Monday, June 14, 2021

वैक्सीनेशन की बढ़ेगी रफ्तार…फाइजर और मॉडर्ना के भारत आने का रास्ता साफ, सरकार ने दी बड़ी छूट

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नई दिल्ली
कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार देश में तेजी से बढ़े इसको लेकर अमेरिकी कंपनी फाइजर और मॉडर्ना को लेकर सरकार बड़ी छूट देने को राजी हो गई है। इसके साथ ही इन दोनों वैक्सीन के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है। कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल से जुड़े किसी भी दावे से कानूनी सुरक्षा की मांग को लेकर अब अमेरिकी कंपनी फाइजर और सरकार के बीच बात बनती दिख रही है। सूत्रों की मानें तो सरकार इस बात पर राजी हो गई है कि साइड इफेक्ट पर कंपनी को जुर्माना नहीं देना पड़ेगा।

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स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दूसरे देशों ने भी ऐसा किया है। अमेरिकी कंपनी की इसी मांग की वजह से टीके को मंजूरी मिलने में देरी हो रही थी। वहीं फाइजर की भारत में किसी भी टीके की मंजूरी के पहले स्थानीय परीक्षण के मामले में सरकार से बातचीत चल रही थी। इसमें भी कंपनी को छूट मिल गई है। इससे पहले फाइजर ट्रायल वाली शर्त के बाद इमरजेंसी इस्तेमाल से आवेदन वापस ले लिया था।

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कोविड-19 टीका आयात में देरी को लेकर हो रही आलोचना के बीच सरकार की ओर से कहा गया कि वह 2020 के मध्य से ही फाइजर और मॉडेर्ना से टीका आयात पर बातचीत कर रही है। सरकार ने इसके साथ ही बड़ी विदेशी टीका निर्माता कंपनियों को स्थानीय स्तर पर परीक्षण की जरूरत से छूट भी दी है।

कोरोना वायरस के भारतीय वेरिएंट के खिलाफ कारगर है फाइजर-मॉडर्ना की वैक्‍सीन: शोध
भारत में कहर बरपाने वाले कोरोना वायरस के B.1.617 वेरिएंट के खिलाफ अमेरिका की फाइजर और मॉडर्ना कोविड-19 वैक्‍सीन को कारगर पाया गया है। अमेरिका के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने कहा था कि न्‍यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शोध में यह जानकारी निकलकर सामने आई है कि एमआरएनए तकनीक पर आधारित दोनों ही कोरोना वायरस वैक्‍सीन म्‍यूटेशन के खतरे के बाद भी भारत में मिले कोरोना वेरिएंट के स्‍पाइक प्रोटीन खत्‍म करने में सक्षम है।

भारत के शीर्ष दवा नियामक ने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कसौली द्वारा विदेश में निर्मित कोविड-19 रोधी टीकों की जांच करने और ऐसी कंपनियों के लिए टीकों का इस्तेमाल शुरू करने के बाद ब्रिजिंग ट्रायल करने की अनिवार्यता में छूट दे दी है जिससे टीकों की उपलब्धता बढ़ेगी।

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अभी तक किसी भी विदेशी कंपनी को भारत में कोरोना वायरस रोधी टीका शुरू करने से पहले ब्रिजिंग ट्रायल करना होता था। इसमें सीमित संख्या में लोगों पर टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा को परखा जाता है। डीसीजीआई के अनुसार, भारत में हाल ही में कोविड-19 के मामले बेतहाशा बढ़ने के कारण बढ़ी टीकों की मांग तथा देश की जरूरतों केा पूरा करने के लिए आयातित टीकों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए यह छूट दी गई हैं।

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