Friday, March 5, 2021

वसीम जाफर विवाद पर इकबाल अब्दुल्ला का दावा, टीम मैनेजर ने दी थी मौलवी को बुलाने की अनुमति

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नई दिल्ली
उत्तराखंड क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने अपने ऊपर लगे धार्मिक आधार पर टीम के चयन के आरोपों का सामना कर रहे स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी मौलवी को नहीं बुलाया और न ही किसी को धार्मिक नारे लगाने से रोका। साथ ही उन्होंने बताया कि मौलवी को टीम के सदस्य इकबाल अब्दुलला ने बुलाया था। अब इस बारे में इकबाल का बयान आया है।

उन्होंने जुमे की नमाज के लिए मौलवी को बुलाने की बात स्वीकार की। साथ ही उन्होंने कहा कि टीम मैनेजर की अनुमति के बाद ऐसा किया गया। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, ‘हम जुमे की नमाज बिना मौलवी के नहीं कर सकते हैं। इसके बारे में वसीम भाई (वसीम जाफर) से पूछा था तो उन्होंने कहा कि इस बारे में टीम मैनेजर से अनुमति लो। मैंने टीम मैनेजर नवनीत मिश्रा से पूछा तो उन्होंने कहा- कोई बात नहीं है इकबाल, धर्म महत्वपूर्ण है।’

वसीम के सपॉर्ट में उतरे इकबाल
उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा- मैंने टीम मैनेजर की अनुमति मिलने के बाद ही मौलवी को बुलाया था। अगर बायो बबल ब्रेक होता है तो मैनेजर को अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। वसीम जाफर के बारे में बात करते हुए अंडर-19 वर्ल्ड कप की टीम का हिस्सा रहे इकबाल ने वसीम जाफर के सपॉर्ट में कहा- वसीम भाई ने टीम में कभी धार्मिक चीजों को बढ़ावा नहीं दिया। मैंने उनसे बात किया वह दुखी हैं। सभी आरोप सिर्फ मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

उन्होंने नारों के बारे में कहा कि हम कैंप के समय बार-बार हां, बोलो यार, अपनी जीत हो उनकी हार…। एक दिन जो बोले सो निहाल और फिर अगले दिन जय श्रीराम का नारा लगाया गया था। टीम के एक सदस्य ने हालांकि कहा था कि हमें ‘गो ग्रीन’ कहना चाहिए। हमने तीन महीने के दौरान लगभग 50 स्लोगन इस्तेमाल किए होंगे।

क्या है पूरा मुद्दा
उत्तराखंड क्रिकेट संघ (सीएयू) के अधिकारियों ने जाफर पर आरोप लगाया है कि कोच ने सैयद मुश्ताक अली ट्रोफी के लिए धार्मिक आधार पर राज्य टीम में खिलाड़ियों को शामिल कराने की कोशिश की थी। जाफर उस समय उत्तराखंड टीम के कोच थे, लेकिन अपने ऊपर आरोप लगने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भारत के लिए 31 टेस्ट मैचों में 1944 रन बनाने वाले जाफर के मार्गदर्शन में उत्तराखंड की टीम सैयद मुश्ताक अली ट्रोफी में ग्रुप चरण में पांच मैचों में से केवल एक ही मैच जीत पाई थी।

कप्तानी पर भी बवाल
इस बारे में जाफर का कहना था कि उन्होंने जय बिस्ता को उत्तराखंड टीम का कप्तान बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन सीएयू के सचिव माहिम वर्मा और चयन समिति के चेरयरमैन रिजवान शमशाद ने अब्दुल्लाह को कप्तान बनाए जाने की सिफारिश की थी। जाफर ने कहा, ‘मैंने उनसे कहा था कि जय बिस्ता को कप्तान बनाया जाना चाहिए। मैंने उनसे कहा था कि वह युवा हैं और मैं चाहता हूं कि वह टीम का नेतृत्व करे। वे सहमत हो गए थे। लेकिन बाद में शमशाद और वर्मा ने कहा कि इकबाल अब्दुल्लाह को कप्तान बनाते हैं। मैंने कहा कि ठीक है, उन्हें कप्तान बनाइए।’



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