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र में अपना जीवन शुरू किया और यह नामीबिया के किनारे तक पहुंचा तो यह बहुत बड़ी बात है। जहां तक हम जानते हैं इंसानों के अलावा किसी भी स्तनधारी ने इतनी लंबी दूरी को तय नहीं किया है। इससे पहले जमीन पर रहने वाले एक ग्रे वुल्फ ने प्रवास के लिए लगभग 7000 किमी की दूरी तय की थी।



Source link

इसे भी पढ़ें

ईरान का एकमात्र परमाणु संयंत्र रहस्‍यमय तरीके से बंद, मोसाद ने फिर मचाई तबाही?

तेहरानईरान के एकमात्र परमाणु बिजली संयंत्र को एक रहस्‍यमय तरीक से आपातकालीन शटडाउन के बाद बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा...

कोरोना से लड़ने में इमारतें भी काम आएंगी

लेखकः मुकुल व्यासवैज्ञानिकों का कहना है कि तमाम देशों को कोविड-19 से सबक लेकर सार्वजनिक भवनों की प्लानिंग में वेंटिलेशन पर मुख्य जोर...
- Advertisement -

Latest Articles

ईरान का एकमात्र परमाणु संयंत्र रहस्‍यमय तरीके से बंद, मोसाद ने फिर मचाई तबाही?

तेहरानईरान के एकमात्र परमाणु बिजली संयंत्र को एक रहस्‍यमय तरीक से आपातकालीन शटडाउन के बाद बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा...

कोरोना से लड़ने में इमारतें भी काम आएंगी

लेखकः मुकुल व्यासवैज्ञानिकों का कहना है कि तमाम देशों को कोविड-19 से सबक लेकर सार्वजनिक भवनों की प्लानिंग में वेंटिलेशन पर मुख्य जोर...

बीजेपी के लिए जरूरी हो गई है शॉक थेरपी

लेखकः अवधेश कुमारनरेंद्र मोदी सरकार और बीजेपी इस समय जिन विकट परिस्थितियों और कठिन चुनौतियां से घिरी है कुछ महीनों पूर्व तक उसकी...