Friday, May 7, 2021

हुजूर आते आते बहुत देर कर दी… कोरोना के खिलाफ भारत की मदद करने में कैसे पीछे रह गया बाइडन का अमेरिका?

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हाइलाइट्स:

  • फजीहत करवाने के बाद कोरोना संकट में भारत की मदद करने को तैयार हुआ अमेरिका
  • राष्ट्रपति जो बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने ट्वीट कर दिया मदद का भरोसा
  • भारत में अमेरिका के खिलाफ बना माहौल, रूस-चीन ने मारी संवेदना की बाजी

वॉशिंगटन
कोरोना संकट से जूझ रहे भारत की मदद में देरी करने पर फजीहत करवाने के बाद अब अमेरिका को होश आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश सचिव समेत कई नेता अब भारत के प्रति संवेदना जता तत्काल मदद की कसमें खा रहे हैं। जो बाइडन ने कोविड वैक्सीन निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के निर्यात पर लगी पाबंदी खत्म करने का ऐलान किया है। लेकिन, अमेरिका के इस अड़ियल रवैये का सबसे बड़ा फायदा उसके दो सबसे बड़े दुश्मन रूस और चीन को मिला है। इन दोनों देशों ने तत्काल भारत को मदद का ऑफर कर लोगों के दिलों में अमेरिका के प्रति नफरत और अपने लिए प्यार पैदा कर दिया।

भारत की मदद में क्यों पीछे रह गए बाइडन
कोरोना वायरस महामारी से अमेरिका भी जूझ रहा है। पैसे और पावर के दम पर अमेरिका ने पहले ही अपने लोगों के लिए दुनियाभर की शीर्ष वैक्सीन निर्माताओं से अपने सभी नागरिकों के लिए तीन-तीन डोज रिजर्व रखी हुई है। घरेलू स्तर पर वैक्सीनेशन तेज करने और वैक्सीन निर्माता कंपनियों को कच्चे माल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए बाइडन ने पहले अपने देश को प्राथमिकता दी। इस दौरान वे यह भूल गए कि वैश्विक कूटनीति में अहमियत बनाए रखने के लिए दोस्तों की मदद करना कितना जरूरी होता है।

भारत को लेकर ट्रंप से कम संजीदा हैं बाइडन
अघोषित रूप से जो बाइडन को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपेक्षा भारत की मोदी सरकार से ज्यादा लगाव नहीं है। इस समय इंडो पैसिफिक क्षेत्र में बने हालात और चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका को भारत की जरूरत है। यही कारण है कि न चाहते हुए भी बाइडन को भारत का साथ देना पड़ रहा है। बराक ओबामा के कार्यकाल में जो बाइडन ही नहीं, इस समय की अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भी धार्मिक आजादी को लेकर भारत की आलोचना करते रहे हैं।

भारत में बना अमेरिका के खिलाफ माहौल
वैक्सीन के कच्चे माल पर कुंडली मारकर बैठे अमेरिका और उसके विदेश मंत्रालय के अमेरिकी फर्स्ट वाले बयान पर भारत में कड़ी नाराजगी देखी गई थी। कई लोगों ने सोशल मीडिया में अमेरिका को भारत की मदद न करने पर जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। बड़ी बात यह है कि अमेरिका की आलोचना करने वालों में उनके खुद के देश सहित पूरी दुनिया के लोग शामिल थे। उन्होंने क्वाड, चीन, इंडो पैसिफिक, ईरान और रूस समेत कई मुद्दों पर भारत का अमेरिका का साथ दिए जाने की याद भी दिलाई थी।

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अमेरिका से पहले चीन-रूस ने दिया मदद का ऑफर
अमेरिका को भारत का सबसे करीबी देश माना जाता है। लेकिन, यह बात भी सही है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में न तो कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही कोई दुश्मन। भारत सरकार ही नहीं, भारतीय जनमानस भी कोरोना संकट में सबसे पहले अमेरिका से मदद का भरोसा किया था। लेकिन, इसमें बाजी अमेरिका के दो कट्टर विरोधी रूस और चीन ने मार ली। सबसे पहले इन्हीं दोनों देशों ने भारत को कोरोना संकट से निपटने के लिए मदद का ऑफर दिया था।

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पाकिस्तान से भी पीछे रहा अमेरिका
भारत में कोरोना संकट से निपटने में चार बार युद्ध लड़ चुके पाकिस्तान ने भी अमेरिका से बाजी मार ली। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर भारत के प्रति एकजुटता दिखाई। वहीं, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका देश भारत को वेंटिलेटर, डिजिटल एक्सरे मशीन और पीपीई किट समेत कई जरूरी सामानों को देने के लिए तैयार है। पाकिस्तानी विपक्षी नेताओं ने भी कोरोना महामारी से पैदा हुए हालात पर संवेदना जताई।

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अब मदद का भरोसा दे रहे हैं बाइडन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भारत को घातक कोरोना वायरस संकट से निपटने में मदद देने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय जीवनरक्षक आपूर्तियां और उपकरण समेत हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन दिया है। बाइडन ने एक ट्वीट में कहा कि जैसे भारत ने अमेरिका को मदद भेजी थी जब वैश्विक महामारी की शुरुआत में हमारे अस्पतालों पर दबाव बहुत बढ़ गया था वैसे ही हम जरूरत के इस वक्त में भारत की मदद के लिए दृढ़ हैं।

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अब कमला हैरिस की भी खुली नींद
अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने ट्वीट किया कि अमेरिका कोविड-19 के चिंताजनक प्रकोप के दौरान अतिरिक्त सहयोग एवं आपूर्तियां भेजने के लिए भारतीय सरकार के साथ करीब से काम कर रहा है। सहायता देने के साथ ही हम भारत के निडर स्वास्थ्यकर्मियों समेत उसके नागरिकों के लिए प्रार्थना भी कर रहे हैं। बाइडन और हैरिस के ट्वीट भारत में कोविड-19 के हालिया घातक प्रकोप के बाद शीर्ष अमेरिकी नेतृत्व की ओर से दी गई पहली प्रतिक्रिया है। अमेरिका में भारत के मित्रों ने देश के सहयोगी की मदद में धीमी प्रतिक्रिया के लिए दोनों की आचोलना की थी। आलोचना करने वालों में उनकी अपनी ही पार्टी के नेता भी हैं।



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