Saturday, June 19, 2021

Aurora: धरती के ध्रुवों को कैसे रंगीन रोशनी में डुबोते हैं सूरज से निकले तूफान? पहली बार वैज्ञानिकों ने किया साबित

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धरती के दक्षिण और उत्तर ध्रुवों से कई बार ऐसा नजारा देखने को मिलता है जो प्रकृति के जादू से कम नहीं लगता। Northern Lights या Aurora borealis और Southern Lights या Aurora australis आसमान में किसी लेजर लाइट शो जैसी लगती हैं। हजारों साल तक लोग समझने की कोशिश करते रहे कि ये अद्भुत रोशनी क्यों दिखती है। इसे लेकर एक थिअरी यह मानी गई कि सूरज पर होने वाले विस्फोट से निकले पार्टिकल्स जब धरती की मैग्नेटिक फील्ड और ऊपरी वायुमंडल से टकराते हैं, जो उनसे कई रंगों की रोशनी निकलती हैं। अब इस थिअरी को साबित भी कर दिया गया है। (फोटो: NASA/ESA)

कैसे बनते हैं Aurora?

नेचर कम्यूनिकेशन्स में छपी स्टडी में लॉस ऐंजिलिस की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, वीटन कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ आइओवा और स्पेस साइंस इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस थिअरी को साबित किया है। इसके लिए UCLA की बेसिक प्लाज्मा साइंस फसिलटी में लार्ज प्लाज्मा डिवाइस पर एक्सपेरिमेंट किए गए। यहां धरती के मैग्नेटोस्फीयर जैसी कंडीशन्स बनाई गईं और फिर ऐल्फेन वेव्स को प्लाज्मा डिवाइस के 20 मीटर लंबे चैंबर में लॉन्च किया गया। (फोटो: UCLA, Basic Plasma Science Facility)

कैसे किया एक्सपेरिमेंट

माना जाता है कि ऐल्फेन वेव्स स्पेस के प्लाज्मा में थोड़े ही इलेक्ट्रॉन्स कलेक्ट करती हैं। इसलिए फिजिसिस्ट्स ने यह पता लगाने की कोशिश की क्या कैसे ऐसे भी इलेक्ट्रॉन्स हैं जो वेव्स की इलेक्ट्रिक फील्ड जैसे रेट से ट्रैवल कर रहे हों। इन्हें ढूंढना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि इनकी संख्या काफी कम होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ आइओवा के असोसिएट प्रफेसर ऑफ फिजिक्स ग्रेगरी हाउज ने बताया कि इन इलेक्ट्रॉन्स में ऐल्फेन वेव की इलेक्ट्रिक फील्ड की वजह से रेजोनेन्ट ऐक्सलरेशन होता है, जैसे कोई सर्फर लहर को पकड़ने की कोशिश कर रहा हो और साथ में लहर के साथ ही आगे बढ़ते हुए तेज रफ्तार भी पकड़ रहा हो। (ESA/NASA)

इसलिए होते हैं इतने रंग

हाउज ने बताया कि ऐल्फेन वेव्स जियोमैग्नेटिक तूफानों के बाद देखी जाती हैं। ये तूफान सूरज में विस्फोट होने पर कोरोनल मास इजेक्शन से निकलते हैं। इनसे धरती की मैग्नेटिक फील्ड में मैग्नेटिक रीकनेक्शन होता है। इस दौरान मैग्नेटिक फील्ड लाइन्स रबर बैंड की तरह खिंचती हैं और फिर जोर से रीकनेक्ट हो जाती हैं। इनकी वजह से धरती की ओर ऐल्फेन वेव निकलती हैं। किसी सोलर स्टॉर्म के दौरान मैग्नेटिक रीकनेक्शन के क्षेत्र में शिफ्ट, ऐल्फेन वेव्स और उनके साथ चल रहे इलेक्ट्रॉन्स अलग-अलग फील्ड लाइन में होते हैं, इससे कई रंगों की रोशनी aurora की शक्ल में हमें दिखाई देती है। (NASA)



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