Monday, June 14, 2021

Coronavirus Third Wave: बच्चों में कोविड के खतरे को देखते हुए बन रही है गाइडलाइन, एक्सपर्ट्स ग्रुप ने दी हैं सिफारिशें

- Advertisement -


नई दिल्ली
बच्चों में कोविड के खतरे को देखते हुए और आगे वायरस किस तरह अपना रूप बदल सकता है और इसका बच्चों पर क्या असर हो सकता है, यह देखते हुए एक –दो दिन में गाइडलाइन जारी की जाएगी। नीति आयोग सदस्य (हेल्थ) डॉ. वी के पॉल ने कहा कि नई स्थिति में बच्चों में कितना रिस्क है, वायरस किस तरह अपना बिहेवियर बदल सकता है, इस सबका आकलन करते हुए नैशनल एक्सपर्ट ग्रुप ने अपने सुझाव सरकार को दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में इन्हें गाइडलाइन में शामिल किया जाएगा।

‘वायरस म्यूटेट हुआ तो बढ़ सकता है खतरा’
डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि बच्चों में कोविड अगर हो रहा है तो आमतौर पर यह बिना लक्षणों का हो रहा है। बच्चों में यह बीमारी गंभीर नहीं होती और हॉस्पिटल एडमिट करने की जरूरत भी बहुत कम पड़ती है। उन्होंने कहा कि हम सभी स्टडी और सभी डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। अगर हालात बदलते हैं, वायरस अपना बिहेवियर बदलता है तो बच्चों में प्रकोप बढ़ सकता है।

‘बच्चों के लिए होगा पूरा बंदोबस्त’
उन्होंने कहा कि हम यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि बच्चों के लिए जो भी जरूरी होगा उसका पूरा बंदोबस्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि 2-3 पर्सेंट बच्चों को हॉस्पिटल में एडमिट होने की जरूरत पड़े लेकिन हमारी तैयारी उससे दो-ढाई गुना ज्यादा होगी। एक्सपर्ट ग्रुप ने जो सुझाव दिए हैं उन पर एक्शन होगा।

बच्चों में कोविड के बाद भी असर, यह बड़ों से अलग
डॉ. पॉल ने कहा कि बच्चों में कोविड के दो रूप दिख रहे हैं। एक बुखार, खांसी, जुकाम, सांस तेज चलना और निमोनिया जैसे लक्षण के बाद हॉस्पिटल में दाखिल होने की जरूरत पड़ती है। साथ ही यह भी सामने आया है कि कोविड ठीक होने के दो से छह हफ्ते बाद कुछ बच्चों को फिर से बुखार आता है, बॉडी में रेशेज के साथ ही आंखों में जलन, डायरिया, सांस फूलने जैसे लक्षण दिख रहे हैं।

इलाज कठिन नहीं मगर टाइम पर होना चाहिए
ऐसा लगता है बीमारी एक सिस्टम में नहीं हैं, सब जगह फैली है। इसे मल्टी सिस्टम इन्फ्लैमेटरी सिंड्रोम कहते है। उन्होंने कहा कि तब अगर बच्चों का टेस्ट किया जाए तो वह कोविड नेगेविट होंगे, और यह यूनीक बीमारी बच्चों में ही देखी गई है। उन्होंने कहा कि जो भी अब तक समझ बनी है उसे देखते हुए बच्चों के डॉक्टर और स्टाफ सबके बारे में गाइडलाइन में चिन्हित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों में ब्लीडिंग, सांस फूलना या डायरिया जैसे लक्षण हों तो इसका इलाज कठिन नहीं है पर जल्द इलाज होना चाहिए।



Source link

इसे भी पढ़ें

जोकोविच जैसा कोई नहीं: हर ग्रैंडस्लैम दो बार जीतने वाले ओपन ऐरा के पहले खिलाड़ी

हाइलाइट्स:नोवाक जोकोविच फ्रेंच ओपन के नए चैंपियन4 घंटे चले फाइनल में सितसिपास को हराया52 साल में चारों ग्रैंड स्लैम दो बार जीतने वाले...
- Advertisement -

Latest Articles

जोकोविच जैसा कोई नहीं: हर ग्रैंडस्लैम दो बार जीतने वाले ओपन ऐरा के पहले खिलाड़ी

हाइलाइट्स:नोवाक जोकोविच फ्रेंच ओपन के नए चैंपियन4 घंटे चले फाइनल में सितसिपास को हराया52 साल में चारों ग्रैंड स्लैम दो बार जीतने वाले...

भारत ने पिछले 3 साल में बांग्लादेश को को सौंपे 577 घुसपैठिए , इस साल अब तक 100 को वापस भेजा गया

नई दिल्लीभारत ने साल 2018 से अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश को अधिकतम 577 घुसपैठिए सौंपे हैं, जो दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग...