Friday, May 14, 2021

2016, 2019 और फिर 2021 : जानें कैसे बीजेपी, टीएमसी और लेफ्ट-कांग्रेस के बीच इधर से उधर शिफ्ट करते रहे बंगाल को वोटर

- Advertisement -


Bengal Election Result Analysis : बीजेपी को 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में बड़ी सफलता हाथ लगी थी। उसने उस राज्य से अपने 18 सांसद लोकसभा भेजे जहां पार्टी हमेशा हाशिये पर रही थी। तब वामपंथी दलों के समर्थकों ने बड़ी संख्या में बीजेपी का रुख किया था। लेकिन, इस बार के विधानसभा चुनाव परिणाम कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा ली तो तृणमूल को उन इलाकों में सफलता मिल गई जहां 2016 के चुनावों में लेफ्ट और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने बाजी मारी थी।

शून्य पर क्लिन बोल्ड हो गए लेफ्ट-कांग्रेस

अमित शाह ने बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 200 सीटें मिलने का दावा किया था, लेकिन आंकड़ा 77 पर जाकर सिमट गया। यह राज्य में सरकार बनाने के लिए लिहाज से बहुत कम है, लेकिन 2016 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले बहुत शानदार प्रदर्शन है। यह चुनाव कांग्रेस और लेफ्ट के लिए बड़ी मायूसी का सबब साबित हुआ। दोनों का बंगाल में खाता तक नहीं खुल सका। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के एक उम्मीदवार की जीत ने वाम-कांग्रेस गठबंधन की लाज बचा ली, वरना पूरा गठबंधन ही शून्य पर आउट हो जाता।

​उत्तर बंगाल में बीजेपी को बड़ी बढ़त

बंगाल के ज्यादातर इलाकों में बीजेपी को टीएमसी के हाथों मात खानी पड़ी, लेकिन उत्तर बंगाल में बीजेपी का परचम खूब लहराया। यहां बीजेपी को टीएमसी से तिगुने अनुपात में सीटें मिलीं। लेकिन, कांग्रेस, लेफ्ट और आईएसएफ का संयुक्त मोर्चा तो उत्तर बंगाल से साफ ही हो गया। उसे बर्धमान, मुर्शिदाबाद और माल्दा जैसे इलाकों में भी एक सीट तक नसीब नहीं हुई जहां उसने 2016 के चुनाव में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था।

​अनुसूचित जातियों के लिए रिजर्व सीट पर बीजेपी का बेहतर प्रदर्शन

बंगाल विधानसभा चुनाव में जातीय राजनीति का तत्व भी काफी प्रभावी रहा। बीजेपी ने अनुसूचित जातियों (SC) का नब्ज पकड़ने में चूक नहीं की। इस कारण उसे इन जातियों का भरपूर समर्थन मिला। वैसे तो टीएमसी ने बीजेपी से ज्यादा रिजर्व सीटें जीतीं, लेकिन 2016 के मुकाबले 20% सीटों का नुकसान हुआ। जहां तक बात अनुसूचित जनजाति (ST) का सवाल है तो टीएमसी और बीजेपी, दोनों को लगभग बराबर की सीटें मिलीं। एसटी रिजर्व सीटों पर टीएमसी को बीजेपी के मुकाबले बहुत कम बढ़त हासिल हुई।

तृणमूल कांग्रेस को ग्रामीण इलाकों में बड़ी सफलता हाथ लगी है। उसने 156 में से 117 सीटें जीत लीं। उसने शहरी और कस्बाई इलाकों में भी अच्छी सफलता मिली जहां बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी तो रही, लेकिन दोनों के बीच फासला बड़ा रहा।

​मुसलमानों के प्रभाव वाले इलाकों में छा गई TMC

-tmc

जहां-जहां भी मुस्लिम मतादाताओं की अच्छी-खासी संख्या थी, वहां टीएमसी का दबदबा रहा। पार्टी के खाते में ऐसी 141 में से 119 सीटों पर कामयाबी मिली। इन इलाकों में 50% वोट टीएमसी के खाते में गए।



Source link

इसे भी पढ़ें

लॉन्च हुआ एक और स्मार्ट फीचर फोन, जानें Nokia 2720 V Flip में क्या है खास, पढ़ें कीमत से फीचर्स तक हर डिटेल

हाइलाइट्स:Nokia 2720 V Flip हुआ लॉन्चKaiOS पर करता है कामस्मार्ट फीचर फोन है Nokia 2720 V Flipनई दिल्ली। Nokia 2720 V Flip Launch:...

नोरा फतेही का इजरायल पर फूटा गुस्‍सा, सोशल मीडिया पर फिलिस्तीनियों के लिए छलका दर्द

बॉलिवुड ऐक्‍ट्रेस और मशहूर डांसर नोरा फतेही (Nora Fatehi) सोशल मीडिया पर काफी ऐक्‍टिव रहती हैं। अब उन्‍होंने फिलिस्तीन पर हमलों के खिलाफ...
- Advertisement -

Latest Articles

लॉन्च हुआ एक और स्मार्ट फीचर फोन, जानें Nokia 2720 V Flip में क्या है खास, पढ़ें कीमत से फीचर्स तक हर डिटेल

हाइलाइट्स:Nokia 2720 V Flip हुआ लॉन्चKaiOS पर करता है कामस्मार्ट फीचर फोन है Nokia 2720 V Flipनई दिल्ली। Nokia 2720 V Flip Launch:...

नोरा फतेही का इजरायल पर फूटा गुस्‍सा, सोशल मीडिया पर फिलिस्तीनियों के लिए छलका दर्द

बॉलिवुड ऐक्‍ट्रेस और मशहूर डांसर नोरा फतेही (Nora Fatehi) सोशल मीडिया पर काफी ऐक्‍टिव रहती हैं। अब उन्‍होंने फिलिस्तीन पर हमलों के खिलाफ...

Kabul mosque bombing: जुमे की नमाज के समय काबुल की मस्जिद में धमाका, इमाम सहित 12 लोगों की मौत

काबुलउत्तरी काबुल में जुमे की नमाज के समय एक मस्जिद में विस्फोट की खबर है। इसमें 12 नमाजियों की मौत हो गई। काबुल...