Saturday, December 5, 2020

तमिलनाडु यूं ही नहीं जा रहे हैं गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी का पूरा प्लान समझिए

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चेन्नै
भाजपा के पूर्व अध्‍यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब भी किसी राज्‍य जाते हैं, तो वहां की राजनीति में हलचल तेज हो जाती है। बीते दिनों शाह पश्चिम बंगाल में थे तो वहां की सियासत गर्मा गई। अगले साल बंगाल समेत कई राज्‍यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में अमित शाह का हर दौरा राजनीतिक लिहाज से अहम माना जा रहा है। शनिवार को शाह चेन्‍नै का दौरा करेंगे। शाह यूं ही तमिलनाडु नहीं जा रहे, वह भी उन राज्‍यों में से एक है जहां अगले साल चुनाव होने हैं। शाह जा तो विकास परियोजनाओं का शिलान्‍यास करने रहे हैं, लेकिन बीजेपी के ‘चुनावी चाणक्‍य’ की इस दक्षिण राज्‍य में मौजूदगी के पीछे कुछ ऐसे फैक्‍टर्स भी हैं जो दिखाए नहीं जा रहे, मगर उनपर काम जारी है।

एम अलगिरि से मुलाकात
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने चेन्नै दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के बड़े बेटे एम अलगिरि से भी मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात बेहद अहम है, क्योंकि माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी अलगिरि की संभावित पार्टी केडीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है। अलगिरि डीएमके में काफी उपेक्षित रहे हैं। ऐसे में वह अपनी अलग पार्टी कलैनार डीएमके बनाने पर विचार कर रहे हैं।

अलगिरी के केडीएमके के साथ गठबंधन होने से बीजेपी को फायदा हो या न हो, राज्य में मुख्य विपक्षी दल डीएमके को नुकसान जरूर पहुंचेगा। डीएमके के नुकसान में भी बीजेपी अपना फायदा देख रही है, क्योंकि इससे उसकी सहयोगी और सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके को मदद मिलेगी। इसके अलावा बीजेपी का राज्य में जनाधार नहीं है। उसकी छवि भी तमिलनाडु की प्रमुख पार्टियों की तरह ब्राह्मण विरोधी आंदोलन के अनुकूल भी नहीं है। ऐसे में एक द्रविड़ पार्टी का साथ लेकर बीजेपी प्रदेश में अपने जनाधार के विस्तार की उम्मीद लगाए है।

एआईएडीएमके से तल्खी
राज्य में बीजेपी का सत्ताधारी एआईएडीएमके के साथ गठबंधन है। दोनों पार्टियों के बीच हाल के दिनों में तल्खी बढ़ने के संकेत भी मिले हैं। जयललिता के निधन के बाद पार्टी के करीबी कई उद्योगपतियों के यहां छापेमारी और इसके अलावा बागी नेता ओ पनीरसेल्वम के विद्रोह तथा पार्टी के विभाजन तक में बीजेपी का हाथ माना जाता है। बताया जाता है कि एआईएडीएमके के शीर्ष नेतृत्व के पास बीजेपी की ऐसी आक्रामक सियासी नीतियों से निपटने में दक्षता नहीं थी। ऐसे में पार्टी का बीजेपी से गठबंधन को मजबूरी ही माना जा रहा है। हाल ही में वेल यात्रा को लेकर बीजेपी और एआईएडीएम के मतांतर खुलकर सामने आए थे। सत्ताधारी दल ने राज्य में बीजेपी के वेल यात्रा पर रोक लगा दी थी।

वेल यात्रा से माहौल बना रही बीजेपी
विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की वेल यात्रा को लेकर भी राज्य में जबर्दस्त कोहराम मचा है। बीजेपी की एक महीने के लिए निर्धारित इस यात्रा का समापन 6 दिसंबर को होना है। ऐसे में बीजेपी के इस अभियान को लेकर न सिर्फ सत्ताधारी दल बल्कि तमिलनाडु के विपक्षी दल भी नाराज हैं। विपक्षी दलों ने सरकार ने अनुरोध किया है कि इस यात्रा पर तत्काल रोक लगाई जाए। कोरोना वायरस का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने बीजेपी को वेल यात्रा की परमिशन नहीं दी है लेकिन बीजेपी भी आरपार के मूड में यात्रा को जारी रखना चाहती है। इस वजह से कई बीजेपी नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया है।

वेल यात्रा को विपक्षी दल राज्य में दंगा फैलाने की साजिश बता रहे हैं। राज्य सरकार ने भी प्रदेश में कट्टरता को हावी न होने देने का हवाला देते हुए इस यात्रा पर रोक लगाने की बात कही थी। हालांकि, बीजेपी ने इन सब आरोपों का खंडन किया है। वेल यात्रा में बीजेपी का राजनीतिक उद्देश्य तो है, यह बात तमिलनाडु के पार्टी अध्यक्ष मुरुगन के इस बात से साफ हो जाती है, जो उन्होंने यात्रा की शुरुआत में कहा था। मुरुगन ने कहा था कि वेल यात्रा राज्य की राजनीति का टर्निंग पॉइंट साबित होगी।

बीजेपी की राज्य में स्थिति
बीजेपी की तमिलनाडु में बहुत मजबूत उपस्थिति नहीं है। बीते विधानसभा चुनाव की बात करें तो प्रदेश की 232 सीटों के लिए 2016 के चुनाव में डीएमके को 89 सीटें मिली थीं और एआईएडीएमके को 134 सीटें हासिल हुई थीं। वहीं, बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली थी। साल 2016 के चुनाव में तमिलनाडु में बीजेपी को 2.86 फीसदी वोट मिले थे। इन सबके बावजूद बीजेपी तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल बना रही है।

प्रदेश में जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पार्टी हर वह चीज कर रही है, जो उसे सही लगता है। इसके लिए बीजेपी अपने सहयोगी दलों से भी टकराव मोल लेने में गुरेज नहीं कर रही है। बीते चार सालों से पार्टी लगातार मीडिया में बनी हुई है। बताया गया कि तमिलनाडु के किसी भी क्षेत्रीय न्यूज चैनल पर डिबेट के दौरान बीजेपी का एक नेता जरूर मौजूद रहता है।

पार्टी पदाधिकारियों से करेंगे मुलाकात
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को तमिलनाडु पहुंचकर पार्टी की प्रदेश इकाई के पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे। वह उनसे चुनाव को लेकर रणनीतियों पर चर्चा और मंथन करेंगे। वेल यात्रा पर सरकार के रोक लगाने के मुद्दे पर भी शाह पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करेंगे।



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