Wednesday, August 4, 2021

Durand Line Dispute: पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का निशाना, ‘तालिबान करे वादा, डूरंड लाइन को नहीं मानेगा’

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काबुल
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तालिबान को देश में जारी हिंसा और आम लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने तालिबान को अफगानिस्तान के प्यार का वास्ता देते हुए डूरंड लाइन (Durand Line) को न मानने का वादा करने को कहा। वहीं, अमेरिकी सेना के चुपचाप देश से चले जाने पर गनी ने कहा कि उन्होंने दो साल पहले ही डोनाल्ड ट्रंप से देश छोड़ने को कहा था।

टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक खोस्त प्रांत में गनी ने देश से एकजुट रहकर आजादी, स्वराज्य और मिल-जुलकर रहने का समर्थन करने के लिए कहा। गनी ने कहा कि तालिबान को सोचना चाहिए कि वे किसके लिए लड़ रहे हैं? जब अफगानिस्तान बर्बाद हो जाएगा और अफगान लोगों को मार दिया जाएगा, तो किसका फायदा होगा। उन्होंने सवाल किया कि तालिबान अफगानिस्तान के लिए लड़ रहा है या किसी और देश के हाथ में बागडोर देने के लिए?

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पाकिस्तान को इशारा?
गनी के इस बयान को पाकिस्तान की ओर इशारा माना जा रहा है। दरअसल, गनी ने कहा, ‘अगर आप अफगानिस्तान से प्यार करते हैं तो वादा करिए कि Durand Line को नहीं मानेंगे, वादा करिए कि एक तरफा रास्ते पर मुड़ेंगे नहीं, वादा करिए कि आप अफगानिस्तान का पानी दूसरों को नहीं देंगे और दूसरों की सेवा नहीं करेंगे।’

डूरंड लाइन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा है जिसे ब्रिटिश शासकों ने 1896 में खींचा था। इस्लामाबाद इसे मानता है जबकि अफगानिस्तान इसके खिलाफ रहा है। उसका आरोप है कि पाकिस्तान ने उसके हिस्से की जमीन को कब्जा रखा है।

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‘हिंसा करता रहा तालिबान’
गनी ने कहा है कि अफगान सरकार शांति की ओर बढ़ने के लिए कोशिशें करती रही लेकिन तालिबान हिंसा करता रहा। उन्होंने कहा कि तालिबान को बातचीत करनी चाहिए, न कि बाहरियों का कहा करके देश को बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लड़ाई जंग के मैदान में नहीं बल्कि अफवाहों और प्रॉपगैंडा के कारण हारी गई।

‘ट्रंप से जाने को कहा था
वहीं, अमेरिकी सेना के देश छोड़कर जाने को लेकर गनी ने कहा कि वे सम्मान के साथ गए हैं। उन्होंने सवाल किया, ‘क्या मैंने उनसे यहां रुकने के लिए कहा था? क्या मैंने सात साल पहले नहीं कहा था कि वे चले जाएंगे। क्या दो साल पहले मैंने (तत्कालीन) राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप को खत लिखकर जाने को नहीं कहा था?’
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