Saturday, April 17, 2021

रुद्राक्ष एक चमत्कारी फल : जानें इसके प्रकार और महत्व

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रुद्राक्ष को भगवान शंकर से जुड़ा हुआ मानने के चलते इसे हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। वहीं हिंदू धर्म में रुद्राक्ष की पूजा भी की जाती हैं। रुद्राक्ष को लेकर यह भी मान्यता है कि रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

जानकारों की मानें तो रुद्राक्ष का लाभ अदभुत और अचूक होता है, परन्तु यह तभी सम्भव है जब सोच समझकर नियमों का पालन करके रुद्राक्ष धारण किया जाए। वास्तव में रुद्राक्ष कई प्रकार के होते हैं और हर तरह के रुद्राक्ष का अपना एक खास महत्व होता है। रुद्राक्ष एक फल की गुठली है। इसका उपयोग मुख्य रूप से आध्यात्मिक क्षेत्र में किया जाता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शिवपुराण में 14 प्रकार के रुद्राक्ष का उल्लेख किया गया है। इनमें एक मुखी रुद्राक्ष से लेकर 14 मुखी रुद्राक्ष होते हैं, वहीं इनके अलावा दो और प्रकार के रुद्राक्ष भी माने गए हैं, जो गौरी शंकर रुद्राक्ष व गणेश रुद्राक्ष हैं। उनके अनुसार हर प्रकार के रुद्राक्ष को शरीर पर धारण करने का अलग अलग मतलब होता है।

रुद्राक्ष की उत्पत्ति
जानकारों के अनुसार पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने एक बार कई वर्षों तक तपस्या की, इस दौरान किन्हीं कारणोंवश जब उन्होंने अपनी आंखें खोली तो उनकी आंखों से जो आंसू निकले और इन्हीं आंसुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। यही कारण है कि हिंदू धर्म में रुद्राक्ष की पूजा की जाती है।

रुद्राक्ष धारण करने के नियम?
– रुद्राक्ष को कलाई , कंठ और ह्रदय पर धारण किया जाता है, वहीं इसे कंठ प्रदेश तक धारण करना सबसे उचित माना गया है।

– रुद्राक्ष का एक दाना धारण करने पर यह दाना ह्रदय तक होना चाहिए।

– जबकि कलाई में बारह,कंठ में छत्तीस और ह्रदय पर एक सौ आठ दानों को धारण करना चाहिए।

– रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम दिन सावन में, सोमवार को या शिवरात्रि का दिन माना जाता है।

– रुद्राक्ष को शिव जी को समर्पित करने के बाद धारण करना चाहिए और उसी माला या रुद्राक्ष पर मंत्र जाप करना चाहिए।

– रुद्राक्ष धारण करने वालों को सात्विक रहने के अलावा आचरण को शुद्ध रखना चाहिए।

ऐसे समझें रुद्राक्ष के प्रकार व उनका महत्व…

1. एक मुखी रुद्राक्ष : शोहरत, पैसा, सफलता पाने और ध्‍यान करने के लिए लाभकारी है। इसके अलावा एक मुखी रुद्राक्ष ब्‍लडप्रेशर और दिल से संबंधित रोगों से भी बचाता है। यह सूर्य ग्रह से संबंधित माना गया है।

मंत्र : ऊं ह्रीं नम:।।

जानकारों के अनुसार पूरे ब्रह्मांड की कल्‍याणकारी वस्‍तुओं में एकमुखी रुद्राक्ष का नाम सर्वप्रथम आता है। ये रुद्राक्ष गंभीर पापों से मुक्‍ति दिलाता है। इसके प्रभाव में मनुष्‍य अपनी इंद्रियों को वश में कर ब्रह्म ज्ञान की प्राप्‍ति की ओर अग्रसर होता है।धन प्राप्‍ति में भी एकमुखी रुद्राक्ष फायदेमंद साबित होता है।

2. दो मुखी रुद्राक्ष : आत्‍मविश्‍वास और मन की शांति की प्राप्‍ति के लिए और सर्दी-जुकाम, तनाव और स्‍नायु तंत्र के विकार और अच्‍छी नींद के लिए इसे विशेष माना गया है। यह चंद्रमा ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं नम:।।

माना जाता है कि दो मुखी रुद्राक्ष में साक्षात् शिव और पार्वती बसते हैं। इसे धारण करने के बाद आप अपनी सारी समस्‍याएं ईश्‍वर पर छोड़ दें, वही आपके बिगड़े काम संवारेंगें। दांपत्‍य जीवन को सुखी बनाने के लिए दो मुखी रुद्राक्ष अत्‍यंत लाभकारी है।

3. तीन मुखी रुद्राक्ष : इसका महत्व मन की शुद्धि और स्‍वस्‍थ जीवन के लिए माना जाता है। यह मंगल ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं क्‍लीं नम:।।

तीन मुखी रुद्राक्ष को अग्‍नि देव का स्‍वरूप कहा गया है। जिस प्रकार अग्‍नि के संपर्क में आने से स्‍वर्ण भी शुद्ध हो जाता है ठीक उसी प्रकार तीन मुखी रुद्राक्ष भी धारणकर्ता के शरीर को शुद्ध करता है।

4. चार मुखी रुद्राक्ष : मानसिक क्षमता, एकाग्रता और रचनात्‍मकता के लिए इसका खास महत्व माना गया है। यह बुध ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं ह्रीं नम:।।

जानकारों के अनुसार चार मुखी रुद्राक्ष के प्रभाव से ज्ञान और संतान प्राप्‍ति के मार्ग में आ रही समस्‍याएं दूर होती हैं। ये एकाग्रता बढ़ाता है एवं वैज्ञानिक अध्‍ययन और धार्मिक ग्रंथों के अध्‍ययन में चार मुखी रुद्राक्ष काफी फायदेमंद साबित होता है।

5. पांच या पंचमुखी रुद्राक्ष : इसे ध्‍यान और आध्‍यात्‍मिक कार्यों के लिए उत्तम माने जाने के साथ ही रक्‍तचाप, एसिडिटी और ह्रदय संबंधी रोगों के लिए खास माना गया है। यह ब्रहस्पति यानि गुरु ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं ह्रीं नम:।।

मान्यता है कि पांच मुखी रुद्राक्ष पर पंच देवों की कृपा बरसती है जिस कारण यह पंच तत्‍वों से निर्मित दोषों का नाश करता है। पांच मुखी रुद्राक्ष मानसिक शांति प्रदान कर मन के रोगों को दूर करता है। गृहस्‍थ जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

6. छह मुखी रुद्राक्ष : इसे ज्ञान, बुद्धि, संचार कौशल और आत्‍मविश्‍वास के लिए खास माना जाता है। यह शुक्र ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं ह्रीं हूं नम:।।

माना जाता है कि इसके प्रभाव से बुद्धि तेज होती है और ज्ञान की प्राप्‍ति होती है।छह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ब्रह्महत्‍या जैसे जघन्‍य पाप से मुक्‍ति मिलती है। जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में प्रेम की कमी है या अलगाव की स्थिति है तो उन्‍हें छह मुखी रुद्राक्ष से अवश्‍य ही लाभ होगा।

7. सात मुखी रुद्राक्ष : इसे आर्थिक और कॅरियर में विकास के साथ ही हड्डियों और नसों व गर्दन दर्द से मुक्‍ति पाने के लिए विशेष महत्व वाला माना गया है। यह शनि ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं हूं नम:।।

मान्यता के अनुसार सात मुखी रुद्राक्ष चोरी के आरोप से मुक्‍त करता है। नौकरी और व्‍यापार में सफलता पाना चाहते हैं तो सात मुखी रुद्राक्ष से आपको लाभ होगा और भाग्‍योदय होगा। सात मुखी रुद्राक्ष के प्रभाव में धन का आगमन होता है।

8. आठ मुखी रुद्राक्ष : इसका उपयोग कॅरियर में आ रही बाधाओं और मुसीबतों को दूर करने के अलावा कमर दर्द, शरीर में दर्द और किडनी और लिवर संबंधी समस्‍याओं के लिए किया जाता है। यह राहु ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं हूं नम:।।

माना जाता है कि आठ मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से भय और अकाल मृत्‍यु का डर समाप्‍त हो जाता है।ऐसा माना जाता है कि आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला व्‍यक्‍ति मृत्‍यु के पश्‍चात् भगवान शंकर के गणों में शामिल होता है। आठ मुखी रुद्राक्ष बुद्धि, ज्ञान, धन, यश और उच्च पद की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होता है।

9. नौ मुखी रुद्राक्ष : इसका महत्व मुख्य रूप से ऊर्जा, शक्‍ति, साहस और निडरता पाने के अलावा पेट और त्‍वचा संबंधित समस्‍याओं से छुटकारा पाने के लिए माना गया है। ये केतु ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं ह्रीं हूं नम:।।

जानकारों के अनुसार नौ मुखी रुद्राक्ष से धन सम्पत्ति, मान-सम्मान, यश, कीर्ति और सभी प्रकार के सुखों की वृद्धि होती है। नौ मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से आंखों की दृष्टि तेज होती है। ये मनुष्‍य को मानसिक और भौतिक दुखों से बचाता है।

10. दस मुखी रुद्राक्ष : इसका महत्व मुख्य रूप से नकारात्‍मक शक्‍तियों और नज़र दोष से बचाने व वास्‍तु और कानूनी मामलों से रक्षा करने के लिए माना जाता है। इसके अलावा यह इंसोमनिया से बचाव के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

मंत्र : ऊं ह्रीं नम:।।

दस मुखी रुद्राक्ष भूत-प्रेत, डाकिनी और पिशाचिनी जैसी बुरी शक्‍तियों से बचाता है। दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दमा, गठिया, पेट और नेत्र संबंधी रोग दूर होते हैं। यह रुद्राक्ष ग्रह दोष को भी दूर करता है।

11. ग्‍यारह मुखी रुद्राक्ष : इसे आत्‍मविश्‍वास में बढ़ोत्तरी, निर्णय लेने की क्षमता, क्रोध नियंत्रण और यात्रा के दौरान नकारात्‍मक ऊर्जा से सुरक्षा पाने के लिए धारण किया जाता है। वहीं ये भी माना जाता है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखता है। यह मंगल ग्रह से संबंधित माना गया है।

मंत्र : ऊं ह्रीं हूं नम:।।

माना जाता है कि ग्‍यारह मुखी रुद्राक्ष से आय के स्रोत खुलते हैं और व्‍यापार में वृद्धि होती है और नए अवसर प्राप्‍त होते हैं। रोग से मुक्‍ति मिलती है। ग्‍यारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्‍यक्‍ति को राजनीति, कूटनीति और हर क्षेत्र में विजय हासिल होती है। संतान प्राप्‍ति की इच्‍छा रखते हैं या पति की तबियत खराब रहती है तो ग्‍यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

12. बारह मुखी रुद्राक्ष : इसे ह्रदय संबंधित परेशानियों में लाभकारी माने जाने के साथ ही नाम, शोहरत, सफलता प्राप्‍त की मनोकामना से भी पहना जाता है। इसे धारण करने का महत्व प्रशासनिक कौशल और नेतृत्‍व करने के गुणों का विकास के लिए भी माना गया है। यह सूर्य ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं रों शों नम: ऊं नम:।।

जानकारों के अनुसार राजनीति या सरकारी क्षेत्रों में काम कर रहे जातकों को बारह मुखी रुद्राक्ष से लाभ मिलता है।बारह मुखी रुद्राक्ष असाध्‍य और भयानक रोगों से मुक्‍ति दिलाता है। ह्रदय रोग, उदर रोग व मस्तिष्क से सम्बन्धित रोगों में बारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से लाभ होता है।

13. तेरह मुखी रुद्राक्ष : इस रुद्राक्ष का महत्व आर्थिक स्थिति को मजबूत कर आपके आकर्षण और तेज में वृद्धि करने के अलावा मधुमेह और यौन रोगों से निजाद दिलाने में माना जाता है। यह शुक्र ग्रह से संबंधित है।

मंत्र : ऊं ह्रीं नम:।।

जानकारों की मानें तो तेरह मुखी रुद्राक्ष वैवाहिक जीवन के लिए अति उत्‍तम होता है। तेरह मुखी रुद्राक्ष निसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्‍ति का आशीर्वाद प्रदान करता है। तेरह मुखी रुद्राक्ष वशीकरण का सकारात्‍मक तरीका है। इस रुद्राक्ष से प्रेम सुख मिलता है।

14. चौदह मुखी रुद्राक्ष : इसका महत्व छठी इंद्रीय जागृत के सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान में माना गया है। यह शनि ग्रह से संंबंधित है।

मंत्र : ऊं नम:।।

माना जाता है कि चौदह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्‍यक्‍ति को कभी भी जेल जाना नहीं पड़ता। भगवान शिव भी चौदह मुखी रुद्राक्ष ही धारण करते हैं इसलिए इस रुद्राक्ष का अत्‍यंत महत्‍व है।चौदह मुखी रुद्राक्ष पक्षाघात की चिकित्सा के लिए अत्यंत हितकारक है।

15. गणेश रुद्राक्ष : इसका महत्व ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि में माना गया है।

मंत्र : ऊं श्री गणेशाय नम:।।

मान्यता के अनुसार गणेश रूद्राक्ष पहने हुए एक व्यक्ति को जीवन के सभी क्षेत्रों में से सफलता प्राप्त होती है। गणेश रुद्राक्ष को धारण करने से सभी तरह के क्‍लेशों से मुक्‍ति मिलती है। गणेश रुद्राक्ष को धारण करने से केतु के अशुभ प्रभावों से भी मुक्‍ति मिलती है।

16. गौरी शंकर रुद्राक्ष : परिवार में सुख-शांति आने और मानसिक शांति का अनुभव कराने में इसका महत्व माना गया है। यह चंद्रमा से संबंधित माना जाता है।

मंत्र : ऊं गौरी शंकराय नम:।।

पंडितों व जानकारों के अनुसार गृहस्‍थ सुख के लिए गौरी शंकर रुद्राक्ष अति शुभ माना जाता है। जिन स्त्रियों को गर्भ से सम्बंधित कोई समस्या हो उनके लिए भी यह लाभकारी हो सकता है। जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही हो या कोई बाधा आ रही है, तो उन्‍हें गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करने से फायदा पहुंचता है।



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