Wednesday, January 20, 2021

अनोखा मंदिर! दर्शन मात्र से इंसान को मिलता है मोक्ष, दूर दूर से आते है लोग

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आत्मा तब तक एक शरीर से दूसरे शरीर में भटकती रहती है जब तक कि मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो जाती।
कई व्यक्ति समझते हैं मोक्ष मरने के बाद, शरीर रूपी बंधन के छूटने के बाद ही मिलता है।

शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, मनुष्य को समय समय पर भगवान की पाठ पूजा और श्रद्धा अनुसार दान देना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि मारने के बाद इंसान के साथ केवल उनके कर्म ही जाते है। यदि आप अच्छे कर्म करते है आगे आपका मार्ग अच्छा मिलेगा। जो लोग बुरे कर्म करते है उनके कई प्रकार की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। इसलिए बहुत से लोग सभी मंदिरों में जाते है और खूब दान पुण्य करते है। ऐसा करने से मरने के बाद उनकी आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में भटकती नहीं है। उसको मोक्ष मिल जाता है।

दर्शन मात्र से मिलता है मोश
कई व्यक्ति समझते हैं मोक्ष मरने के बाद, शरीर रूपी बंधन के छूटने के बाद ही मिलता है। इसके लिए वे दान-पुण्यादि अनेकों कार्य करते हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक मंदिर ऎसा भी है जहां दर्शन और पूजा करने से बुढ़ापे और मृत्यु का डर दूर हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन करने बाद व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त होता है। यह मंदिर श्री अविमुक्तेश्वर सिंहपुरी क्षेत्र में स्थित है और मृत्यु के भय को दूर करने के लिए लोग दूर दूर से आते है। ऎसी मान्यता है कि अविमुक्तेश्वर के दर्शन करने से व्यक्ति वृद्धावस्था और मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है।

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प्रचलन लोककथा
एक लोककथा भी प्रचलन में है। शाकल नाम के नगर में चित्रसेन नामक राजा रहते थे। उनकी रानी का नाम चन्द्रप्रभा था। राजा और रानी दोनों रूपवान थे। उनकी एक बेटी हुई वो भी अत्यंत सुंदर थी। राजा ने उसका नाम लावण्यावती रखा। खास बात थी कि लावण्यावती को पूर्व जन्म की बातें याद थीं। युवा हुई तो राजा ने उसे बुलाया और पूछा कि वो किससे विवाह करना चाहेगी। यह सुनकर लावण्यावती कभी रोती तो कभी हंसने लगती। राजा ने उसका कारण पूछा तो उसने बताया कि पूर्व जन्म में वो प्राग्ज्योतिषपुर में हरस्वामी की पत्नी थी। रूपवान होने के बाद भी उसका पति ब्रह्मचर्य का पालन करते थे और उससे क्रोधित रहते थे।

पिप्लादेश्वर के किए दर्शन
एक बार वो अपने पिता के घर गई और उन्हें पूरी बात बताई। उसके पिता ने उसे अभिमंत्रित वस्तुएं और मंत्र दिए, जिससे उसका पति उसके वश में हो गया। पति के साथ सुखी जीवन जीने के बाद उसकी मृत्यु हो गई और वो नरक को प्राप्त हुई। यहां तरह-तरह की यातनाएं भोगने के बाद पापों का कुछ नाश करने के लिए उसका जन्म एक चांडाल के घर हुआ। यहां सुंदर रूप पाने के बाद उसके शरीर पर फोडे हो गए और जानवर उसे काटने लगे। उनसे बचने के लिए वो भागी और महाकाल वन पहुंच गई। यहां उसने भगवान शिव और पिप्लादेश्वर के दर्शन किए। दर्शन के कारण उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई।






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