Tuesday, January 19, 2021

LAC पर हालात में कोई बदलाव नहीं, आमने सामने डटे हैं भारत-चीन को सैनिक: आर्मी चीफ

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हाइलाइट्स:

  • एलएसी पर दोनों ओर से सैनिकों की तैनाती में कोई बदलाव नहीं
  • सेनाप्रमुख बोले- पाकिस्तान-चीन मिलकर टू फ्रंट खतरा पैदा कर सकते हैं
  • आर्मी डे से पहले सेना प्रमुख ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली
ईस्टर्न लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारत चीन से बीच चल रहा गतिरोध बरकरार है। आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। आर्मी डे से पहले अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों का जवाब देते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि एलएसी पर भारत और चीन के सैनिकों की तैनाती पहले की तरह हैं। किसी भी तरफ से सैनिकों की संख्या कम नहीं हुई है। पाकिस्तान और चीन मिलकर टू फ्रंट खतरा पैदा कर सकते हैं जिससे निपटने के लिए आर्मी तैयार है।

उन्होंने कहा कि ‘हर साल गर्मियों में चीन के सैनिक समर ट्रेनिंग के लिए तिब्बत पठार में आते हैं और ट्रेनिंग के बाद वह वापस चले जाते हैं। खासकर सर्दियों में उनकी कई यूनिट वापस चली जाती हैं। ये उनका ट्रेडिशनल ट्रेनिंग एरिया है। वहां उनके होने या वापस जाने का ज्यादा मतलब नहीं निकालना चाहिए। ये एरिया बॉर्डर से 500 से 1500 किलोमीटर दूर हैं। हालांकि हम उन पर नजर रखते हैं क्योंकि उनके यही सैनिक 24-48घंटों में वहां से आगे भी आ सकते हैं।

इसलिए हम हर तैनाती पर नजर रखते हैं। उनके पीछे जाने का ज्यादा मतलब नहीं है। अहम यह है कि जहां गतिरोध है और जहां एलएसी पर भारत-चीन के सैनिक आमने सामने डटे हैं वहां न तो चीन ने सैनिक कम किए हैं और न ही भारत ने।’ उन्होंने कहा कि ईस्टर्न लद्दाख में स्थित में कोई बदलाव नहीं आया है। हम सिर्फ ईस्टर्न लद्दाख में ही नहीं बल्कि पूरे नॉर्दर्न बॉर्डर (चीन से लगते बॉर्डर) पर नजर रखे हुए हैं।

ईस्टर्न कमांड एरिया और सेंट्रल सेक्टर में भारत और चीन के सैनिक आमने सामने नहीं डटे हैं लेकिन वहां भी कई फ्रिक्शन के पॉइंट हैं। इन इलाकों में चीन ने अपनी तरफ काफी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। नई सड़के बनाई हैं, नए बैरक बनाए हैं। हम जब भी रणनीति बनाते हैं इन सब फैक्टर का ध्यान रखते हैं।

पाकिस्तान और चीन की मिलीभगत के सवाल पर आर्मी चीफ ने कहा कि हम संभावित खतरों का रिव्यू करते रहते हैं और उसी हिसाब से अपनी स्ट्रैटजी बनाते हैं। पाकिस्तान और चीन मिलकर खतरा हो सकते हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम स्ट्रैटजिक प्लानिंग में इसे ध्यान रखते हैं।

ट्रू फ्रंट खतरे को देखते हुए हम रीबैलेंसिंग (सैनिकों और सैन्य साजोसामान की तैनाती) करते हैं। ईस्टर्न लद्दाख में जो हुआ उसने दिखाया कि चीन बॉर्डर के लिए कुछ रीबैलेंसिंग की जरूरत है। चीन और पाकिस्तान में मिलिट्री और नॉन मिलिट्री सहयोग बढ़ा है, हमें इससे डील करने के लिए तैयार रहना होगा।



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