Wednesday, January 27, 2021

SC Order on Kisan Andolan : कृषि कानून के अमल पर रोक के साथ चार सदस्यीय कमिटी को दो महीने की मोहलत, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों की कमिटी का गठन किया है जो दोनों पक्षों से बातचीत कर अपनी अनुशंसा के साथ रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। कोर्ट ने कमिटी से 10 दिनों के भीतर पहली मीटिंग करने को कहा है और दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा है। आइए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा है…

हम आदेश पारित करते हैं और तीनों कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगाते हैं। अगले आदेश तक कृषि कानून से पहले जिस स्थिति में एमएसपी थी, वैसी स्थिति में ही रहेगी। किसानों की जमीन का मालिकाना हक बना रहेगा। कृषि कानून के आधार पर किसानों की जमीन से उनका हक किसी भी तरह से नहीं लिया जा सकेगा। चार सदस्यों की कमिटी का गठन किया जाता है जिसमें भूपेंद्र सिंह मान (भारतीय किसान यूनियन के प्रेसिडेंट), अनिल घनवट (प्रेसिडेंट शेतकरी संगठन, महाराष्ट्र), प्रमोद कुमार जोशी (डायरेक्टर फॉर साउश एशिया, इंटरनैशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट) और अशोक गुलाटी (एग्रीकल्चर इकॉनमिस्ट) शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट में तीन तरह की अर्जी दाखिल की गई है। इनमें पहली कैटेगरी में कृषि कानून की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है। दूसरी तरह की अर्जी में वैधता को सही ठहराया गया और कानून को लाभकारी बताया गया है। तीसरी अर्जी में दिल्ली के लोगों ने प्रदर्शन के कारण उनके आने जाने के संवधानिक अधिकार के उल्लंघन का मामला उठाया है।

सुप्रीम कोर्ट

साथ ही कमिटी किसान संगठन के प्रतिनिधि और सरकार के प्रतिनिधियों का पक्ष सुनेंगे। किसानों की शिकायत सुनेंगे और अपनी अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट के सामने रिपोर्ट के तौर पर पेश करेंगे। कमिटी के गठन का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। कमिटी 10 दिनों में पहली बैठक करेगी और दो महीने में रिपोर्ट पेश करेगी। हम किसानों के प्रदर्शन को नहीं रोक रहे हैं लेकिन कोर्ट ने विशेष आदेश पारित किया है और कानून के अमल पर रोक लगाई है ताकि किसान संगठन अपने मेंबर को कह सकें कि वह आजीविका के लिए लौटें और अपने साथ-साथ दूसरे के जीवन को बचाने का प्रयास करें।

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सुप्रीम कोर्ट में तीन तरह की अर्जी दाखिल की गई है। इनमें पहली कैटेगरी में कृषि कानून की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है। दूसरी तरह की अर्जी में वैधता को सही ठहराया गया और कानून को लाभकारी बताया गया है। तीसरी अर्जी में दिल्ली के लोगों ने प्रदर्शन के कारण उनके आने जाने के संवधानिक अधिकार के उल्लंघन का मामला उठाया है। मामले में किसान संगठन की कई दौर की बातचीत सरकार से हुई है लेकिन नतीजा नहीं निकला है। मौके पर प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ बुजुर्ग, महिलाें और बच्चे भी बैठे हुए हैं। स्वास्थ्य बड़ी समस्या है। हिंसा और प्रदर्शन के कारण किसी की मौत नहीं हुई है लेकिन बीमार होने से कई मौत हुई है और आत्महत्या का भी मामला सामने आया है।

कानून के अमल पर हम इसलिए स्टे कर रहे हैं ताकि किसान बाततीच के लिए टेबल पर आएं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानून को कोर्ट स्टे नही कर सकता। कोर्ट के पास अधिकार है कि वह ऐसा कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट

सराहनीय तौर पर ये बात कही जा सकती है कि प्रदर्शन अहिंसक है। प्रदर्शन के बीच में कुछ गड़बड़ी की आशंका भी जताई गई है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। एक अर्जी में ये भी कहा गया है कि कई बैन संगठन के लोग घुस गए हैं। जिनमें सिख फॉर जस्टिस भी शामिल है जो देशविरोधी आंदोलन के कारण बैन है। अटॉर्नी जनरल ने भी इस बात की पुष्टि की है। अटॉर्नी जनरल ने बताया कि किसानों ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली निकालने और गणतंत्र दिवस परेड को डिस्टर्ब करने की बात कही है। हालांकि कुछ किसान संगठन के वकील दुष्यंत दवे ने इस बात को खारिज किया था और कहा था कि किसान ऐसा नहीं करेंगे। हालांकि, मंगलवार को सुनवाई के दौरान दवे पेश नहीं हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी तक की बातचीत बेनतीजा रही है इसिलए एक्सपर्ट कमिटी का गठन करने जा रहे हैं जो किसान संगठनों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का माहौल तैयार करेगी और अपनी अनुशंसा पेश करेगी। कानून के अमल पर हम इसलिए स्टे कर रहे हैं ताकि किसान बाततीच के लिए टेबल पर आएं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानून को कोर्ट स्टे नही कर सकता। कोर्ट के पास अधिकार है कि वह ऐसा कर सकता है। एमएसपी के बारे में आशंका जाहिर की गई थी तब सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि एमएसपी बना हुआ है और किसानों की जमीन सुरक्षित है।

Supreme-Court

सुप्रीम कोर्ट।



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