Sunday, March 7, 2021

मानवाधिकार पर जयशंकर ने UNHRC को खूब सुनाया, बोले- आतंकवाद के सौदागरों की तुलना पीड़ितों से नहीं कर सकते

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हाइलाइट्स:

  • एस जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर मानवाधिकार आयोग की बैठक में जमकर सुनाया
  • जयशंकर ने कहा- आतंकवाद के प्रायोजकों की तुलना पीड़ितों से नहीं की जा सकती
  • कश्मीर में मानवाधिकार को लेकर पाकिस्तान की चाल में फंसा हुआ है UNHRC

जिनेवा
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन (UNHRC) की बैठक में कश्मीर में मानवाधिकारों को लेकर जमकर खरीखोटी सुनाई है। उन्होंने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि मानवाधिकार के मामलों से निपटने वाली संस्थाओं को अहसास होना चाहिए कि आतंकवाद को कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता और ना ही आतंकवाद के प्रायोजकों की तुलना पीड़ितों से की जा सकती है।

आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध
मानवाधिकार परिषद के 46 वें सत्र के उच्चस्तरीय खंड को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध है और यह जीवन के अधिकार के सबसे मौलिक मानवाधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने डिजिटल तरीके से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आतंकवाद मानव जाति के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।’’

आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में भारत सबसे आगे
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा ‘‘लंबे समय से इसका पीड़ित होने के नाते आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में भारत सबसे आगे रहा है। यह केवल तब हो सकता है जब मानवाधिकारों से निपटने वाली संस्थाओं समेत सबको इसका स्पष्ट अहसास हो कि आतंकवाद को कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता ना ही इसके प्रायोजकों की तुलना पीड़ितों के साथ हो सकती है।’’ उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र में आठ सूत्री कार्ययोजना पेश की थी।

मानवाधिकार एजेंडा के सामने आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती
उन्होंने कहा, ‘‘हम अपनी कार्ययोजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) और अन्य देशों के साथ काम करना जारी रखेंगे।’’ उन्होंने कहा कि मानवाधिकार एजेंडा के सामने निरंतर सभी तरह के आतंकवाद की चुनौतियां बनी हुई है। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘मौजूदा महामारी के कारण कई स्थानों पर स्थिति और जटिल हो चुकी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए हम सबको साथ आने की जरूरत है। इन चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की भी जरूरत है।’’

मानवाधिकार के उल्लंघन का पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से समाधान हो
जयशंकर ने कहा कि कि मानवाधिकार के उल्लंघन और इसके क्रियान्वयन में खामियों का चुनिंदा तरीके से नहीं बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए। देश के आंतरिक मामलों और राष्ट्रीय संप्रभुता में दखल नहीं देने के सिद्धांत का भी पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘हमने देश में स्वास्थ्य मोर्चे पर समाधान किया और दुनिया के लिए भी कदम उठाए। हमने इस महमारी से निपटने में मदद के लिए 150 से ज्यादा देशों को जरूरी दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति की।’’



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