Friday, March 5, 2021

त्रयोदशी तिथि पर गुरु-पुष्य संयोग: 25 फरवरी 2021 को 6 घंटे 22 मिनट तक रहेगा विशेष समय

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इस दिन पंचांग के पांचों अंग तिथि, वार, योग, नक्षत्र, करण सभी शुद्ध हैं…

भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए त्रयोदशी तिथि को अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं इन दिनों चल रहे माघ माह को भी सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। ऐसे में यह माह पवित्र नदियों में स्नानादि करने और व्रत-जप, संकल्प, दान आदि करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस समय भी माघ स्नान बहुत से लोग कर रहे हैं।

ऐसे में इस बार 2021 में माघ माह में गुरु-पुष्य का शुभ संयोग आना अत्यंत शुभ फलप्रद दिन है। 25 फरवरी 2021 को गुरु-पुष्य का संयोग त्रयोदशी तिथि पर बन रहा है, त्रयोदशी तिथि 24 फरवरी 2021 से शुरु हो जाएगी। वहीं 25 फरवरी को ही त्रयोदशी के बाद चतुर्दशी लग जाएगी। इस दिन प्रात: 6.56 बजे से दोपहर 1.18 बजे तक गुरु-पुष्य का पर्वकाल रहेगा। यह एक तरह से अबूझ मुहूर्त भी कहा जा सकता है।

यदि आप कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं, भूमि, संपत्ति, स्वर्णाभूषण आदि खरीदना चाहते हैं तो इस दिन से श्रेष्ठ और कोई दिन नहीं। इस दिन पंचांग के पांचों अंग तिथि, वार, योग, नक्षत्र, करण सभी शुद्ध हैं। इस दिन स्वराशि कर्क का चंद्र और कुंभ का सूर्य भी इस दिन को सर्वश्रेष्ठ बना रहे हैं। योग शोभन और करण तैतिल है।

प्रदोष व्रत 24 फरवरी को…
त्रयोदशी तिथि को प्रदोष का व्रत (Pradosh Vrat) रखा जाता है और जब ये व्रत बुधवार यानि 24 फरवरी 2021 के दिन पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष के नाम से जाना जाता है। ऐसे में माघ महीने की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि बुधवार 24 फरवरी को है और इसलिए इस दिन बुध प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।

प्रदोष का व्रत भगवान शिव (Lord Shiv) को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, संकट से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-शांति आती है। साथ ही लंबी आयु, संतान की प्राप्ति, कर्ज से मुक्ति आदि पाने के लिए प्रदोष व्रत किया जाता है।

प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त: माघ, शुक्ल त्रयोदशी…
त्रयोदशी तिथि शुरु : 24 फरवरी बुधवार शाम 06:05 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्ति : 25 फरवरी गुरुवार शाम 05:18 बजे तक

इस दिन चंद्रमा अपनी ही राशि कर्क में रहेगा, इससे भी दिन की शुभता और बढ़ जाएगी। गुरुवार भगवान विष्णु का दिन है और इस दिन पुष्य नक्षत्र होना बेहद शुभ माना जाता है। विशेष कर खरीददारी के लिए इस दिन को काफी मंगलकारी माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्र (Jyotish) की मानें तो गुरु पुष्य योग के दिन जमीन, घर, वाहन, सोने-चांदी के आभूषण आदि खरीदने पर शुभ फल प्राप्त होता है, साथ ही इस दिन कोई नया कारोबार भी शुरू कर सकते हैं। इस दिन घर में इस्तेमाल होने वाली चीजें खरीदना भी शुभ फलकारी माना जाता है।

प्रदोष व्रत के नियम-
1. प्रदोष व्रत करने के लिए व्रती को त्रयोदशी के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए।
2. नहाकर भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
3. इस व्रत में भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
4. गुस्सा या विवाद से बचकर रहना चाहिए।
5. प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
6. इस दिन सूर्यास्त से एक घंटा पहले नहाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
7. प्रदोष व्रत की पूजा में कुशा के आसन का प्रयोग करना चाहिए।

माघ माह में क्या करें?
: गुरु-पुष्य के दिन किया गया कार्य स्थायी होता है। इसलिए शुभ कार्य करने, खरीदी करने के लिए यह दिन सर्वोत्तम होता है।
: इस दिन भूमि, भवन, संपत्ति, वाहन, स्वर्ण, चांदी, हीरे, जवाहरात, आभूषण आदि खरीदने से उनमें कभी कमी नहीं होती, वह बढ़ता जाता है।
: गुरु-पुष्य नक्षत्र के दिन नया व्यापार-व्यवसाय प्रारंभ करना, नई नौकरी प्रारंभ करना आदि करना शुभ रहता है।
: यदि आवश्यक हो और कोई शुभ मुहूर्त न हो तो गुरु-पुष्य में सगाई, विवाह आदि मांगलिक कार्य भी करने के निर्देश शास्त्रों में मिलते हैं।
: नवरत्न धारण करने के लिए गुरु-पुष्य का संयोग उत्तम होता है। इस दिन किसी भी ग्रह का रत्न धारण किया जा सकता है।

: जिन युवक-युवतियों के विवाह में बाधा आ रही है, वे गुरु-पुष्य के दिन केले के पेड़ की जड़ को निकालकर उसे गंगाजल से धोकर हल्दी में लपेटकर पीले कपड़े में बांधकर अपने पास रखें तो विवाह की बाधा दूर होती है।
: जन्मकुंडली में बृहस्पति बुरे प्रभाव दे रहा हो तो इस दिन सवा किलो चने की दाल में सवा सौ ग्राम हल्दी की गांठ रखकर विष्णु भगवान के मंदिर में दान करें।
: इस दिन गुरु का रत्न पुखराज धारण करने से बृहस्पति से जुड़े अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
: गुरु पुष्य के दिन स्वर्ण का जल तुलसी में अर्पित करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। तुलसी का पौधा भी हरा-भरा हो जाता है।

— सुख-सौभाग्य के लिए- सुख-संपत्ति की कामना के लिए जिस त्रयोदशी के दिन शुक्रवार पड़े, उस दिन से प्रदोष व्रत प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।

– लंबी आयु के लिए- लंबी आयु की कामना के लिए जिस त्रयोदशी के दिन रविवार पड़े, उस दिन से प्रदोष व्रत प्रारंभ करना उत्तम माना जाता है।

– संतान सुख के लिए- संतान प्राप्ति की कामना करने वालों को प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की जिस त्रयोदशी को शनिवार पड़े, उस दिन से व्रत प्रारंभ करना चाहिए।

– कर्ज से मुक्ति के लिए- कर्ज मुक्ति के लिए जिस त्रयोदशी के दिन सोमवार पड़े, उस दिन से प्रदोष व्रत प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि प्रदोष व्रत को सबसे पहले चंद्रदेव ने किया था। जिसके फल के प्रभाव से चंद्रमा को क्षय रोग से मुक्ति मिल गई थी। कहा जाता है कि त्रयोदशी के दिन किया जाने वाला व्रत सौ गायों के दान के बराबर पुण्य प्रदान करता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू किया जा सकता है लेकिन कामना विशेष के लिए इस व्रत को प्रारंभ करने के कुछ तिथियां उत्तम मानी जाती हैं।












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