Saturday, May 15, 2021

कच्चे तेलों की कीमतों में कटौती: सउदी अरबिया एशियाई देशों के लिए जून में कीमतें कम कर सकता है, तेल की मांग न होने का असर

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मुंबई11 मिनट पहले

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कच्चे तेलों की कीमतों में अगर गिरावट आती है तो भारत में भी तेलों की कीमतें घटाने का अवसर होगा। हालांकि हाल के समय में तेलों के सस्ते होने के बाद भी भारत में तेल की कीमतें ऊपर ही रही हैं

  • कोरोना की दूसरी लहर से भारत में अप्रैल पेट्रोल और डीजल की मांग घटने लगी थी
  • कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भी भारत में कीमतें काफी कम घटती हैं

कच्चे तेलों के निर्यात का प्रमुख देश सउदी अरबिया को उम्मीद है कि वह जून में कच्चे तेलों की कीमतें कम कर सकता है। यह कमी एशियाई देशों के लिए होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर के बाद तेलों की मांग पर असर दिख रहा है।

जून में ओएसपी में कटौती हो सकती है

सूत्रों के मुताबिक, सउदी अरबिया जून में अपने ऑफिशियल सेलिंग प्राइस (ओएसपी) में कटौती कर सकता है। रॉयटर्स के एक सर्वे में पता चला है कि जून महीने में इस पर फैसला लिया जा सकता है। पांच एशियन रिफाइनरी के बारे में अनुमान है कि इसमें औसतन 28 सेंट्स प्रति बैरल की कमी की जा सकती है। पिछले साल दिसंबर के बाद यह पहला मौका होगा, जब तेल उत्पाद देश कीमतें कम करेंगे।

अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में घटी तेल की मांग

अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे पखवाड़े के बाद से तेलों की मांग घट गई है। 24 फरवरी के बाद इस दौरान सबसे कम तेल की मांग रही है। सर्वे में शामिल जवाब देने वाले दो (respondents) ने कहा कि भारत में कोविड संक्रमण में आई तेजी ने स्थानीय ईंधन (local fuel) की मांग को प्रभावित किया है। मार्केट सेंटिमेंट को ठेस पहुंचाई है। इससे रिफाइनरीज को स्पॉट मार्केट में कच्चे तेल की धीमी खरीद की ओर धकेल दिया है। उनमें से एक ने कहा कि सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि मई के पहले सप्ताह की बिक्री किस तरह होगी। इसके आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा।

अप्रैल में कोरोना के मामलों में तेजी आई

शुरुआती आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल में, कोरोनावायरस संक्रमणों की तेजी से फैल रही दूसरी लहर को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंध से भारत में ईंधन की खपत में गिरावट आई है। सऊदी क्रूड OSPs आमतौर पर प्रत्येक महीने की पाँचवीं तारीख के आसपास जारी किए जाते हैं। इससे ईरानी, ​​कुवैती और इराकी कीमतों के लिए रुझान निर्धारित होती है। इससे एशिया के लिए प्रतिदिन 1.2 करोड़ बैरल से अधिक क्रूड (बीपीडी) प्रभावित होता है।

तेल कंपनी सऊदी अरामको ग्राहकों की सिफारिशों के आधार पर प्रोडक्शन और उत्पाद की कीमतों के आधार पर अपने कच्चे तेल की कीमतें सेट करती है।

भारत में भी तेलों की कीमतें घट सकती हैं

कच्चे तेलों की कीमतों में अगर गिरावट आती है तो भारत में भी तेलों की कीमतें घटाने का अवसर होगा। हालांकि हाल के समय में तेलों के सस्ते होने के बाद भी भारत में तेल की कीमतें ऊपर ही रही हैं। अप्रैल की तरह अगर मई और जून में तेलों की मांग गिरती है तो फिर कीमतों को घटाने पर दबाव बन सकता है। करीबन 18 दिन बाद भारत में मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई गई हैं। 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की वजह से इन्हें रोका गया था।

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