Thursday, June 17, 2021

PM नरेंद्र मोदी ने जौनपुर के रहने वाले युवक की मन की बात में किया जिक्र, कार्य को सराहा, आइए जानते कौन हैं दिनेश?

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हाइलाइट्स:

  • रोजी रोटी के लिए शहर को गए थे दिनेश प्रकाश उपाध्याय
  • शहर गए तो उन्हें ऑक्सिजन टैंकर चलाने के लिए मिला
  • कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों तक पहुंचाई ऑक्सिजन

नीलेश सिंह, जौनपुर
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में जौनपुर के रहने वाले दिनेश प्रकाश उपाध्याय का जिक्र किया। यही नहीं मोदी ने मन की बात में दिनेश से सीधे बात भी की। अब लोग जानना चाहते हैं कि आखिर दिनेश प्रकाश उपाध्याय कौन हैं?

बता दें कि दिनेश प्रकाश उपाध्याय जौनपुर जिले के जमुआ गांव हसनपुर सिकरारा के रहने वाले हैं। बाबू नाथ उपाध्याय कि चार संतानों में दूसरे बेटे दिनेश प्रकाश उपाध्याय हैं। दिनेश प्रकाश उपाध्याय की पत्नी निर्मला देवी गांव में गृहणी हैं। इनके तीन बच्चे बेटा आर्यन उपाध्याय (20) बीकाम का छात्र है, सोनिया उपाध्याय (16) दसवीं कक्षा कि छात्रा है और तीसरी बेटी श्रेया उपाध्याय नौवीं कक्षा में पढ़ती है।

दिनेश प्रकाश उपाध्याय 14 साल पहले आजीविका के लिए शहर गए तो उन्हें ऑक्सिजन टैंकर चलाने के लिए मिला। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अनेक हॉस्पिटलों में ऑक्सिजन पहुंचा कर अनेक लोगों की जान बचाई। इसी के चलते दिनेश का जिक्र पीएम मोदी ने मन की बात में की थी।

बेहद ही मध्यम परिवार से ताल्लुक रखते हैं दिनेश
जिले के पिछड़े इलाके और बेहद ही मध्यम परिवार से ताल्लुक रखने वाले दिनेश कुमार उपाध्याय से जब देश के प्रधानमंत्री ने बात कि तो पूरा परिवार गर्व कर रहा है। करीब पांच मिनट की वार्ता में प्रधानमंत्री ने दिनेश के काम को सराहा, हौसला बढ़ाया और इससे दूसरों को प्रेरणा लेने की बात कही। पीएम मोदी से बात करने पर दिनेश का कहना है कि उन्हें अपने काम का इनाम मिल गया है।

दिनेश ने बताया कि वह पिछले 15-17 वर्षों से टैंकर चला रहे हैं। पहले उनके काम को कोई महत्व नहीं मिलता था। लोग सामान्य रूप से चालकों जैसा व्यवहार करते थे। जाम में घंटों खड़ा रहना होता था। अब लोग उन्हें महत्व देते हैं।

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किसी भी योजना का नहीं मिला लाभ: दिनेश
वहीं, दिनेश प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि न ही उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है और न ही शौचालय मिला है। 15 हजार रुपये में परिवार का खर्च चलाते हैं और उनके नाम जमीन भी ज्यादा नहीं है।



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