Saturday, January 16, 2021

इस साल गणतंत्र दिवस पर नहीं होगा कोई मुख्य अतिथि, टूटेगा 55 साल का रिकॉर्ड

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हाइलाइट्स:

  • भारत के 72वें गणतंत्र दिवस पर नहीं होगा कोई मुख्य अतिथि, सरकार ने किया ऐलान
  • विदेश मंत्रालय ने कहा- कोरोना के कारण इस साल बिना मुख्य अतिथि के मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस
  • इससे पहले 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन के कारण हुआ था ऐसा

नई दिल्ली
भारत के 72वें गणतंत्र दिवस पर इस साल किसी भी देश के राष्ट्रप्रमुख मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद नहीं होंगे। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि कोरोना वायरस के कारण इस साल के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में किसी विदेशी राष्ट्र प्रमुख या सरकार के मुखिया को आमंत्रित नहीं करने का निर्णय लिया गया है। पिछले 55 साल में यह पहला मौका होगा, जब भारत का गणतंत्र दिवस बिना मुख्य अतिथि के मनाया जाएगा।

बोरिस जॉनसन ने कोरोना के कारण किया था इनकार
इस साल भारत ने गणतंत्र दिवस समारोह के के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को मुख्य अतिथि बनाया था, लेकिन उन्होंने अपने देश में कोरोना से बिगड़ते हालात के कारण दौरे को रद्द कर दिया था। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से निपट रही हो तब किसी नए राष्ट्राध्यक्ष या शासन के प्रमुख को निमंत्रित करना भी आसान कार्य नहीं था। ऐसे में सरकार ने इस साल बिना मुख्य अतिथि के गणतंत्र दिवस मनाने का निर्णय लिया है।

1966 में भी गणतंत्र दिवस पर नहीं था कोई मुख्य अतिथि
इससे पहले साल 1966 में भी भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद में हुए निधन के कारण किसी को निमंत्रित नहीं किया गया था। संविधानिक जरूरतों के हिसाब से इंदिरा गांधी ने गणतंत्र दिवस से दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस साल भारत ने बहुत सादगी के साथ अपना गणतंत्र दिवस मनाया था।

पुरानी है गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि की परंपरा
हर साल गणतंत्र दिवस पर किसी न किसी राष्ट्राध्यक्ष या राष्ट्र प्रमुख को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। यह परंपरा संविधान के लागू होने के साथ ही शुरू हो गई थी। हालांकि, बाद में कई साल किसी मुख्य अतिथि को आमंत्रित नहीं किया गया। विशेष रणनीति के तहत राजनीतिक, राजनयिक और आपसी संबंधों के आधार पर ही गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि का चुनाव किया जाता है।

जानें, पहली बार कौन बने थे मुख्य अतिथि
पहली बार 1950 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो 26 जनवरी पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे। उसके बाद 1954 में भूटान के राजा जिग्मे डोरजी मुख्य अतिथि बने थे। 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल गुलाम मोहम्मद मुख्य अतिथि थे।



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