Saturday, December 5, 2020

महंगाई की मार: आलू-प्याज के बाद अब खाने के तेल की कीमतें बढ़ीं, 6 महीने में 53% महंगा हुआ क्रूड पाम ऑयल

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नई दिल्ली9 मिनट पहले

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भारत में आयात होने वाले खाने के तेलों में पाम तेल की हिस्सेदारी दो तिहाई है।

  • मलेशिया में पाम तेल के उत्पादन में कमी से भी बढ़ी कीमत
  • भारत हर साल करीब 90 लाख टन पाम तेल का आयात करता है

आलू और प्याज के बाद अब खाने के तेल में भी महंगाई का जबरदस्त तड़का लगा है। तमाम खाद्य तेल और तिलहन के दाम में जोरदार उछाल आया है। निकट भविष्य में भी खाने के तेल की महंगाई से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मलेशिया में पाम तेल के उत्पादन में कमी के चलते घरेलू वायदा बाजार में क्रूड पाम तेल (CPO) के भाव में बीते छह महीने में 53% की तेजी आई है। सोयाबीन और सरसों में भी लगातार तेजी देखी जा रही है।

महंगे आयात से और कीमत बढ़ने की संभावना

तेल-तिलहन बाजार के जानकार बताते हैं कि भारत में इस समय सरसों, सोया तेल और पाम तेल का भाव सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर है। विदेशों से आयात महंगा होने से आने वाले दिनों में कीमतों में और तेजी की संभावना बनी हुई है। बाजार सूत्रों के अनुसार, देशभर में कच्ची घानी सरसों का थोक भाव गुरुवार को 1,155 रुपए प्रति 10 किलो था, जबकि सोया तेल का थोक भाव 995-1010 रुपए प्रति 10 किलो और पाम तेल (RBD) का भाव 935 से 945 रुपए प्रति 10 किलो था। वहीं, सूर्यमुखी तेल का थोक भाव 1,180 रुपए से 1,220 रुपए प्रति 10 किलो था।

सरसों और सोयाबीन की तेजी भी बढ़ाएगी कीमत

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर गुरुवार को CPO का भाव बीते सत्र से करीब 2% की तेजी के साथ 869.70 रुपए 10 प्रति किलो तक उछला। सात मई 2020 को CPO का अनुबंध 567.30 रुपए प्रति 10 किलो तक टूटा था। इस प्रकार, बीते छह महीने में CPO के दाम में 53% से ज्यादा की तेजी आई है। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि मलेशिया में पाम तेल के उत्पादन में गिरावट आने से कीमतों में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि क्रूड पाम तेल के साथ-साथ देश में सरसों और सोयाबीन की कीमतों तेजी को देखते हुए आने वाले दिनों में खाने के तेलों की कीमतों में और तेजी की संभावना बनी हुई है। खाद्य तेल उद्योग के जानकार बताते हैं कि ऑयल कॉम्प्लेक्स में सबसे सस्ता पाम तेल है जिसके दाम में बढ़ोतरी का असर खाने के तमाम तेलों पर पड़ता है।

ब्राजील में सोयाबीन का स्टॉक समाप्त हुआ

उधर, वैश्विक बाजार में सोयाबीन और सोया तेल के दाम में भी जबरदस्त उछाल आया है। तेल बाजार के जानकारी सलिल जैन बताते हैं कि ब्राजील में सोयाबीन का स्टॉक तकरीबन समाप्त हो गया है। इससे चीन की मांग अमेरिका की तरफ शिफ्ट हो गई है। लिहाजा, शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (सीबोट) पर सोयाबीन और सोया तेल में तेजी देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि सीबोट पर सोयाबीन का भाव चार साल के ऊंचे स्तर पर चला गया है।

चालू रबी सीजन में सरसों की बिजाई बढ़ेगी

सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (COOIT) के अध्यक्ष लक्ष्मीचंद अग्रवाल का कहना है कि पाम तेल और सोया तेल समेत अन्य खाद्य तेलों के दाम में वृद्धि का असर सरसों तेल पर भी पड़ा है। जबकि बीते सीजन में सरसों की फसल कम रहने से भी कीमतों को सपोर्ट मिला है। उन्होंने कहा कि दाम में तेजी से चालू रबी सीजन में सरसों की बिजाई में किसानों की दिलचस्पी बढ़ेगी। देश में कृषि उत्पादों के सबसे बड़े वायदा बाजार नेशनल कमोडिटी एंड डेरेवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर गुरुवार को सरसों के नवंबर अनुबंध का भाव 6,348 रुपए प्रति क्विंटल तक उछला। वहीं, NCDEX पर सोयाबीन के नवंबर अनुबंध का भाव 4339 रुपए प्रति क्विंटल तक चढ़ा।

खाने समेत कई जगहों पर इस्तेमाल होता है पाम तेल

पाम तेल एक वनस्पति तेल है। होटल, रेस्त्रां में पाम तेल का प्रयोग खाद्य तेल की तरह होता है। इसके अलावा कई इंडस्ट्री में भी पाम तेल का इस्तेमाल होता है। नहाने का साबुन बनाने में भी पाम तेल प्रयोग होता है। मौजूदा समय में दुनियाभर में करीब 8 करोड़ टन पाम तेल पैदा होता है। पाम तेल उत्पादन में इंडोनेशिया पहले और मलेशिया दूसरे नंबर पर है। भारत में आयात होने वाले खाने के तेलों में पाम तेल की हिस्सेदारी दो तिहाई है। भारत हर साल करीब 90 लाख टन पाम तेल का आयात करता है।



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