Sunday, April 11, 2021

नेहरू, इंदिरा, मोदी… हाय! नेताओं की इस अदा पर क्यों न फिसल जाएं वोटर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को असम के कोकराझार में चुनावी रैली करने गए थे। मंच पर पहुंचते ही उन्‍होंने मतदाताओं की तरफ हाथ जोड़कर अभिवादन किया। जैसे कह रहे हों कि वोट बस बीजेपी को ही देना। बिना कुछ बोले वोटर्स से इशारों के जरिए काफी कुछ कह जाना मंझे हुए राजनेताओं की खासियत होती है। वोटर्स के दिमाग में यह बात तो चलती ही है कि इतना बड़ा नेता उनके आगे हाथ जोड़े या फलां मुद्रा में खड़ा है। जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर अब नरेंद्र मोदी तक वोटर्स नेताओं की ऐसी ही अदाओं पर फिसलते आए हैं।

असम में मोदी का ‘चुनावी नमस्‍कार’

1 अप्रैल 2021 को नरेंद्र मोदी की असम के कोकराझार में रैली थी। वे जब यहां पहुंचे तो सुनने वालों की अच्‍छी-खासी भीड़ मौजूद थी। आमतौर पर भीड़ देखकर लोग घबराते हैं, मगर नेताओं के लिए चुनावी रैली में उमड़ी भीड़ किसी बूस्‍टर से कम नहीं होती। उनका उत्‍साह बढ़ जाता है। मोदी ने रैली में आए लोगों की तरफ एक नजर डाली और फिर थोड़ा झुककर हाथ जोड़ दिए। एक तरह से कह रहे थे कि मैं आपके समर्थन के लिए धन्‍यवाद करता हूं, वोट हमारे उम्‍मीदवार को ही दीजिएगा।

देश के पहले चुनाव और नेहरू…

अंतरिम सरकार के बाद, सही मायनों में देशवासियों को 1951-52 में लोकतंत्र के सबसे ताकतवर हथियार यानी मताधिकार का प्रयोग करने का मौका मिला। ऊपर की तस्‍वीर देश के पहले लोकसभा चुनावों की है। नेहरू रायलसीमा में प्रचार करने पहुंचे थे। उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। तब इतने सुरक्षा के ताम-झाम नहीं हुआ करते थे। नेहरू वोटर्स के बीच जाते और अक्‍सर उनसे बातें किया करते थे। उन्‍हें खूब फूल-मालाओं से लाद दिया जाता था जो बाद में वोटर्स के हाथों में पहुंच जाती थीं। तस्‍वीर में नेहरू यही करते नजर आ रहे हैं।

इंदिरा का वो बेतकल्‍लुफ अंदाज….

आपातकाल के स्‍याह दौर से उबरने के बाद इंदिरा ने जब जोरदार वापसी की तो उनकी लोकप्रियता आसमान छू रही थी। इंदिरा मतदाताओं के बीच बेहद सहज थीं, उनसे कनेक्‍ट होना उन्‍हें बखूबी आता था। ऊपर की तस्‍वीर मद्रास एयरपोर्ट की है। इंदिरा 1980 में चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मद्रास (अब चेन्‍नई) गई थीं। तस्‍वीर में आपको बच्‍चों से लेकर बुजुर्ग तक इंदिरा की एक झलक को बेकरार नजर आएंगे। इंदिरा भी निराश नहीं करतीं। चेहरे पर मुस्‍कान लिए वे हाथ छोड़ लेती हैं और वोटर्स के नमस्‍कार करते हुए अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ आगे बढ़ती चली जाती हैं।

अमेठी और राजीव गांधी का वो खास जुड़ाव

अमेठी सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस की रही है, मगर अब इसपर भाजपा का कब्‍जा है। गांधी परिवार से इस सीट के वोटर्स का जुड़ाव कैसा रहा है, इसे आप ऊपर की तस्‍वीर से समझ सकते हैं। यूं ही चलते-फिरते कहीं भी सभा शुरू हो जाती थी। जीप में माइक और लाउडस्‍पीकर का इंतजाम रहता था। 1981 की इस तस्‍वीर में राजीव गांधी अमेठी के मतदाताओं से जीप के दरवाजे पर खड़े होकर बात करते नजर आ रहे हैं। सामने जो लोग हैं, उनमें बच्‍चे, नौजवान से लेकर बुजुर्ग मौजूद हैं। कुछ ज्‍यादा ही उत्‍साहित हैं और राजीव के पक्ष में नारेबाजी कर रहे हैं।

वाजपेयी और हाथ घुमाने का उनका अनूठा अंदाज

स्‍वतंत्र भारत में कम ही नेता हुए हैं जिनकी वाकपटुता की तुलना अटल बिहारी वाजपेयी से हो सके। उनमें जनमानस की उन रगों को छेड़ने का हुनर था जिनके सहारे राजनीति की सीढ़‍ियां चढ़ी जाती हैं। वाजपेयी अक्‍सर हाथों को अलग तरीके से नचाकर बात करते थे, बोलने की अपनी एक खास शैली रखते थे। जनसमूह के आगे उनके तेजस्‍वी भाषण यूट्यूब पर आज भी चाव से देखे जाते हैं। यही अंदाज-ए-बयां तो बड़े नेताओं को बाकियों से अलग करता है।



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