Thursday, April 15, 2021

PM Modi on Corona Curfew: कोरोना कर्फ्यू, टीका उत्सव, वैक्सीन के बजाय टेस्टिंग पर फोकस…पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों संग बैठक में क्या-क्या कहा

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हाइलाइट्स:

  • कोरोना संक्रमण की विकराल होती दूसरी लहर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक
  • प्रधानमंत्री ने राज्यों को वैक्सीन से ज्यादा टेस्टिंग पर फोकस करने की सलाह दी, आरटीपीसीआर टेस्ट बढ़ाने पर दिया जोर
  • पीएम ने 11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव मनाने का सुझाव दिया, इस दौरान पूरी क्षमता से टीकाकरण पर दिया जोर

नई दिल्ली
देश में कोरोना वायरस की विकराल होती दूसरी लहर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक शुरू हो चुकी है। बैठक में प्रधानमंत्री ने देश में कोरोना महामारी की स्थिति की समीक्षा की और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्यों को सलाह दी। पीएम ने कोरोना कर्फ्यू के नाम से नाइट कर्फ्यू लगाने, टेस्टिंग बढ़ाने, 11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव मनाने का सुझाव दिया। आइए देखते हैं पीएम ने मीटिंग में क्या-क्या अहम बाते कही।

– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की स्थिति नहीं है। दवाई भी और कड़ाई भी, दोनों की जरूरत है।

– प्रधानमंत्री मोदी ने नाइट कर्फ्यू को प्रभावी बताते हुए राज्यों को सलाह दी कि इसे कोरोना कर्फ्यू के तौर पर लागू करना चाहिए। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। पीएम ने कहा कि अब हमारे पास संसाधनों के साथ-साथ अनुभव भी है।

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– प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैक्सीन से ज्यादा टेस्टिंग पर जोर दिया जाना चाहिए। हम टेस्टिंग भूलकर वैक्सीन पर चले गए हैं। हमने लड़ाई सिर्फ टेस्टिंग से जीती थी, तब वैक्सीन नहीं थी। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना ऐसी चीज है जिसे जबतक आप बाहर से लेकर नहीं आएंगे, तबतक वह नहीं आएगा। इसलिए टेस्टिंग और ट्रेसिंग बढ़ाने की जरूरत है।

– हमने पिछली बार कोविड का आंकड़ा 10 लाख ऐक्टिव केसेज से सवा लाख से नीचे लाकर दिखा दिया था। यह जिस रणनीति पर चलते हुए संभव हुआ वह आज भी उतना ही सटीक है। तब संसाधन भी कम थे मगर आज संसाधन भी ज्यादा है और अनुभव भी ज्यादा है। इसलिए हम इस बार पीक को बहुत तेजी से नीचे ला सकते हैं। अनुभव कहता है कि टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, कोविड एप्रोप्रिएट बिहैवियर और कोविड मैनेजमेंट…इन्हीं चीजों पर हमें बल देना है।

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– पहले लोग हल्के-फुल्के लक्षणों से डर जाते थे इसलिए तुरंत ऐक्शन लेते थे। लेकिन इन दिनों बहुत मरीज एसिम्प्टोमैटिक हैं। उनको लगता है कि वैसे ही थोड़ा जुकाम हो गया है, ऐसा हो गया, वैसा हो गया। कभी-कभी तो वह भी नहीं होता है। वह पहले की तरह ही परिवार में जिंदगी जीते हैं जिससे पूरा परिवार चपेट में आ जाता है और इंटेंसिटी बढ़ती है तब ध्यान जाता है। आज परिवार के परिवार जो इसके लपेट में आ रहे हैं, उसका मूल कारण यह है कि शुरुआत एसिम्प्टोमैटिक से होती है और लापरवाही से होती है।

– इसका एक ही उपाय है प्रोऐक्टिव टेस्टिंग। हम जितना ज्यादा टेस्टिंग करेंगे, उतना ज्यादा एसिम्प्टोमैटिक केसेज भी सामने आ जाएंगे। इसीलिए हमें वैक्सीन से ज्यादा टेस्टिंग की चर्चा की जरूरत है। टेस्टिंग पर फोकस देने की जरूरत है।

– प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टेस्टिंग बढ़ने से संक्रमण के मामले जरूर बढ़ेंगे, लेकिन संख्या की वजह से होने वाली आलोचनाओं की परवाह न करें। उन्होंने कहा कि वह पहले भी यह बात कह चुके हैं।

– पीएम मोदी ने कहा कि स्वैब का सैंपल लेने में सावधानी बरतनी चाहिए। मुंह और नाक में अंदर से सैंपल लिया जाना चाहिए। सैंपलिंग सही से होनी चाहिए। आरटीपीसीआर टेस्ट को बढ़ाने की जरूरत है। हमारा टारगेट कुल टेस्ट का 70 प्रतिशत आरटीपीसीआर पर होना चाहिए।

– जहां तक ट्रैकिंग का प्रश्न है, प्रशासनिक स्तर पर हर कॉन्टैक्ट को ट्रेस करना बहुत जरूरी है। हमें हर संक्रमित के 30 कॉन्टैक्ट ट्रेस करने चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोरोना के खिलाफ जंग में सुस्ती नहीं आने देना है। जिन राज्यों में चुस्ती से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग हो रही है, वहां अच्छी सफलता मिल रही है।

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– बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों मे कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर के पीक को भी पार कर चुकी है। उन्होंने कहा कि केस बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि लोग अब लापरवाह हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए फिर से युद्धस्तर पर प्रयास करने की जरूरत है।

-मौत के मामले में काफी जांच की जरूरत है। किस स्टेज में बीमारी का पता चला, मरीज को कौन-कौन सी बीमारियां थीं जैसी जानकारियां इकट्ठा करनी चाहिए।

– ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जरूरत है।

– हम एक दिन में 40 लाख वैक्सीनेशन के आंकड़े को पार कर चुके हैं। दुनिया भर के समृद्ध से समृद्ध देश भी वैक्सीनेशन के लिए जो मापदंड तय किए हैं, भारत उससे अलग नहीं है। इसीलिए हमें प्राथमिकता समूह बनाकर ही वैक्सीनेशन करना होगा। वैक्सीन की बर्बादी को रोकना ही होगा।

– हमारा आप सभी से आग्रह है कि 45 साल से ऊपर के सभी लोगों के शत प्रतिशत टीकाकरण का प्रयास कीजिए।

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– 11 अप्रैल को ज्योतिबा फुले जी की जयंती है, 14 अप्रैल को अंबेडकर जी की जयंती है। 11 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच हमें टीका उत्सव मनाएं। इस दौरान वैक्सीन की बर्बादी शून्य हो। अधिक से अधिक वैक्सीनेशन हो। इससे वातावरण बदलने में काफी मदद मिलेगी। केंद्र सरकार पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन की सप्लाई सुनिश्चित करेंगे।

– मैं देश के युवाओं से भी आग्रह करूंगा कि वे आस-पास के 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगवाने का प्रयास करें। अगर मेरे देश का नौजवान नेतृत्व करेगा तो जरूर कामयाबी मिलेगी।

– शहरों में एक बहुत बड़ा वर्ग है जो गरीब है, झुग्गी-झोपड़ी में रहता है। युवाओं और वॉलंटियर्स को इन लोगों को टीका लगवाने की कोशिश करनी चाहिए।

– पीएम मोदी ने कहा कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी तनिक भी लापरवाही न हो। मास्क लगाने समेत सभी सावधानियों की पहले से भी ज्यादा जरूरत है।

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– पीएम मोदी ने कहा कि ज्यादातर केस एसिम्प्टोमैटिक हैं, इसलिए यह परिवारों में चुपके से फैल जा रहा है।

– मुझे इस कठिन समय में नेतृत्व का मौका मिला है। जिन्हें राजनीति करनी हो करें, कर भी रहे हैं। लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि हम इस जंग को जीतेंगे।

– जैसे हमने पिछली बार कोरोना को नियंत्रित किया था, वैसे ही इस बार भी कर लेंगे। फोकस टेस्टिंग पर होनी चाहिए। वैक्सीनेशन की प्रक्रिया लंबे वक्त के लिए है।

देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण बेकाबू होता दिख रहा है। अब रोजाना लाख, सवा लाख नए केस तक आने लगे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में एक दिन में कोविड-19 के 1,26,789 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही देश में संक्रमण के कुल मामले बढ़ कर 1,29,28,574 हो गए हैं जबकि वायरस से अब भी संक्रमित लोगों की संख्या (ऐक्टिव केस) फिर से 9 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। कोरोना ‘विस्फोट’ के मद्देनजर दिल्ली, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। यूपी में राजधानी लखनऊ, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद जैसे शहरों में नाइट कर्फ्यू लगाया है। महाराष्ट्र में तो वीकेंड लॉकडाउन समेत लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लागू की जा चुकी हैं।

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