Sunday, February 28, 2021

पुलवामा हमले में शहीद हुआ था इकलौता बेटा, लेकिन सुबह की चाय से लेकर रात को लोरी सुनाने तक… कुछ नहीं भूलते कुलविंदर के माता-पिता, रुला देंगी ये तस्वीरें

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पुलवामा में जैश-ए-मोहम्‍मद के एक आतंकवादी ने सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के जवानों के काफिले में चल रही एक बस में विस्‍फोटक से भरी कार टकरा दी थी। इस अटैक में 40 जवान शहीद हुए थे, उनमें से एक थे पंजाब के रोपड़ जिले के रहने वाले कुलविंदर सिंह। 26 साल के शहीद कुलविंदर सिंह अपने माता-पिता की एकलौती संतान थे।

बेटा था दुनिया और वह ही दुनिया में नहीं रहा

कुलविंदर के शहीद होने के बाद उनके बूढ़े माता-पिता के पास कोई नहीं बचा है। उनकी दुनिया उनका बेटा था जो अब अब इस दुनिया में ही नहीं रहा। दोनों के दिन की शुरुआत अपने बेटे से होती थी और बेटे पर ही खत्म होती थी। बेटा चला गया लेकिन माता-पिता बेटे के होने का एहसास नहीं भूले।

गोद में तस्वीर रखकर सुलाती हैं मां

कुलविंदर के बिस्तर की चादर बदलने से लेकर रोज सफाई का काम करने तक माता-पिता खुद को व्यवस्त रखते हैं। रात को कुलविंदर की तस्वीर को प्रणाम करते हैं। मां बेटे को प्यार से सुलाती हैं और उसके बाद दोनों खुद सोते हैं। कभी-कभी कुलविंदर की तस्वीर को गोद में रखकर मां उसे सुलाती हैं। वह कहती हैं कि उन्हें लगता है कि बेटा उनकी गोद में सो रहा है और वह उसके बालों पर हाथ सहला रही हैं।

बेटे की करते हैं रोज आरती

सुबह शाम कुलविंदर की आरती होती है। उनके पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है कि उसने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्होंने कहा कि हम सुबह शाम दीप जलाते हैं और परमात्मा से कहते हैं कि उसकी आत्मा को शांति दें।

बेटे की भी बनती है चाय, साथ बैठकर पीते हैं

रोज सुबह घर में तीन कप चाय बनती है। मां चाय बनाकर सबसे पहले बेटे कुलविंदर के कमरे में पहुंचती हैं। यहां पर कुलविंदर की तस्वीर के आगे एक कप चाय रखी जाती है और दो कप चाय लेकर उनके माता-पिता सामने बैठकर पीते हैं। फिर कुलविंदर को भोग के रूप में दी गई चाय दोनों लेकर पीते हैं।

आज भी वैसे ही सजाकर रखा है बेटे का कमरा

माता-पिता ने कुलविंदर का कमरा आज भी वैसे ही सजाकर रखा है। कुलविंदर के कमरे में उसके सारे अवॉर्ड, कप और उसे स्कूल से लेकर कॉलेज तक मिले सारे सम्मान रखे हैं। उसके कमरे में बेड सजा रहता है। बेड के ऊपर कुलविंदर की तस्वीर रखी रहती है।

बेटे की जैकेट पहनकर उसके होने का करते हैं एहसास

कुलविंदर के माता-पिता इस बात का एहसास है कि बेटा शहीद हो गया है लेकिन वह हर पल-हर क्षण उसे अपने साथ महसूस करते हैं। पिता रोज बेटे की सेना वाली जैकेट और कपड़े पहनते हैं। वह कहते हैं उन्हें इन कपड़ों को पहनकर लगता है कि बेटा उनसे लिपटा हुआ है।

Twitter-ANI_HindiNews



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