Wednesday, August 4, 2021

Pegasus Case : पेगासस जासूसी पर सरकार ने संसद में कहा- निगरानी की व्यवस्था पहले से है, अवैध तरीके से यह संभव नहीं

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हाइलाइट्स

  • पेगासस जासूसी मामले पर सरकार ने संसद में दिया जवाब
  • आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले, निगरानी की व्यवस्था पहले से है
  • ‘अनधिकृत व्यक्ति द्वारा अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है’

नई दिल्ली
पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए कई पत्रकारों, मंत्रियों, विपक्षी नेताओं की कथित जासूसी मामले में विपक्ष सरकार पर हमलावर है। ऐसे में संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन हंगामे के बीच सरकार की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जवाब दिया। उन्होंने पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए भारतीयों की जासूसी करने संबंधी खबरों को सोमवार को सिरे से खारिज कर दिया।

अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं
उन्होंने कहा कि संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले लगाये गए ये आरोप भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास हैं। लोकसभा में स्वत: संज्ञान के आधार पर दिए गए अपने बयान में वैष्णव ने कहा कि जब देश में नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था पहले से है तब अनधिकृत व्यक्ति द्वारा अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है।
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केंद्रीय मंत्री का बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब मॉनसून सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों में इसके समेत कुछ अन्य मुद्दों पर शोर-शराबा किया। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री का यह बयान मीडिया में आई रिपोर्ट के मद्देनजर सामने आया है कि कुछ राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों सहित अनेक भारतीयों की निगरानी करने के लिए पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग किया गया था।

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पढ़िए वैष्णव ने क्या-क्या कहा
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा, ‘कल रात को एक वेब पोर्टल द्वारा बेहद सनसनीखेज खबर प्रकाशित की गई। यह प्रेस रिपोर्ट संसद के मॉनसून सत्र के एक दिन पहले सामने आई। यह संयोग नहीं हो सकता है। अतीत में वॉट्सऐप पर पेगासस के इस्तेमाल करने का दावा सामने आया। इन खबरों का तथ्यात्मक आधार नहीं है और सभी पक्षों ने इससे इनकार किया है।’
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वैष्णव ने कहा कि 18 जुलाई 2021 को आई प्रेस रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र और एक स्थापित संस्थान की छवि को धूमिल करने का प्रयास लगती है।

मीडिया संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम ने खुलासा किया है कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए भारत के दो केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर, हो सकता है कि हैक किए गए हों।

यह रिपोर्ट रविवार को सामने आई है। हालांकि सरकार ने अपने स्तर पर खास लोगों पर निगरानी रखने संबंधी आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने कहा, ‘इसका कोई ठोस आधार नहीं है या इससे जुड़ी कोई सच्चाई नहीं है।’

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संसद में बोलते केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव।



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