Tuesday, November 24, 2020

हाई कोर्ट ने पूछा-कितने समय में पूरी होगी हाथरस घटना की जांच

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लखनऊ
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीबीआई से पूछा है कि हाथरस घटना की जांच कितने समय में पूरी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई के दौरान मामले की स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की जाए। मालूम हो कि 2 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश रिजर्व कर लिया था। यह आदेश जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय की बेंच ने हाथरस मामले में स्वतः संज्ञान द्वारा दर्ज जनहित याचिका पर पारित किया।

कोर्ट ने गुरुवार को जारी आदेश में 2 नवंबर को हुई सुनवाई प्रक्रिया को भी दर्ज किया। कोर्ट के समक्ष अभियुक्तों की ओर से खुद को पक्षकार बनाए जाने का पत्र भी पेश किया गया। इस पर कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को निस्तारित करते हुए कहा कि वर्तमान में कोर्ट दो बिंदुओं पर सुनवाई कर रही है। पहला सर्वोच्च न्यायालय के 27 अक्टूबर के आदेश के अनुपालन में विवेचना की मॉनिटरिंग व दूसरा युवती के अंतिम संस्कार के मुद्दे पर।

‘अभियुक्तों को सुने जाने का अधिकार नहीं’

कोर्ट ने कहा कि इन दोनों ही बिंदुओं पर अभियुक्तों को सुने जाने का अधिकार नहीं है, लिहाजा वे इस स्तर पर आवश्यक पक्षकार नहीं हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान मामले की सुनवाई के दौरान यदि किसी प्रकार से उनके अधिकार प्रभावित होते हैं या प्रभावित होने की आशंका होती है तो उन्हें सुनवाई का अधिकार प्राप्त होगा।

‘किसी के अधिकारों का हनन न हो’
अभियुक्तों की ओर से एक अन्य प्रार्थना पत्र भी दिया गया। इसमें मीडिया को ट्रायल को प्रभावित करने वाली खबरें न दिखाने का निर्देश देने के संबंध में दाखिल किया गया था। इसे भी कोर्ट ने निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हमने 12 अक्टूबर के अपने आदेश में ही इस संबंध में मीडिया हाउसेज और राजनीतिक दलों से अनुरोध किया है कि वे ऐसा कोई विचार न व्यक्त करें जो सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध हो और जिससे पीड़िता के परिवार अथवा अभियुक्तों के अधिकारों पर विपरीत प्रभाव पड़े। कोर्ट ने यह जरूर स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता के परिवार अथवा अभियुक्तों के अधिकारों को या विवेचना को प्रभावित करने वाली कोई बात आती है तो हम उस पर अवश्य संज्ञान लेंगे।

‘क्या डीएम को कहीं और शिफ्ट कर सकते हैं’
वहीं जिलाधिकारी हाथरस प्रवीण कुमार के संबंध में भी कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि विवेचना के दौरान क्या उन्हें हाथरस में बनाए रखना निष्पक्ष और उचित है। कोर्ट ने कहा कि हमारे समक्ष भी जो प्रक्रिया चल रही है, वह गलत तरीके से अंतिम संस्कार और उनसे जुड़ी हुई है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या यह उचित नहीं होगा कि सिर्फ निष्पक्षता व पारदर्शिता के लिए इन प्रक्रियाओं के दौरान उन्हें कहीं और शिफ्ट कर दिया जाए। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अगली सुनवाई पर सरकार का रुख स्पष्ट करने की बात कही है।



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