Thursday, April 15, 2021

Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ में फिर नासूर बनने लगे नक्सली? 12 दिन के अंदर दूसरी बड़ी वारदात

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हाइलाइट्स:

  • छत्तीसगढ़ में 12 दिन के अंदर नक्सलियों ने सुरक्षाबलों का किया बड़ा नुकसान
  • सुकमा मुठभेड़ में आठ जवान के शहीद होने की खबर, आधिकारिक पुष्टि नहीं
  • लोकेशन नहीं मिलने की वजह से लापता जवानों की तलाश में मुश्किल
  • सीआरपीएफ के डीजी भी पहुंच रहे हैं छत्तीसगढ़

रायपुर
12 दिनों के अंदर छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने दो बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। इन दोनों घटनाओं में 10 जवान शहीद हुए हैं। 23 मार्च को डीआरजी जवानों से भरी बस को नक्सलियों ने उड़ा दिया था। इस हादसे में करीब पांच जवान शहीद हुए थे। तीन अप्रैल को नक्सलियों और सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में पांच जवान शहीद हुए हैं। बताया जा रहा है कि 2000 के करीब जवान नक्सली हिडमा के गढ़ में घुसे थे। उसके बाद नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी है।

वहीं, एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल तस्वीर में जवानों के शव के साथ नक्सली खड़े हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि मुठभेड़ वाली जगह पर कनेक्टिविटी की काफी दिक्कत है। वहां मोबाइल भी काम नहीं करता है। सघन जंगल पर पूरी तरह से नक्सलियों का कब्जा है। बताया जाता है कि सर्च ऑपरेशन में भी कनेक्टिविटी की वजह से दिक्कत हो रही है। जगह-जगह पर नक्सली यहां आईडी बिछा कर रखे हुए हैं। रायपुर में पुलिस अधिकारियों की इमरजेंसी बैठक चल रही है।

23 मार्च को नक्सलियों ने किया था हमला
12 दिन के अंदर नक्सलियों ने दूसरी बड़ी घटना को अंजाम दिया है। 23 मार्च को नारायणपुर में आईईडी से नक्सलियों ने जवानों की बस उड़ा दी थी। इसमें पांच जवान शहीद हो गए थे। साथ ही 10 जवान जख्मी हुए थे। उसके बाद से नक्सल प्रभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दी गई थी। पुलिसिया कार्रवाई तेज होने से नक्सली बौखला गए थे। इसके साथ ही कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुए मुठभेड़ में भी कुछ नक्सली मारे गए थे।

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सूत्रों के अनुसार नक्सली इन घटनाओं से बौखला गए थे। बताया जा रहा है कि सुकमा जिले के जगरगुंड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत जोनागुड़ा गांव में नक्सलियों के जमावड़ा की सूचना थी। यहां नक्सली हिडमा की मौजूदगी की सूचना थी। उसके बाद पुलिस बड़ी तैयारी के साथ वहां कार्रवाई के लिए पहुंची थी। सूत्र बताते हैं कि रणनीतिक चूक की वजह से नक्सलियों के जाल में जवान फंस गए हैं। हेलिकॉप्टर से इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

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लापता जवानों का नहीं मिल रहा लोकेशन
मुठभेड़ के बाद 15-20 जवान लापता हैं, लेकिन उन जवानों का कोई लोकेशन नहीं मिल रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 700 जवानों को नक्सलियों ने घेर कर फायरिंग शुरू की थी। तीन से चार घंटे तक दोनों ओर से फायरिंग हुई है। वहीं, आईजी पी सुदंरराज ने कहा है कि बड़ी संख्या में इस मुठभेड़ के दौरान नक्सली हताहत हुए हैं। नक्सली अपने साथियों के शव ट्रैक्टर से ले गए हैं।

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पहले से था अफसरों को अंदेशा
मुठभेड़ के बाद जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है, उसके अनुसार अफसरों को पहले से यह अंदेशा था कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। बीजापुर-सुकमा जिले के सरहदी इलाका जोनागुड़ा नक्सलियों का मुख्य इलाका है। यहां बड़ी संख्या में हथियारों से लैस नक्सली रहते हैं। बताया जाता है कि पूरे इलाके की कमान महिला नक्सली सुजाता के हाथों में है।

20 साल में 10 हजार से ज्यादा वारदात को दिया अंजाम
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का खौफ कायम रहा है। बीच में पुलिस सख्ती के बाद कमी जरूर आई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2001-2018 के बीच छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने 9 हजार 96 अपराधों को अंजाम दिया था। इस दौरान नक्सलियों ने छह अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा में सबसे बड़ी वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें 76 जवान शहीद हुए थे। उसके बाद 25 मई 2013 को दरभा के जीरमघाटी में बड़ी घटना को अंजाम दिया था। इसमें कांग्रेस के आला नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2019 की तुलना में 2020 में नक्सली घटनाएं बढ़ी थीं। केंद्र सरकार ने लोकसभा में कहा थआ कि 2018 से 2020 के बीच छत्तीसगढ़ में 970 नक्सली घटनाएं हुई हैं, इनमें सुरक्षाबलों के 113 जवान शहीद हुए हैं।

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शांति वार्ता के लिए भेजा था प्रस्ताव
नक्सलियों ने 17 मार्च को सरकार के पास शांति वार्ता के लिए प्रस्ताव भेजा था। उसके बाद से प्रदेश में दो बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है। अपनी विज्ञप्ति में नक्सलियों ने कहा था कि हम जनता की भलाई के लिए सरकार से बात करना चाहते हैं। साथ ही सुरक्षाबलों को हटाने की मांग की थी।

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इसी इलाके में हैं के विजय कुमार
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय विशेष सुरक्षा सलाहकार के विजय कुमार पिछले 10 दिनों से बस्तर के इलाके में ही कैंप कर रहे हैं। उसके बावजूद नक्सलियों ने दो बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है। के विजय कुमार को विशेष रूप से बस्तर के इलाके में नक्सलवाद खत्म करने के लिए तैनात किया गया है। नक्सलियों ने दिसंबर 2020 में एक चेतावनी जारी कर कहा था कि 2021 में बड़ी घटनाओं को अंजाम देंगे।



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