Friday, May 14, 2021

Bihar Corona Update : कोरोना पर बिहार सरकार को अदालत की फटकार, अगर ऑक्सिजन है तो लोगों की मौत कैसे हो रही- पटना हाईकोर्ट

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हाइलाइट्स:

  • कोरोना पर बिहार सरकार को अदालत की फटकार
  • अगर ऑक्सिजन है तो लोगों की मौत कैसे हो रही- पटना हाईकोर्ट
  • पटना हाईकोर्ट की बनाई समिति ने भी सौंपी रिपोर्ट
  • पटना में एक हजार बेड खाली मगर भटक रहे कोरोना पीड़ित- रिपोर्ट

पटना:
कोरोना से बेहाल बिहार को लेकर पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इस दौरान बिहार सरकार को फटकार के साथ नसीहत भी दी है। दरअसल पटना हाईकोर्ट की बनाई समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और मेदांता अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए करीब एक हजार से ज्यादा बेड खाली पड़े हुए हैं। बुधवार को हाइकोर्ट में पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑक्सिजन की अनियमित आपूर्ति के कारण अस्पताल प्रशासन मरीजों को भर्ती नहीं कर पा रहा है। डॉक्टर उमेश भदानी, डॉक्टर रवि कृति और डॉक्टर रवि शंकर सिंह की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।

पटना में बेड खाली लेकिन भटक रहे कोरोना पीड़ित
पीएमसीएच में 1750 बेड की सुविधा है किंतु उसमें केवल 770 बेड ही कोविड मरीजों को मिले हैं। आईजीआईएमएस में 1070 बेड की क्षमता के उलट सिर्फ 250 बेड ही कोविड मरीजों के लिए है। दूसरी तरफ 500 बेड वाला मेदांता अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

समिति की रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए हाइकोर्ट ने नाराजगी जताई। साथ ही कहा कि इन सभी अस्पतालों को 24 घंटे निर्बाध ऑक्सिजन आपूर्ति करने की कार्ययोजना पेश करें। न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह एवं न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खण्डपीठ ने शिवानी कौशिक और गौरव कुमार सिंह की ओर से दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई की।

ऑक्सिजन की कमी नहीं तो कैसे हो रही मौत
बुधवार को सुनवाई ऑक्सिजन की आपूर्ति पर केंद्रित रही। सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि बड़े दुख की बात है कि केंद्र सरकार की ओर से तय 194 मीट्रिक टन ऑक्सिजन में से राज्य सरकार केवल 90 मीट्रिक टन ऑक्सिजन का ही उठाव कर पा रही है। फिर भी सरकार कह रही है कि अस्पतालों में ऑक्सिजन की कमी नहीं है। अगर ऑक्सिजन है तो फिर ऑक्सिजन की कमी से मरीजों की मौत कैसे हो रही है? कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से तय 194 मीट्रिक टन ऑक्सिजन का उठाव हर हाल में राज्य सरकार करे।

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सुनवाई के दौरान आईजीआईएमएस के निदेशक ने बताया कि उनके यहां भी ऑक्सिजन की कमी हो रही है। कोर्ट ने पूछा कि आईजीआईएमएस को कोविड डेडीकेटेड अस्पताल बनाया जाएगा। इस बात पर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ने आईजीआईएमएस को कोविड डेडिकेटेड बनाने की घोषणा की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मेदांता अस्पताल में कम से कम 50 बेड कोरोना मरीजों के इलाज के लिए शुरू किया जाय।

अदालत ने होम आइसोलेट मरीजों को भी ऑक्सिजन देने को कहा
कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आप अस्पतालों में बेडों की संख्या घटा दीजिए। यह समस्या का समाधान नहीं ही। कोर्ट ने कहा कि होम आइसोलशन में रह रहे लोगों को ऑक्सिजन कैसे सप्लाई की जाए, इस बारे में कोई कार्ययोजना नहीं है। होम आइसोलशन में रह रहे लोगों को भी ऑक्सिजन सुनिश्चित किया जाय।
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बुधवार को एनएमसीएच में डॉक्टर व अन्य मेडिकल कर्मियों के साथ मरीजों के परिजनों की ओर से मारपीट करने और फिर से जूनियर डॉक्टर के हड़ताल पर जाने की खबर जैसे ही खण्डपीठ को मिली वैसे ही कोर्ट ने कहा कि कैसे भी हो डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने से रोकें। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार से कहा कि वे खुद प्रधान सचिव और अन्य अधिकारियों से बात कर हड़ताल खत्म करवाने की कोशिश करें। बाद में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जूनियर डॉक्टरों की तरफ से हड़ताल टालने की बात हो गयी है। सरकार ने डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दिलासा दिया है।



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