Friday, April 23, 2021

मंगल ग्रह से आई NASA के Ingenuity हेलिकॉप्‍टर की पहली रंगीन तस्‍वीर, जानें कब भरेगा उड़ान

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हाइलाइट्स:

  • नासा के Ingenuity हेलिकॉप्‍टर की पहली तस्‍वीर दुनिया के सामने आ गई है
  • नासा के रोवर ने मंगल की सतह पर उतरे हेलिकॉप्‍टर की पहली रंगीन तस्‍वीर ली है
  • एजेंसी ने बताया क‍ि यह नन्‍हा सा हेलिकॉप्‍टर सोमवार को पहली बार उड़ान भर सकता है

वॉशिंगटन
मंगल ग्रह की सतह पर बेहद सर्द रातों का सामना कर रहे नासा के Ingenuity हेलिकॉप्‍टर की पहली तस्‍वीर दुनिया के सामने आ गई है। नासा के रोवर Perseverance ने मंगल की सतह पर उतरे हेलिकॉप्‍टर की पहली रंगीन तस्‍वीर ली है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया क‍ि यह नन्‍हा सा हेलिकॉप्‍टर सोमवार को पहली बार मंगल ग्रह पर उड़ान भर सकता है।

नासा ने बताया कि जब यह हेलिकॉप्‍टर उड़ान भरना शुरू कर देगा तब और ज्‍यादा अच्‍छी तस्‍वीरें आएंगी। शुरू में यह हेलिकॉप्‍टर केवल टेस्‍ट उड़ान भरेगा। इस दौरान वह करीब 30 सेकंड तक हवा में रहेगा। इसके बाद यह नीचे आ जाएगा। इस शुरुआती उड़ान मकसद यह पता लगाना है कि क्‍या धरती के बाहर मंगल ग्रह पर भी उड़ान भरी जा सकती है या नहीं।
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नासा के हेलिकॉप्टर ने इससे पहले एक ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। यह किसी दूसरे ग्रह पर भेजा गया पहला रोटरक्राफ्ट है और अब इसने सफलतापूर्वक मंगल पर एक रात अकेले दम पर बिता ली है। मंगल पर पहुंचने के बाद से यह रोवर से जुड़ा था और शनिवार को यह रोवर से बाहर आया और बाद में लाल ग्रह की जमीन पर कदम रखा। यह एक बड़ी सफलता इसलिए है क्योंकि रात के वक्त यहां तापमान -90 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

फ्लाइट की तैयारी
अब अगला चरण इसकी उड़ान टेस्ट करना है। NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी में हेलिकॉप्टर की प्रॉजेक्ट मैनेजर मीमी ऑन्ग ने बताया, ‘पहली बार Ingenuity अकेले मंगल पर रहा है लेकिन हमें पता है कि इसे सही सुरक्षा, सही हीटर और ठंडी रातों में रहने के लिए पर्याप्त बैटरी है, यह टीम के लिए बड़ी जीत है। हम इसके फ्लाइट टेस्ट की तैयारी के लिए उत्साहित हैं।’


..तो मिशन 90% सफल
इसके रोटर ब्लेड्स को अनलॉक किया जाएगा और इसके मोटर और सेंसर टेस्ट किए जाएंगे। इसके बाद एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट के दौरान हेलिकॉप्टर टेक ऑफ और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन का 90% सफल रहेगा। अगर यह सफलता से लैंड होने के बाद भी काम करता रहा तो चार और फ्लाइट्स टेस्ट की जाएंगी। मंगल पर रोटरक्राफ्ट की जरूरत इसलिए है क्योंकि वहां की अनदेखी-अनजानी सतह बेहद ऊबड़-खाबड़ है। मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ज्यादा ऊंचाई से एक सीमा तक ही साफ-साफ देख सकते हैं। वहीं रोवर के लिए सतह के हर कोने तक जाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में ऐसे रोटरक्राफ्ट की जरूरत होती है जो उड़ कर मुश्किल जगहों पर जा सके और हाई-डेफिनेशन तस्वीरें ले सके।



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