Thursday, June 17, 2021

Coronavirus In Faridabad: दर्द से तड़पती रही मां, पहले आवाज चली गई और फिर जान

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हाइलाइट्स:

  • सरकार और प्रशासन के दावों के बावजूद दूर नहीं हो रही ब्लैक फंगस के मरीजों की दिक्कतें
  • दवाओं के लिए सोनू सूद से लेकर प्रधानमंत्री तक से गुहार लगा रहे तीमारदार
  • मरीजों की संख्या को देखते हुए जिले में ब्लैक फंगस मरीजों के बेड की संख्या 150 हुई

फरीदाबाद
ब्लैक फंगस से पीड़ित महिला की फरीदाबाद में मौत हो गई। उनका परिवार और जानकार पिछले कई दिनों से ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की गुहार लगा रहे थे। इस बीच किडनी फेल हो गई और उनकी दर्दनाक तरीके से मौत हुई। यह परिवार और उनके शुभचिंतक एक सप्ताह से इंजेक्शन के लिए सोशल मीडिया पर गुहार लगा रहे थे। इसके लिए डीसी से लेकर मुख्यमंत्री तक को ट्वीट किए थे। उनकी मौत के बाद व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि सरकार और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद जिले में ब्लैक फंगस के मरीजों की दिक्कतें दूर नहीं हो रही हैं।

जिले के अधिकारियों की ओर से दावा किया जा रहा है कि मांग के आधार पर दवा मंगा रहे हैं, लेकिन हकीकत ये है कि लोग इनके लिए गुहार लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी गुहार लगाई जा रही है जो अधिकारियों के दावों की चुगली कर रहे हैं। इस बीमारी के इलाज में प्रयोग होने वाले इंजेक्शन के लिए लोग अभिनेता सोनू सूद से लेकर प्रधानमंत्री तक से गुहार लगा रहे हैं। इस बीच जिले में बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए सरकार ने जिले में ब्लैक फंगस मरीजों के बेड की संख्या 40 से बढ़ाकर 150 कर दी है।

केस-1
विमलेश वार्षेय भी ब्लैक फंगस से पीड़ित थीं। उनका इलाज सेक्टर-21ए स्थित एशियन अस्पताल में चल रहा था। उन्हें भी इंजेक्शन मिलने में परेशानी आई। उनके बेटे रवि वार्षेय उनके लिए इंजेक्शन की गुहार लगाते रहे। वह किडनी की भी मरीज थीं। रवि ने कहा है कि उनकी मां को तमाम प्रयासों के बावजूद इंजेक्शन नहीं मिला। इंजेक्शन के लिए अस्पताल से मेल भेजा गया, लेकिन फिर भी इंजेक्शन की सूची में उनका नाम नहीं आया। फिर कहा गया कि अगले दिन होने वाली सरकारी अधिकारियों की मीटिंग के बाद इंजेक्शन मिलेगा। दर्द से मां तड़पती रहीं। उनकी आवाज चली गई। इसके कारण वह चीख नहीं पाईं। उनके लिए आवाज उठा रहीं शैलजा शर्मा कहती हैं कि अब वह नहीं रहीं। उनको इंजेक्शन नहीं मिला। मैं नहीं जानती कि ये किसकी गलती है। अंतिम मिनट तक परिवार इंजेक्शन के लिए इंतजार करता रहा।

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केस- 2

किरण श्रीवास्तव फरीदाबाद के फोर्टिस अस्पताल में एडमिट हैं। वह भी ब्लैक फंगस से पीड़ित हैं। उनके लिए भी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। उनके पोते वैभव श्रीवास्तव ने भी दादी के लिए इस मर्ज के इलाज के लिए इंजेक्शन की गुहार लगाई है। वैभव ने कहा है कि उनकी दादी को 6 इंजेक्शन प्रतिदिन की जरूरत है।

केस-3
पारस गौड़ फरीदाबाद में रहते हैं। पारस के नाना को ब्लैक फंगस है। वह यहां के सेक्टर-16 स्थित मेट्रो अस्पताल में एडमिट हैं। ब्लैक फंगस के इलाज में इंजेक्शन काम आने वाला इंजेक्शन पूरे फरीदाबाद और अस्पताल में नहीं मिल रहा है। उन्होंने ट्वीट कर अभिनेता सोनू सूद से मदद की गुहार लगाई है।

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केस-4

विजय कुमार गुप्ता फरीदाबाद के एशियन अस्पताल में भर्ती हैं। ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इंजेक्शन की जरूरत है। उनके तीमारदार प्रदीप गुप्ता कहते हैं कि वह फार्म भर चुके हैं, लेकिन अभी इंजेक्शन नहीं मिला है। विजय कुमार की हालत खराब है। उन्होंने ट्वीट कर प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज आदि से ब्लैक फंगस के इलाज के लिए तत्काल इंजेक्शन की गुहार लगाई है।

बढ़ रहे मरीज, बढ़ाई बेड की संख्या
मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस समय जिले में 60 से अधिक ब्लैक फंगस के मरीज भर्ती हैं। इसको देखते हुए सरकार ने ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज के लिए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में बेड्स की संख्या 20-20 से बढ़ाकर 75-75 कर दी है। जिले के दो सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और धौज गांव स्थित अलफ्लाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च में ब्लैक फंगस के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसके अलावा प्राइवेट अस्पताल भी इलाज कर रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों को आदेश दिया गया है कि वह हर मरीज का ब्योरा स्वास्थ्य विभाग को दें। प्रदेश में 500 से अधिक ब्लैक फंगस के मरीज हैं।

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सरकारी प्रक्रिया बनी देरी की वजह
ब्लैक फंगस के मरीजों तक दवाई पहुंचने में देरी हो रही है और यही बात उनके लिए जानलेवा बन रही है। चूंकि दवा मिलने की प्रक्रिया लंबी है। इसे पूरा करने में काफी समय लगता है। दवाओं की कालाबाजारी रोकने के लिए इसे मेडिकल स्टोरों पर बेचने पर पाबंदी लगी हुई है। अस्पतालों को भी मरीज का पूरा ब्योरा भेजने पर सरकार की अनुमति के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग दवा मुहैया कराता है। सरकार ने कहा है कि मरीजों को दवाओं की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी, लेकिन जिले में अब तक करीब 100 इंजेक्शन मिले हैं।

मरीज को एक से अधिक इंजेक्शन की जरूरत
विशेषज्ञों के मुताबिक एक मरीज को उसकी हालत के अनुसार एक से अधिक इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की सप्लाई के लिए अस्पताल को प्रोफार्मा भरकर [email protected] पर भेजना होता है। जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग इंजेक्शन मंगवाता है। इस प्रक्रिया में देरी हो रही है। उधर, सीएमओ डॉ रणदीप सिंह पूनिया कहते हैं कि डिमांड आने पर सरकार को अवगत कराकर दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जल्द ही कोटा बढ़ने जा रहा है।

Suicide

सांकेतिक तस्वीर



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