Sunday, June 13, 2021

राजस्थान फोन टैप विवाद में फिर तेज हुई हलचल , CM गहलोत के OSD ने दिल्ली हाइकोर्ट में केंद्रीय मंत्री शेखावत को दी चुनौती

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हाइलाइट्स:

  • राजस्थान फोन टैपिंग मामले में फिर तेज हुई हलचलें
  • गजेंद्र सिंह की एफआईआर को ओएसडी लोकेश शर्मा ने दी चुनौती
  • लोकेश शर्मा की इस याचिका पर आज यानी गुरुवार को सुनवाई

जयपुर
साल 2020 में सियासी संकट के दौरान प्रदेश की सियासत में भूचाल लाने वाला फोन टैपिंग विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। ताजा अपडेट यह है कि इस मामले में अब जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह की एफआईआर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। लोकेश शर्मा की इस याचिका पर आज यानी गुरुवार को सुनवाई होनी है। लोकेश शर्मा ने एफआईआर के क्षेत्राधिकार और कई तकनीकी पहलुओं के आधार पर चुनौती दी है।

आठ महीनों बाद सरकार ने स्वीकारी थी फोन टैपिंग की बात
आपको बता दें कि पिछले साल सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय राजस्थान सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगे थे। इसमें विपक्ष की ओर से विधानसभा में भी यह सवाल पूछा गया था कि क्या जनप्रतिनिधियों के फोन टैप हुए, जिसके जवाब में सरकार ने आठ महीनों बाद फोन टैपिंग की बात को स्वीकारा था। इसके बाद से लगातार सरकार बीजेपी के निशाने पर आ गई थी। लिहाजा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस पर दिल्ली में एक परिवाद (शिकायत) दर्ज करवाई थी। शेखावत की परिवाद के बाद 25 मार्च को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी।

दिल्ली क्राइम ब्रांच कर रही है मामले की जांच
बता दें कि सरकार की ओर से इस मामले में सफाई दी गई थी कि किसी भी जन प्रतिनिधि के फोन टैप नहीं किए गए। फोन असल में इंटरसेप्टेड था। फोन इंटरसेप्टेड के दौरान दो लोगों की बातचीत कोई तीसरा भी सुन सकता है। साथ ही इसे नियमानुसार और राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया था। इधर इस मामले की एफआईआर में गजेंद्र सिंह ने जनप्रतिनिधियों के फोन टैप करने और उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया। शेखावत ने FIR में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के OSD लोकेश शर्मा समेत अज्ञात पुलिस अफसरों को आरोपी बनाया। दिल्ली क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है।

मामले को रद्द करने और राजस्थान भेजने की मांग
बता दें कि अब इस पूरे मामले में लोकेश शर्मा ने अपनी याचिका में एफआईअसार के क्षेत्राधिकार को भी चुनौती दी है। याचिका में तर्क दिया है कि फोन टैपिंग मामले में राजस्थान में पहले से ही एफआईआर दर्ज है जिस पर जांच चल रही है, इसलिए उसी मामले में राजस्थान से बाहर एफआईआर का औचित्य नहीं है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि अगर एफआईआर को रद्द नहीं भी किया जाता है तो इसे जीरो एफआईआर मानते हुए राजस्थान ट्रांसफर किया जाए।



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